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Satta Ka Sangram: अमर उजाला के जरिए युवा बोले- पूरे देश में रोजगार नहीं है, एक मधेपुरा क्या है

Sat, 20 Apr 2024 01:20 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 20 Apr 2024 01:20 PM IST
सार

Lok Sabha Election 2024: अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ शनिवार को मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में युवाओं के बीच पहुंचा। अमर उजाला से चर्चा में युवाओं ने कहा कि शिक्षा और रोजगार की सबसे बड़ी समस्या है। विस्तार से पढ़ें पूरी खबर...।
 

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Lok Sabha Election 2024: Satta Ka Sangram in Madhepura, Discussion with youth, Madhepura Lok Sabha Seat
मधेपुरा में युवाओं से चर्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शनिवार को बिहार के मधेपुरा पहुंचा। यहां सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाताओं के मुद्दे जाने गए। वहीं, अब दोपहर में युवाओं से चर्चा हो रही है। युवाओं ने अमर उजाला के तहत शिक्षा और रोजगार की समस्या को उठाया।

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'हमारी कोई मांग नहीं रखी जाती'
बीएन मंडल विश्वविद्यालय कैंपस में हो रही युवाओं से चर्चा में बाबुल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मधेपुरा ही नहीं, पूरे भारत में छात्रों के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। हम छात्र पढ़ाई करने के बाद योग्यता के अनुसार रोजगार या नौकरी नहीं पा पाते, सरकार द्वारा ऐसा कोई टारगेट नहीं बनाया गया है। आज हजारों-लाखों छात्र बेरोजगार घूम रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को ही ले लीजिए, इसकी हालत बेहद खराब है। यहां छात्रों के लिए न बैठने की कोई सुविधा है और न ही ढंग की पढ़ाई होती है और अधिकारी भी व्यवस्था देखने तक नहीं आते। कोई भी जनप्रतिनिधि, अभी यहां पांच साल से दिनेश चंद्र यादव एनडीए के सांसद हैं, वह आज तक इस विश्वविद्यालय को देखने तक नहीं आए। आज तक उन्होंने मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में अन्य कॉलेज की मांग तक नहीं की है। छात्र कई किलोमीटर दूर से आते हैं। विश्वविद्यालय के लिए यहां रोड कनेक्टिविटी बहुत खराब है। यातायात की सुविधा नहीं है। दूर तक हमको क्लास करने के लिए नॉर्थ कैंपस भाड़ा करके जाना पड़ता है। इसमें आने जाने के 80 रुपये खर्च होते हैं। एक बस है भी तो वह नियमित नहीं है, कभी चलती है तो कभी नहीं।
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उन्होंने कहा कि जब से यह मोदी सरकार आई है, तब से विश्वविद्यालय में तानाशाही और बढ़ गई है। यहां कोई भी अधिकारी सुनने के लिए तैयार नहीं है। बोलते हैं ठीक है जाओ तुम किसके पास जाओगे शिकायत करने। कहते हैं कि हमारा तो सांसद से डायरेक्ट कनेक्शन है, राजभवन या मंत्रायलय में हमारे लोग हैं। इस तरह हम लोगों को डराया जाता है। हमारी कोई मांग ही नहीं रखी जाती है। यहां बगल में एक मेडिकल कॉलेज है। अगर कोई छात्र बीमार हो जाता है तो ढंग से अल्ट्रासाउंड तक नहीं हो पाता है। हजारों रुपये देकर प्राइवेट अस्पताल में दिखाना पड़ता है। इसे लेकर हम कह रहे हैं कि जुमला नहीं जवाब दो, दस साल का हिसाब दो।



‘महंगाई बढ़ी, कमाई और दवाई छिनी’
वहीं, नवीन कुमार ने बताया कि फिलहाल तो अभी दस साल में कुछ हुआ ही नहीं है। सच बात तो यही है। यहां पर बेरोजगारी बहुत चरम सीमा पर है। स्वास्थ्य व्यवस्था भी यहां गड़बड़ है, यहां ही नहीं पूरे देश में गड़बड़ है। यहां जिसे नौकरी मिलनी चाहिए, दस साल में वह छीनी गई है। सबसे बड़ी बात तो महंगाई की है। जो गैस सिलेंडर चार सौ रुपये में मिलता था, वह आज बारह सौ रुपये में मिल रहा है। यानी कि महंगाई, कमाई और दवाई कुछ भी सुविधा दस साल में छीना ही गया है जबकि दिया नहीं गया है।

'सत्ता दल के नेता सीटें बेच देते हैं'
कृष्ण कुमार ने बताया कि मधेपुरा जब से लोकसभा क्षेत्र बना तब से कई बड़े-बड़े नेता शरद यादव, लालू यादव हुए और वर्तमान में एनडीए के सांसद दिनेश चंद्र यादव हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे जब स्कूल जाते हैं तो उसके पीछे यह सोच होती है कि हमारे बच्चे स्कूल जाएंगे तो पढ़ेंगे, उसके बाद उसे रोजगार मिलेगा। लेकिन यहां तो रोजगार है ही नहीं। पूरे देश में रोजगार नहीं है, एक मधेपुरा क्या है। दूसरी तरफ बच्चे पढ़ने के बाद अपनी पढ़ाई का बकरी चराने में उपयोग करते हैं। आप यह समझिए कि जो एमए, पीएचडी करके बैठा है, जो स्नातक करके बैठा है। आप जानते हैं कि स्नातक स्तर पर बैंक की नौकरी होती है, जो खत्म है। सी ग्रेड की रेलवे की नौकरी पूरी खत्म है। कुछ दिन पहले तकनीशियन को वहां ले आए जो इंटर के स्तर का था, उसमें तीन-चार हजार वैकेंसी थी। पूरा देश 140 करोड़ जनता में वह पांच हजार सीटें कहां जाएंगी। उसमें से भी ये सत्ता दल के जो नेता हैं कुछ सीटों को बेच देते हैं, गरीब के बच्चे तक आने नहीं देते हैं।
 

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