Bihar Politics: ‘अगला सीएम कोई भी हो, फोकस गुजरात रहेगा’, बिहार की राजनीति पर प्रशांत किशोर का तंज
Prashant Kishor: सुपौल में प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अगला सीएम कोई भी हो, उसका फोकस गुजरात रहेगा। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया, रोजगार वादों और भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए।
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जनसुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर ने सोमवार को सुपौल जिला मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान ही यह स्पष्ट हो गया था कि नीतीश कुमार अगले पांच वर्षों तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें वास्तव में एनडीए के 202 विधायकों का समर्थन प्राप्त नहीं है।
चुनाव प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने 10 हजार रुपये के दम पर वोट खरीदे और जीत के लिए चुनाव आयोग का सहयोग लिया। उन्होंने इन बातों को सुपौल जिला मुख्यालय स्थित नितमया होटल में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान साझा किया।
संगठनात्मक समीक्षा और चुनावी रणनीति पर चर्चा
बैठक के दौरान प्रशांत किशोर ने संगठन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और कार्यकर्ताओं से जमीनी हालात का फीडबैक लिया। आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए रणनीति, टिकट बंटवारे और पिछली हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर अगले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन का संकल्प लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाना रहा।
सीएम पद और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल
बैठक में प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री कोई भी हो, उसकी प्राथमिकता बिहार नहीं बल्कि गुजरात होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भावी मुख्यमंत्री के पास वास्तविक शक्ति नहीं होगी और सरकार मोदी-शाह के इशारों पर चलेगी। उन्होंने भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी सवाल उठाए।
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विकास, रोजगार और भ्रष्टाचार पर टिप्पणी
प्रशांत किशोर ने एनडीए के एक करोड़ रोजगार देने के वादे को चुनावी जुमला बताया और कहा कि इसे पूरा करना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में भ्रष्टाचार और अपराध पर नियंत्रण के लिए ठोस राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है, जो वर्तमान में नहीं दिख रही है।
जनता से आत्ममंथन की अपील
उन्होंने जनता से अपील की कि वे जाति, धर्म और सरकारी लाभ के आधार पर वोट देने की प्रवृत्ति पर विचार करें। उनका कहना था कि यदि मतदान का यह तरीका जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में राज्य की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
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