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Bihar: महामंडलेश्वर दास ने महात्मा गांधी के सिद्धांत को बताया कायरता, कहा- सत्य सनातन इसकी इजाजत नहीं देता

Mon, 26 May 2025 04:59 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Mon, 26 May 2025 04:59 PM IST
सार

Aurangabad News: महामंडलेश्वर अखिलेश्वर दास सोमवार को एक यज्ञ में शामिल होने औरंगाबाद पहुंचे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों, मुस्लिम समुदाय और पहलगाम हमले पर कई बातें कही। इस दौरान उन्होंने औरंगाबाद का नाम बदलने की मांग भी की।

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Mahamandaleshwar Akhileshwar Das called Gandhi's principle cowardice, says Satya Sanatan does not allow this
महामंडलेश्वर अखिलेश्वर दास ने कहा कि गांधी की बात हम नहीं मानते हैं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय धर्माचार्य मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख महामंडलेश्वर अखिलेश्वर दास ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक यज्ञ में शामिल होने औरंगाबाद आए महामंडलेश्वर ने सोमवार को यहां कहा कि गांधी की बात हम नहीं मानते हैं। गांधी एक गाल में थप्पड़ मारने पर दूसरा गाल आगे करने की बात करते हैं, लेकिन दूसरा थप्पड़ पड़ गया तो तीसरा गाल कहां से लाएंगे। यह कायरता है और हमारा सत्य सनातन धर्म इसकी इजाजत नहीं देता बल्कि जैसे को तैसा की बात कहता है और हमें खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी राह पर चल रहे हैं।

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‘धर्म-राजनीति के समन्वय का सुंदर उदाहरण रामायण का सुंदर कांड’
अखिलेश्वर दास ने कहा कि मोदी राजधर्म का सम्यक निर्वहन कर रहे और राजनीति बिना धर्म के चल ही नहीं सकती। धर्म के साथ राजनीति और राजनीति के साथ धर्म का समन्वय बेहद जरूरी है, जो वर्तमान में नरेंद्र मोदी की सरकार में दिख रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म और राजनीति के समन्वय का सबसे सुंदर उदाहरण रामायण का सुंदर कांड है, जिसे हर किसी को पढ़ना और मनन करना चाहिए।
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पहलगाम हमले पर केंद्र को कटघरे में लाने के सवाल पर साधी चुप्पी
महामंडलेश्वर दास ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा पहलगाम घटना को लेकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़े किए जाने के सवाल पर टिपण्णी से परहेज कर कहा कि वे सनातन धर्म के सर्वोच्च गरिमामय पद पर हैं। इस नाते उनके बयान पर कोई टिपण्णी नहीं करेंगे, लेकिन इतना जान लीजिए कि वे आदरणीय हैं और रहेंगे। उनकी टिपण्णी का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। किसी खास विषय पर सबकी राय एक समान नहीं हो सकती है, वह उनके बयान पर भी लागू होता है। उनका बयान असहमति वाला भले ही है, लेकिन सभी शंकराचार्य, धर्माचार्य और संत महात्मा पहलगाम हमले के बाद केंद्र सरकार के स्तर से की गई कार्रवाई से सहमत हैं।
 
‘कट्टरवादिता समाप्त हो सकती, सनातन नहीं’
सनातन पर खतरा के सवाल पर बिना किसी धर्म का नाम लिए उन्होंने कहा कि कट्टरवादिता खत्म हो सकती है, लेकिन सनातन नहीं। सनातन था, है और रहेगा, इस पर कोई आंच नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि संस्कृति सीखने जाने की हमें कहीं जाने की जरूरत नहीं है, यह हमारे डीएनए में है। किसी धर्म का नाम लिए बिना उन्होंने फिर कहा कि उनकी उपासना पद्धति अलग है। लेकिन अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा की परंपरा के बावजूद हमारी उपासना पद्धति और हमारा सनातन धर्म एक है।
 
अखिलेश्वर दास ने कहा कि सनातन पर अंग्रेजों ने हमला किया, तुर्कों ने हमले किए, लेकिन हमारा कुछ नहीं बिगड़ा। वे आज कहां है और हम कहां है, यह सब दिख रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे धर्म में कट्टरता आ ही नहीं सकती, क्योंकि हमारे यहां विशेष मुहुर्त छोड़कर किसी भी समय पूजा-आराधना करने की इजाजत है। हमारे यहां समय की बाध्यता नहीं है। यह हमारे मन पर है, हमें जब समय मिले हम पूजा कर सकते हैं। हमारे यहां पग-पग पर परंपरा और संस्कार हैं, जिनसे हम कभी विमुख हो नहीं सकते।

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‘भारत विश्वगुरू था, है और रहेगा’
महामंडलेश्वर ने कहा कि भारत सदियों से विश्वगुरू रहा है, आज भी है और आगे भी रहेगा, क्योंकि हमारा भारत किसी की लकीर मिटाने में यकीन नहीं करता बल्कि खुद ही लंबी लकीर खींचता है। इतनी लंबी लकीर खींचता है कि दूसरा कोई उसके समान लकीर खींच नहीं सकता। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हमारी प्रगति से दुनिया के लोगों को तकलीफ हो रही है। वे विरोध भी कर रहे हैं, लेकिन हम उनका विरोध नहीं कर रहे, क्योंकि हमारा सनातन धर्म ‘सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया:’ यानी सबके सुखी और निरोग होने की बात करता है।

 
मुस्लिम समुदाय पर कह दी यह बात
उन्होंने कहा कि मुसलमान गंगा में खड़ा होकर गाय की पूंछ पकड़कर भी सनातन विरोधी नहीं होने की बात करेगा, तब भी उसकी बात यकीन करने लायक नहीं है, क्योंकि जब आप धारा 370 हटाएंगे, तीन तलाक हटाएंगे, बुर्का प्रथा हटाने और सामान्य नागरिक संहिता की बात करेंगे, तो वह हमारा विरोधी रहेगा ही। उसके विरोध का सनातन पर कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि सनातन आगे ही बढ़ता रहेगा।
 
पत्रकारिता, राजनीति और संत तीनों समाज के लिए कल्याणकारी
पहले पत्रकारिता, फिर संत बनने और बिहार के शिवहर से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर महामंडलेश्वर ने कहा कि तीनों ही कार्य समाज के लिए कल्याणकारी हैं। पत्रकार जब किसी समस्या की खबर लिखता है, तो उससे किसी की समस्या दूर होती है, किसी का कल्याण होता है। राजनीति भी इसी तरह होती है। राजनेता भी अपने कार्य जन कल्याण के लिए ही करते हैं और संत-महात्मा भी समाज को सही मार्ग दिखाकर जन कल्याण में ही लगे रहते हैं। इस कारण इन तीनों में भी समन्वय बना रहना चाहिए, क्योंकि तीनों ही जन कल्याण के माध्यम हैं और उन्होंने ये तीनों ही राह अपनाई हैं।
 
‘औरंगाबाद का नाम बदलकर हो अरुण नगर’
उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की औरंगाबाद का नाम अरुण नगर रखने की पुरानी मांग को फिर से उठाते हुए कहा कि अरुण शब्द सूर्य का पर्यायवाची है। यहां सूर्य का प्राचीन मंदिर है। यहां सूर्य की उपासना होती है, छठ पूजा होती है। इसलिए इस जगह का 'अरुण नगर' उपयुक्त नाम है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनका निवेदन होगा कि उन्हें औरंगाबाद का नाम बदलकर 'अरुण नगर' रखना चाहिए।

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