जेडीयू में घमासान से नीतीश परेशान
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पार्टी के अंदर मचे घमासान और बागी नेताओं के बयान से परेशान हैं। बागी विधायकों ने साफ कर दिया है कि अगर पार्टी उनकी मांग नहीं मानती है, तो वे राज्यसभा चुनाव में जदयू को परेशानी में डाल सकते हैं।
दरअसल सदन का अंकगणित कहता है कि अगर जदयू के 20 विधायक भी क्रास वोटिंग कर देते हैं, तो पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाएगी।
दूसरी ओर नाराज विधायकों ने शुक्रवार एक स्वर में दावा किया था कि पार्टी के 50 विधायक उनके साथ हैं और उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के आदेश का इंतजार है। ऐसे हालात में नीतीश कुमार के पास बहुत कम विकल्प बचते हैं।
आसान नहीं राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन
बैकफुट पर आए नीतीश अब बीच का रास्ता तलाशने में जुट गए हैं। इसी का नतीजा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही नाराज चल रहे विधान पार्षद नीरज कुमार और संजय सिंह से शुक्रवार को नीतीश ने अलग-अलग बात की।
शनिवार को पार्टी नेता नीरज कुमार ने एक बयान जारी कर कहा कि नैतिकता के आधार पर जदयू राज्यसभा चुनाव में केवल एक उम्मीदवार मैदान में उतारे। दरअसल तीनों सीटों पर पहली वरीयता देने का हक इस बार विधायकों को है।
ये तीनों सीटें भाजपा, राजद और लोजपा के हिस्से में थीं। नीरज कुमार ने कहा कि वो केंद्रीय नेतृत्व से नैतिकता के आधार पर ऐसा करने का अनुरोध करते हैं। इसका मतलब साफ है कि जदयू की ओर से केवल शरद यादव राज्यसभा जाएंगे।
क्रॉस वोटिंग का डर
बाकी दो सीटों पर जदयू अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा। जदयू इन दो सीटों पर किसको समर्थन देगा, इस पर अभी रहस्य बना हुआ है। भाजपा पहले ही कह चुकी है कि वो अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
ऐसे में राजद अपना उम्मीदवार उतारेगा यह संभव नहीं लग रहा है। कांग्रेस अभी यह तय नहीं कर पायी है कि वो जदयू से समर्थन ले या न ले। फिर कोई निर्दलीय जिसे जदयू के विधायकों से समर्थन मिल जाये, वो राज्यसभा जा सकता है।
हालांकि प्रदेश जदयू अध्यक्ष वशिष्ट नारायण सिंह ने कहा कि अभी विकल्पों पर केवल चर्चा हो रही है। नीरज कुमार पार्टी के पुराने नेता हैं। उनका सुझाव पार्टी के बड़े नेताओं के समक्ष रखा जायेगा।
क्या कहेंगे शरद यादव?
सूत्रों का कहना है कि नीरज कुमार का बयान एक खास संदेश देने के लिए दिलवाया गया है। जदयू की ओर से राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों के चयन में बड़ा खेल हो सकता है।
जदयू किसी भी हाल में चुनाव के दौरान खतरा मोल लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष शरद यादव के पटना आने के बाद ही कोई अंतिम फैसला होगा।
ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि शरद यादव राज्यसभा के लिए उम्मीदवार तय करने में अहम भूमिका निभायेंगे और पूर्व सीएम नीतीश कुमार को इस बार बैकफुट पर जाना होगा।