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1200 किमी साइकिल चलाकर बीमार पिता को घर लाने वाली ज्योति पर बनेगी फिल्म

Thu, 28 May 2020 10:03 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 28 May 2020 10:03 AM IST
सार

  • 1200 किमी साइकिल चलाकर पिता को घर लाने वाली ज्योति पर बनेगी फिल्म।
  • बॉलीवुड फिल्मकार विनोद कापड़ी ने पिता के साथ अनुबंध किया है।

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Bihar Latest News in Hindi jyoti kumari girl who cycled 1200 km to take ailing father home vinod kapri set to make film on her
अपने पिता के साथ ज्योति (फाइल फोटो) - फोटो : social media

विस्तार

लॉकडाउन में बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर हरियाणा के गुरुग्राम से 1200 किलोमीटर साइकिल चलाकर बिहार के दरभंगा पहुंचने वाली ज्योति कुमारी को लेकर बॉलीवुड आगे आया है। बॉलीवुड फिल्मकार विनोद कापड़ी बिहार की बेटी ज्योति पर ‘साइकिल गर्ल’ नाम से फिल्म बनाएंगे।

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ज्योति ने साइकिल से 1200 किमी की दूरी तय की थी। विनोद कापड़ी ने कहा, ‘फिलहाल मैं पैदल और साइकिल से घर जाने वाले मजदूरों पर शॉर्ट फिल्म बना रहा हूं लेकिन मैं ज्योति पर एक फिल्म बनाने की तैयारी में हूं। इसके लिए मैंने उनके पिता से अनुबंध भी कर लिया है।’
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बता दें कि ज्योति दरभंगा जिले की सिरुहुलिया गांव की रहने वाली है। अपना दर्द बयां करते हुए उसने बताया था कि खाने-पीने के लिए हमारे पास पैसे नहीं बचे थे। रुम मालिक भी किराया न देने पर तीन बार बाहर निकालने की धमकी दे चुका था। गुरुग्राम में मरने से अच्छा था कि हम रास्ते में मरें। इसलिए मैंने बीमार पापा से कहा कि आप साइकिल से चलो। मैं आपको ले चलूंगी। पापा नहीं मान रहे थे, लेकिन फिर मैंने जबरदस्ती की और आखिरकार जैसे-तैसे वे मान गए।
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ज्योति अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठा कर हरियाणा के गुरुग्राम से दरभंगा के लिए निकली। इस दौरान रास्ते में कई तरह की परेशानियां आईं लेकिन हर बाधा को ज्योति बिना हिम्मत हारे पार करती गई। कई बार ज्योति को खाना भी नहीं मिला। रास्ते में कहीं किसी ने पानी पिलाया तो कहीं किसी ने खाना खिलाया। उसने 10 मई को गुरुग्राम से चलना शुरू किया और 15 मई की शाम घर पहुंची।



ऑटो चलाने वाले पिता थे चोटिल 
मोहन पासवान गुरुग्राम में किराये पर ऑटोरिक्शा चलाते हैं लेकिन वह चोटिल हो गए थे। उन्होंने ऑटो भी वाहन मालिक को लौटा दिया था। आय का कोई साधन नहीं था तब बेटी के दिए हौसले से पिता ने पुरानी साइकिल ली और बेटी ने पिता को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी ली।

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