{"_id":"6707bf81b0261d01530db5a9","slug":"bihar-news-ashtami-and-maha-navami-date-tantracharya-arun-kumar-news-in-hindi-2024-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar News: कब है महाअष्टमी और महानवमी? यहां देख ले सही तारीख…तंत्राचार्य अरुण कुमार ने दी जानकारी","category":{"title":"Spirituality","title_hn":"आस्था","slug":"spirituality"}}
Bihar News: कब है महाअष्टमी और महानवमी? यहां देख ले सही तारीख…तंत्राचार्य अरुण कुमार ने दी जानकारी
Thu, 10 Oct 2024 05:21 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Thu, 10 Oct 2024 05:21 PM IST
सार
Bihar News: नवरात्र को शुरू हुए यूं तो गुरुवार को आठ दिन हो गए हैं, लेकिन पंचांगों के अनुसार महाअष्टमी का व्रत शुक्रवार को होगा। गुरुवार की सुबह 07:38 बजे से महाअष्टमी की शुरुआत हुई है और शुक्रवार की सुबह 07:03 बजे तक महाअष्टमी का योग है। इसके बाद नवमी तिथि का प्रवेश होगा।
विज्ञापन
शारदीय नवरात्रि
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुपौल सदर प्रखंड के सुखपुर निवासी तंत्राचार्य अरुण कुमार झा मुन्ना बताते हैं कि शनिवार की सुबह 05 बज कर 58 मिनट 24 सेकेंड पर नवमी तिथि समाप्त होगी। अर्थात अष्टमी और नवमी का व्रत एवं पूजन शुक्रवार को ही होगा। शनिवार की सुबह सूर्योदय के पूर्व ही दशमी तिथि का प्रारंभ हो रहा है।
विज्ञापन
लिहाजा विजयादशमी की पूजा शनिवार को ही होगी। हालांकि विजयादशमी का सारा पूजन कार्य सूर्योदय के साथ ही अर्द्धप्रहरा छांट कर प्रथम प्रहर में करना श्रेयस्कर होगा। यानी सुबह 07:44 बजे से विजयादशमी की पूजा शुरू की जा सकती है। गुरुवार को किया गया पूजन और उपवास महासप्तमी का ही माना जाएगा। तंत्राचार्य के अनुसार पद्म पुराण में उपवास को लेकर विस्तृत व्याख्या की गई है। जिसमें कहा गया है कि महाष्टमी व्रत अष्टमी नवमी युता ही ग्राह्य यानी ग्रहण करने योग्य है। अष्टमी नवमी युक्त और नवमी अष्टमी युता ग्राह्य है।
विज्ञापन
शारदीय नवरात्र में हमेशा अष्टमी नवमी युक्ता ही ग्राह्य है। अष्टमी नवमी युक्त अष्टमी व्रत उमामाहेश्वरी व्रत कहलाता है। कारण अष्टमी तिथि के स्वामी शिव हैं और नवमी तिथि की स्वामी माता दुर्गा हैं। अतएव यह संयोग अर्द्धनारीश्वर संयोग बनाता है, जो बहुत ही दुर्लभ है।
विज्ञापन
सप्तमी और अष्टमी के संयुक्त उपवास बनता है शोक-संताप का कारण
सप्तमी संयुक्ता अष्टमी नित्य ही शोक एवं संताप का कारण बनती है। दानव राज जम्भ ने सप्तमी विद्धा महाअष्टमी व्रत किया था। फलतः उस दानव पुङ्गम की हत्या इंद्र ने कर दी। जिसका वर्णन पद्म पुराण में किया गया है। पुराण यह बताता है कि सप्तमी युता अष्टमी व्रत का त्याग करना चाहिए। नवमी संयुक्ता अष्टमी व्रत ही करना चाहिए।
निर्णय सिंधु भी पद्म पुराण की करता है पुष्टि
तंत्राचार्य अरुण कुमार झा मुन्ना के अनुसार निर्णय सिंधु भी अष्टमी तिथि नवमी उदयकाल में ग्राह्य बताता है। वही सप्तमी तिथि युक्त अष्टमी संतान वालों के लिए सर्वथा त्याज्य बताया गया है। इसीलिए सभी संशय को त्याग कर महाअष्टमी का व्रत शुक्रवार को ही करना उचित होगा। नवमी का भी व्रत एवं पूजा आदि सारा कार्य शुक्रवार को ही संपन्न होगा।