फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   nawada farmers protest land acquisition sudhakar singh detained today bihar news

बिहार: जमीन अधिग्रहण पर किसानों का हल्लाबोल, सांसद सुधाकर हिरासत में, धान की फसल के मुआवजे पर आर-पार की लड़ाई

Mon, 26 Oct 2026 09:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नवादा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नवादा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 26 Oct 2026 09:48 PM IST
सार

नवादा में गंगाजल परियोजना के दूसरे चरण के लिए जमीन अधिग्रहण का विवाद अब सड़क पर उतर आया है। मोतनाजे-मधुबन में तैयार धान की फसल को नुकसान और जमीन छिनने की आशंका से नाराज किसानों ने ट्रैक्टरों के काफिले के साथ जिला मुख्यालय कूच किया। 

विज्ञापन
nawada farmers protest land acquisition sudhakar singh detained today bihar news
किसानों का आक्रोश सड़कों पर दिखा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के नवादा जिले में मोतनाजे-मधुबन में जमीन अधिग्रहण और धान की तैयार फसल को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को लेकर किसानों का आक्रोश सड़कों पर दिखा। सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसान ट्रैक्टरों के काफिले के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे। वे अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने आईटीआई मैदान के पास ही उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसानों ने पैदल प्रतिरोध मार्च निकाला और धरना देकर विरोध जताया।
विज्ञापन


प्रदर्शन के दौरान बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह, पूर्व विधायक मोहम्मद कामरान और किसान नेता दिनेश कुमार तथा अशोक प्रसाद सिंह को हिरासत में लिया गया। संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, सभी को शाम करीब 6:30 बजे अकबरपुर थाने से बिना बॉन्ड भरवाए रिहा कर दिया गया। हिरासत को लेकर सांसद ने कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि किसान मोर्चा ने पुलिस पर बल प्रयोग और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।
विज्ञापन


ट्रैक्टरों से पहुंचे किसान, आईटीआई मैदान के पास रोका गया काफिला
संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक, मोतनाजे-मधुबन और आसपास के गांवों से किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर नवादा शहर पहुंचे थे। उनका उद्देश्य निर्धारित धरनास्थल पर पहुंचकर जमीन अधिग्रहण और फसल क्षति के मुद्दे पर अपनी मांगें रखना था। हालांकि, आईटीआई मैदान के पास सदर अनुमंडल पदाधिकारी और पुलिस बल ने ट्रैक्टरों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद सांसद सुधाकर सिंह, पूर्व विधायक मोहम्मद कामरान और किसान नेता दिनेश कुमार, अशोक प्रसाद सिंह, कपिल देव प्रसाद तथा पवन कुमार समेत कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए। किसानों ने नारेबाजी करते हुए धरनास्थल की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं मिली।

मोर्चा का कहना है कि धरने के लिए टेंट और माइक की व्यवस्था की गई थी तथा कार्यक्रम की सूचना प्रशासन को लिखित रूप से दी गई थी। इसके बावजूद रास्ते में रोके जाने से किसानों में नाराजगी बढ़ गई। उनका कहना है कि खेतों में लगी तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचा है और प्रभावित किसानों को इसका उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

सांसद ने पूछा- किस कानून के तहत लिया गया हिरासत में?
हिरासत में लिए जाने के बाद सांसद सुधाकर सिंह ने पुलिस वाहन से पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा है। बाद में अकबरपुर थाने से फेसबुक लाइव के जरिए उन्होंने कहा कि उन्हें न तो कोई वारंट दिखाया गया और न ही हिरासत में रखने का कानूनी आधार बताया गया।

सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मामले का संज्ञान लेने और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने की अपील की। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से भी कानून के पालन को सुनिश्चित करने की मांग की। सुधाकर सिंह ने कहा कि यदि उनके साथ नियमों के विरुद्ध कार्रवाई हुई है, तो वह संसद में विशेषाधिकार हनन का मामला उठाएंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, सांसद को अगले दिन संसद की कार्यवाही में शामिल होने के लिए दिल्ली जाना था और उनके लिए राजधानी एक्सप्रेस में आरक्षण था। हिरासत के कारण उनकी ट्रेन छूट गई। मोर्चा ने इस मामले को लेकर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की बात कही है।

किसान नेता से मारपीट और महिलाओं से दुर्व्यवहार का आरोप
संयुक्त किसान मोर्चा ने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। संगठन का दावा है कि किसान नेता अशोक प्रसाद सिंह के साथ मारपीट की गई और उनका कुर्ता फाड़ दिया गया। मोर्चा के मुताबिक, इस दौरान वह घायल हो गए। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

किसान नेता दिनेश कुमार ने दावा किया कि आंदोलन में शामिल होने आ रहे किसानों को रास्ते में कई जगह रोका गया। उनके अनुसार, एक स्थान पर करीब आधे घंटे तक किसानों को रोकने के बाद आईटीआई मैदान के पास भी आगे नहीं बढ़ने दिया गया।

छह मांगों के जरिए प्रशासन पर दबाव
संयुक्त किसान मोर्चा ने जिलाधिकारी को संबोधित मांगपत्र में छह प्रमुख मांगें उठाई हैं। इनमें धान की फसल बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवजा और मोतनाजे-मधुबन को उजाड़ने की योजना तत्काल बंद करना शामिल है। मोर्चा ने मधुबन जलाशय निर्माण के नाम पर सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने और इसके विकल्प के तौर पर पचाने नदी को जलाशय के रूप में विकसित करने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और प्रभावित परिवारों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी मोर्चा ने सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11(1) के तहत प्रक्रिया शुरू की गई, जबकि बाद में जिलाधिकारी की ओर से धारा 40 के आपातकालीन प्रावधानों के तहत अधिग्रहण की बात कही गई। मोर्चा इसे विरोधाभासी बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। इन कानूनी दावों पर प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।

गंगाजल परियोजना के लिए करीब 1,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण
मोतनाजे-मधुबन में जमीन को लेकर जारी विवाद गंगाजल परियोजना के दूसरे चरण से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए दोनों गांवों में करीब 1,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है।

खेती की जमीन चली जाने और तैयार फसल नष्ट होने की स्थिति में उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए वे अधिग्रहण की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन, सामाजिक प्रभाव का आकलन और प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा का आरोप है कि किसानों के हितों और उनकी समस्याओं की अनदेखी कर जमीन लेने की कार्रवाई की जा रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

ये भी पढ़ें- बिहार: गयाजी से बैंकॉक का सफर होगा आसान, इंडिगो की पहली नॉन-स्टॉप उड़ान शुरू; पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा


धरनास्थल पर डटे रहे किसान, सुरक्षा बढ़ाई गई
नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बीच किसान अपनी मांगों को लेकर धरनास्थल पर डटे रहे। धरने में पूर्व विधायक प्रदीप महतो और वर्तमान विधायक प्रतिनिधि अशोक महतो भी पहुंचे। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील स्थानों, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों और धरनास्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई।

सदर-2 के एसडीपीओ राहुल सिंह और नगर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में पुलिस की सक्रियता देखी गई। किसानों की प्रमुख मांग है कि फसल क्षति का निष्पक्ष आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए। संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई और किसानों की मांगों पर होने वाली पहल पर टिकी हैं।

 

 

नवादा में जमीन अधिग्रहण और धान की फसल क्षति के विरोध में ट्रैक्टरों के साथ प्रदर्शन करते किसान,

प्रदर्शन करते किसान।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed