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नीतीश-तेजस्वी पर फेंकी गई चप्पल, जानें कब किस पर चले जूते-चप्पल?

Fri, 30 Oct 2020 04:13 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Fri, 30 Oct 2020 04:13 PM IST
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History of Sandal shoe thrown in politics bihar nitish kumar tejaswi yadav chidambram indira gandhi gorge bush muntzer al zaidi lal krishna advani
बिहार चुनाव - फोटो : Amar Ujala Graphics
बिहार में पहले चरण का मतदान हो चुका है। अब सभी राजनीतिक दल दूसरे चरण के चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं, लेकिन पहले चरण के मतदान के दौरान सीएम नीतीश कुमार के काफिले पर चप्पल फेंकी गई तो राजद नेता तेजस्वी यादव के मंच पर भी ऐसी ही हरकत हुई। इस रिपोर्ट में हम रूबरू होते हैं चुनाव और जूते-चप्पल कांड के कनेक्शन से। साथ ही, जानते हैं कि अब तक किस-किस नेता पर और कब जूते-चप्पल फेंके गए।
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बिहार में चप्पल कांड
गौरतलब है कि चुनाव कोई भी हो, उसका जूते और चप्पल से कनेक्शन जुड़ ही जाता है। यानी वोटरों की नाराजगी नेताओं पर जूता या चप्पल बनकर बरसती है। इस वक्त बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार जोर-शोर पर चल रहा है। भाजपा प्रत्याशी हो या जदयू कैंडिडेट, राजद उम्मीदवार हो या कांग्रेसी, सभी राजनीतिक दल मतदाताओं के अपने पक्ष में मोड़ने के लिए जी-जान से जुड़े हुए हैं। इन सबके बीच बिहार चुनाव का कनेक्शन भी जूते और चप्पल से जुड़ गया। 
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तेजस्वी यादव से हुई शुरुआत
आपको बता दें कि बिहार में चप्पल फेंकने की शुरुआत राजद नेता तेजस्वी यादव से हुई। हुआ यूं कि जब तेजस्वी यादव औरंगाबाद के कुटुम्बा विधानसभा क्षेत्र के बभंडी में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। जब वह चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे तो उन पर चप्पल फेंकी गई। इसके बाद तेजस्वी पर दो और चप्पलें फेंकी गईं, जिनमें एक चप्पल तेजस्वी के पीछे गिरी, जबकि दूसरी चप्पल तेजस्वी के गोद में जा गिरी। 
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नीतीश पर भी हुआ ‘हमला’
तेजस्वी पर चप्पल फेंके जाने के बाद 2-3 दिन बाद सीएम नीतीश कुमार पर भी चप्पल से हमला किया गया। दरअसल, सीएम नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर के सकरा में चुनावी रैली को संबोधित करने गए थे। उस दौरान सीएम के हेलीकॉप्टर की तरफ किसी व्यक्ति ने चप्पल फेंक दी। हालांकि, वह चप्पल हेलीकॉप्टर तक पहुंच नहीं पाई। 

इंदिरा गांधी पर भी फेंका गया था जूता
आपको बता दें कि चुनाव और जूते-चप्पल फेंके जाने का कनेक्शन काफी पुराना है। भारतीय राजनीति के इतिहास पर गौर फरमाएं तो सबसे पहले जूता फेंकने का जिक्र 1969 में मिलता है। दरअसल, उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ऊंझा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी शंकर लाल गुप्त के पक्ष में प्रचार करने गई थीं। जब इंदिरा सभा को संबोधित कर रही थीं, उस दरमियान उन पर जूता फेंका गया। तब इंदिरा गांधी ने कहा था कि आप चाहे जूता फेंके या पत्थर मारें, हम अपनी बात कहे बिना यहां से नहीं जाएंगे।

इन नेताओं पर भी चले जूते-चप्पल
बात जब छिड़ चली है तो आपको बता दें कि भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी भी इस हमले से बच नहीं पाए। दरअसल, वह मध्य प्रदेश के कटनी में एक चुनावी रैली में गए थे। उस दौरान भाजपा के ही एक कार्यकर्ता ने उन पर खड़ाऊ फेंकी थी। बताया जाता है कि वह कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा से काफी नाराज था। इसके अलावा पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर एक वरिष्ठ पत्रकार ने जूता फेंका था। यह घटना दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई थी। वह पत्रकार सीबीआई द्वारा सिख दंगों के आरोपियों को क्लीन चिट दिए जाने से नाराज था। वहीं, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर इस तरह के हमले कई बार हो चुके हैं। उन पर जूते के अलावा स्याही और लाल मिर्च भी फेंकी गई। इसके अलावा एक बार चुनावी रैली के दौरान एक युवक ने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया था। 


विदेशों में भी चले हैं जूते
जूते-चप्पलों और नेताओं का नाता सिर्फ हिंदुस्तान तक ही सीमित नहीं है। विदेशों में भी कई बार इसी तरीके से नाराजगी जताई जा चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर दो बार जूते फेंके गए। यह हरकत बगदाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई, जिसे इराक के पत्रकार मुंतजर अल जैदी ने अंजाम दिया था। दरअसल, मुंतजर इराक में लगातार बढ़ते अमेरिकी दबदबे से नाराज थे। गौर करने वाली बात यह है कि मुंतजर खुद भी जूते वाले हमले का शिकार बने और पेरिस में उन पर जूता फेंका गया।  इजरायली राजदूत पर भी जूते की मार पड़ चुकी है। वह स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी में थे और दर्शक दीर्घा से दो लोगों ने उन पर जूता फेंक दिया। इस हरकत को अंजाम देने की वजह फिलीस्तीन पर इजरायली नीतियों का विरोध करना बताया गया।
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