बिहार के इस अस्पताल में डॉक्टर नदारद: सर्पदंश पीड़िता का ओटी में झाड़फूंक, स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
Bihar: डॉक्टर के इंतजार में समय बीतने पर परिजनों ने मजबूरी में अपने रिश्ते की एक महिला तांत्रिक को अस्पताल बुला लिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि तांत्रिक ने अस्पताल के ओटी में ही करीब 15-20 मिनट तक झाड़फूंक की, और इस दौरान उसे रोकने वाला कोई नहीं था।
विस्तार
सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। सोमवार देर रात छातापुर थाना क्षेत्र के नरहिया वार्ड-1 निवासी रविन्द्र सरदार की 18 वर्षीय पुत्री आरती कुमारी को घर के बाहर सांप ने डंस लिया। परिजन उसे तत्काल इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौजूद नहीं थे।
डॉक्टर के इंतजार में समय बीतने पर परिजनों ने मजबूरी में अपने रिश्ते की एक महिला तांत्रिक को अस्पताल बुला लिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि तांत्रिक ने अस्पताल के ओटी में ही करीब 15-20 मिनट तक झाड़फूंक की, और इस दौरान उसे रोकने वाला कोई नहीं था।
पीड़िता की मां ने बताया कि आरती घर के बाहर गई थी तभी सांप ने पैर में डंस लिया। परिजन धर्मेंद्र सरदार ने कहा कि डॉक्टर नहीं मिलने पर मजबूरन तांत्रिक का सहारा लेना पड़ा। मौके पर मौजूद तांत्रिक रजनी देवी ने भी स्वीकार किया कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में उन्होंने ओटी में झाड़फूंक की।
पढ़ें: राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में नालंदा की बेटी मुस्कान ने जीता रजत, खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन
इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात जीएनएम नीलम कुमारी ने कहा कि वह थोड़ी देर पहले ही ड्यूटी पर पहुंची हैं और उन्हें यह जानकारी नहीं है कि किस डॉक्टर की ड्यूटी थी। अस्पताल के ड्यूटी चार्ट के अनुसार रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक डॉक्टर संजीव कुमार सुमन की ड्यूटी थी, जो मौके पर नहीं थे और न ही किसी अन्य चिकित्सक की व्यवस्था की गई थी।
14 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से बने इस अस्पताल भवन में आधुनिक सुविधाओं के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन डॉक्टर की अनुपस्थिति और ओटी में झाड़फूंक जैसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब त्रिवेणीगंज अस्पताल लापरवाही के कारण सुर्खियों में आया हो।