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बिहार: एसआईआर विवाद पर जीतनराम मांझी का पलटवार, बोले- चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था, अंतिम फैसला ही मान्य

Sun, 27 Sep 2026 06:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 27 Sep 2026 06:06 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने एसआईआर को संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए चुनाव आयोग के फैसलों पर उठ रहे सवालों को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि आयोग की प्रक्रिया में संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

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jitan ram manjhi reaction on chirag paswan congress owaisi statement election commission sir row
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी।

विस्तार

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने विशेष गहन पुनरीक्षण  और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के साथ-साथ चिराग पासवान की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके फैसलों पर अनावश्यक सवाल उठाना उचित नहीं है। SIR को उन्होंने पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाता है।

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केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने चुनाव आयोग, एसआईआर और इसे लेकर उठ रहे राजनीतिक विवाद पर विपक्ष के साथ-साथ चिराग पासवान के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और वह अपनी संवैधानिक मर्यादा के अनुरूप कार्य कर रहा है। ऐसे में उसके निर्णयों पर बेवजह सवाल उठाना उचित नहीं है।

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चिराग के बयान पर बोले- अंतिम निर्णय ही मान्य होता है
चिराग पासवान के चुनाव आयोग संबंधी बयान पर मांझी ने कहा कि उन्होंने क्या कहा है, इस पर वह टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब तक ऐसी कोई परंपरा नहीं रही है कि चुनाव आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य अपने अलग-अलग निर्णय सार्वजनिक करें।

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उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान है तो उसका पालन होना चाहिए, लेकिन जहां तक SIR के फैसले का सवाल है, अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मंत्रिमंडल की बैठकों में अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन अंत में प्रधानमंत्री का निर्णय ही सरकार का निर्णय माना जाता है। उसी तरह चुनाव आयोग के भीतर भी विचार-विमर्श हो सकता है, लेकिन अंतिम फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त की अगुवाई में सामूहिक रूप से होता है।

चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक मर्यादा में काम कर रहा
मांझी ने कहा कि चुनाव आयोग अपने संवैधानिक दायित्वों और मर्यादा के अनुरूप काम कर रहा है। यदि कोई व्यक्ति उस पर सवाल उठाता है तो वह उसका व्यक्तिगत विचार हो सकता है। इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है।

कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस नेताओं द्वारा चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री बना देने जैसी टिप्पणी पर मांझी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर कोई चाहे तो संयुक्त राष्ट्र का महासचिव बनाने की भी बात कह सकता है, लेकिन इससे कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऊंचा कर रहे हैं, जबकि विपक्ष गैर-जरूरी मुद्दों को लेकर राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

48 घंटे का अल्टीमेटम राजनीति का हिस्सा
एक राजनीतिक दल द्वारा चुनाव आयोग को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने पर मांझी ने कहा कि गलत आरोप लगाकर अल्टीमेटम देने से कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य किसी योग्य मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों के नाम हटाना है जो भारतीय संविधान के अनुसार मतदाता बनने के पात्र नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे कई लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो गए थे, जिन्हें पात्रता नहीं थी। अब उनकी पहचान कर सूची को शुद्ध किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी और संवैधानिक नियमों के तहत चल रही है।

हर व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर
मांझी ने कहा कि चुनाव आयोग किसी का नाम सीधे नहीं काट रहा है। पूरी प्रक्रिया के दौरान संबंधित लोगों को नोटिस दिया जाता है, अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलता है और निर्धारित समय सीमा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है। इसके बावजूद विरोध करना केवल राजनीतिक उद्देश्य से सवाल उठाना है।



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ओवैसी के सवाल पर दिया जवाब
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा एसआईआर के फैसले में बहुमत की जानकारी मांगने संबंधी सवाल पर मांझी ने कहा कि चुनाव आयोग पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चला रहा है। तय समय पर संशोधित मतदाता सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी, जिसमें स्पष्ट हो जाएगा कि किसका नाम जोड़ा गया और किसका हटाया गया। ऐसे में अलग से बहुमत या निर्णय प्रक्रिया की जानकारी मांगने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहा है और अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद सभी तथ्य स्वतः सामने आ जाएंगे।

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