नोटबंदी पर लालू का कटाक्ष, कैशलेस के पल्लू में छुप रहे हैं पीएम मोदी
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राष्ट्रीय जनता के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने नोटबंदी के एक महीना पूरे होने के बाद एकबार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने मोदी से सवालिया लहजे में कहा कि नोटबंदी के 30 दिन बीत चुके हैं, स्थिति सामान्य नहीं हुई तो 50 दिन बीतने पर क्या मोदी प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देंगे या मुंह छिपाते फिरेंगे? लालू ने गुरुवार को एक के बाद एक कई ट्वीट कर पीएम और नोटबंदी पर निशाना साधा।
लालू ने पहले ट्वीट में लिखा, 'PM के 50 दिन के मोहलत में 22 दिन बाकी हैं। 50 दिन बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई तो क्या मोदी जी इस्तीफा देंगे या मुँह छुपाते घूमेंगे?'
PM के 50 दिन के मोहलत में 22 दिन बाकी हैं। 50 दिन बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई तो क्या मोदी जी इस्तीफा देंगे या मुँह छुपाते घूमेंगे?
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) December 8, 2016
लालू ने आगे लिखा है कि भागते भूत की लंगोटी भली।नोटबंदी में मिट्टी पलीत होते देख काला धन का आलाप त्याग कर अब कैशलेस के पल्लू में छुप रहे हैं।
भागते भूत की लँगोटी भली।
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) December 8, 2016
नोटबन्दी में मिट्टी पलीत होते देख PM काला धन का आलाप त्याग, अब #CashlessEconomy के पल्लू में छुप रहे हैं।
लालू यहीं नहीं रुके, उन्होंने एक अन्य ट्वीट में नोटबंदी से देश में 90 लोगों के मरने का दावा करते हुए कहा, "जो 90 लोग प्रत्यक्ष रूप से नोटबंदी की भेंट चढ़ गए वे क्या गैर मुल्क के थे? उनके परिवार का भार कौन लेगा? प्रधानमंत्री के पास उनके लिए समय और शब्द भी नहीं है?
लालू ने नोटबंदी को जुमला बताते हुए लिखा है कि पीएम मोदी जानते हैं कि बमुश्किल 20 फीसदी भारतीय ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने की स्थिति में है। ये बस नोटबन्दी के दलदल से ध्यान हटाने का जुमला है।
मोदी जी जानते हैं कि बमुश्किल 20%भारतीय ही #CashlessTransactions करने की स्थिति में है। ये बस नोटबन्दी के दलदल से ध्यान हटाने का जुमला है
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) December 8, 2016
पीएम को नसीहत देते हुए लालू ने आगे ट्वीट किया, 'मोदी जी, देश महानगरों से ही नहीं बना है।आपका यह अर्थव्यवस्था पर थोपा घातक प्रयोग गांवों में अन्न,जीवन, मृत्यु, भविष्य का प्रश्न बन गया है।
उन्होंने सरकार के पास गांवों की समझ न होने का आरेप लगाते हुए एक अन्य ट्वीट में आरजेडी नेता ने लिखा, 'न प्रधानमंत्री, न उनके मंत्री, न आर्थिक सलाहकारों या नीति आयोग को गांवों की समझ है। ग्रामीणों की व्यथा को समझना तो बहुत दूर की कौड़ी होगी'।