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Bihar : उपेंद्र कुशवाहा को जदयू अध्यक्ष ललन सिंह पार्टी से हटाने वाले थे, खुद छोड़ा तो बोले- जहां जाएं, टिकें

Mon, 20 Feb 2023 03:39 PM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कुमार जितेंद्र ज्योति Updated Mon, 20 Feb 2023 03:39 PM IST
सार

Lalan Singh Bihar : जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सोमवार दोपहर करीब सवा 3 बजे संवाददताओं को उपेंद्र कुशवाहा को हटाने के बाद में घोषणा करते, इससे पहले कुशवाहा की घोषणा आ गई। ललन ने कहा- जहां गए, टिकें अब।

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JDU national president Rajiv Ranjan singh lalan singh told about dismissal of upendra kushwaha from party
जदयू दफ्तर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का संवाददाता सम्मेलन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उपेंद्र कुशवाहा ने जनता दल यूनाईटेड (JDU) अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह 'ललन' के लिए कुछ छोड़ा ही नहीं था। सोमवार को ललन सिंह ने जदयू दफ्तर में दोपहर 3 बजे संवाददाता सम्मलेन रखा था ताकि कुशवाहा को लेकर कुछ घोषणा कर सकें, लेकिन इसके पहले की कुशवाहा ने खुद जदयू छोड़ने, MLC पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी और नई पार्टी भी बना दी। सोमवार को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि आम राय के विपरीत उन्हें जगह मिली थी, लेकिन वह टिकने वाले नेता तो हैं ही नहीं। अब जहां जा रहे, वहां टिके रहें।

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JDU national president Rajiv Ranjan singh lalan singh told about dismissal of upendra kushwaha from party
दुसरे की बातों पर चलते हैं सीएम, का ललन सिंह ने दिया जवाब - फोटो : अमर उजाला

दुसरे की बातों पर चलते हैं सीएम, का ललन सिंह ने दिया जवाब 
उपेन्द्र कुशवाहा ने आरोप लगाते हुए कहा था कि नीतीश कुमार अपने आसपास बैठे तीन चार लोगों की ही बात मानते हैं, अपने बुद्धि विवेक से कुछ नहीं करते हैं।  इस बात पर जब ललन सिंह से मीडिया ने सवाल पूछा तो इस का जवाब देते हुए ललन सिंह ने कहा कि उपेन्द्र कुशवाहा जब पहली बार विधायक बने उस समय नीतीश कुमार ने उपेन्द्र कुशवाहा को विरोधी दल का नेता बनाया था। जबकि उस समय वह नेता नहीं थे बल्कि उपनेता थे। जब विरोधी दल के नेता का चुनाव हो रहा था उस समय छह टर्म, सात टर्म विधायक बने लोग भी पार्टी में मौजूद थे। इनके व्यक्तिगत स्वभाव से सभी परिचित थे। इसलिए कोई नहीं चाहता था कि इनको पार्टी में लिया जाए और इन्हें नेता बनाया जाए। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सब की बातों को दरकिनार करते हुए उन्हें विरोधी दल का नेता बनाया, उनको सम्मान दिया। इसलिए यह कहना गलत होगा कि नीतीश कुमार दूसरों के बातों पर चलते हैं जबकि हकीकत यह है कि वे सुनते सब की हैं लेकिन करते अपने मन की हैं ।

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