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डेढ़ साल से लापता है हैदराबाद ब्लास्ट का संदिग्ध

Sun, 24 Feb 2013 11:04 PM IST
पटना/ब्यूरो
पटना/ब्यूरो Updated Sun, 24 Feb 2013 11:04 PM IST
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hyderabad blast suspect is missing one and half years

हैदराबाद सीरियल ब्लास्ट में एनआईए को जिस तहसीन की तलाश है, वह पिछले डेढ़ साल से लापता है। इधर, नेपाल सीमा से हिरासत में लिए गए दो लोगों से एनआईए और रॉ समेत अन्य एजेंसियों ने गहन पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि दोनों का इस बम ब्लास्ट से कोई संबंध नहीं पाया गया।

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पुलिस के अनुसार बीती रात हिरासत में लिए गए सोमालिया निवासी अब्दुल ओमार और हैदराबाद निवासी अब्दुल उमर का बम ब्लास्ट से कोई रिश्ता नहीं पाया गया है। इनके पास से मिले एक लैपटॉप में सिकंदराबाद और दिल्ली के कुछ बाजारों की वीडियो रिकॉर्डिंग मिलीं।
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पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक गणेश कुमार ने अमर उजाला को बताया कि सोमालियाई नागरिक से जर्मन का पासपोर्ट भी मिला है। इसने भारत की सीमा में बगैर वीजा के प्रवेश किया और हैदराबाद जाकर शादी की। भारत से बाहर निकलने का प्रयास करते इमीग्रेशन टीम ने सीमा पर दोनों को पकड़ा था। ओमार के खिलाफ बगैर वीजा भारत में प्रवेश करने के मामले में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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उधर, उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक आरोपियों की तलाश में एनआईए की दो टीमों ने बिहार के दरभंगा और समस्तीपुर इलाकों में छापामारी की। इन टीमों को घटना में वांछित दो लोगों की तलाश है। इन्हीं में एक समस्तीपुर जिले के मनियारी निवासी तहसीन अख्तर उर्फ मोनू के परिजनों का कहना है कि वह दरभंगा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गया था।

दिसंबर-11 के बाद से उसका कोई पता नहीं है। उसकी गुमशुदगी भी पुलिस में दर्ज कराई जा चुकी है। इस मामले में दोनों जिलों के पुलिस अफसरों ने छापामारी की सूचना से इनकार किया है। अलबत्ता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया से बातचीत में सिर्फ इतना कहा कि सभी जांच एजेंसियों की पूरी मदद की जा रही है।

अब्दुल उमर के पते गलत निकले
बिहार में पकड़े गए स्थानीय निवासी अब्दुल उमर ने जिस पते पर अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था, वह फर्जी है। बिहार पुलिस द्वारा उमर से प्राप्त जानकारियां हैदराबाद पुलिस को भेजी थीं, जिनकी पुलिस ने पुष्टि कराई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ‘हम उस पते पर पूछताछ कराई, जिसके आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया गया था। लेकिन वहां से मालूम हुआ कि इस नाम का कोई आदमी नहीं रहता।’


इस बीच स्थानीय पुलिस को वीडियो फुटेजों के धुंधले होने के कारण जांच में मुश्किलें आ रही हैं। पुलिस शहर की साइकिल की दुकानों पर भी पूछताछ कर रही है। अभी तक विस्फोटों की जांच के मामले में करीब 30 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

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