बिहार: पेपरलेस रजिस्ट्री के विरोध में डीड राइटरों का आंदोलन तेज, कांग्रेस का मिला समर्थन; दी ये चेतावनी
बिहार के गया में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में डीड राइटरों का कलमबंद आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया। डीड राइटरों ने सरकार से व्यवस्था वापस लेने की मांग करते हुए न्यायालय जाने की चेतावनी दी है। कांग्रेस ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।
विस्तार
बिहार में इन दिनों विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन का दौर जारी है। राजधानी पटना में जहां छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं गया में डीड राइटरों ने पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में कलमबंद आंदोलन शुरू कर दिया है। 17 अगस्त से लागू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में चल रहा आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकलने पर डीड राइटरों के संघ ने रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में बैठक कर आगे की रणनीति तय की। आंदोलन को गया जिला कांग्रेस कमेटी का भी समर्थन मिला है।
रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में हुई बैठक
बैठक में डीड राइटरों ने कहा कि सरकार की ओर से लागू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था उनके हितों के खिलाफ है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से हजारों डीड राइटरों का रोजगार प्रभावित होगा। बैठक में आंदोलन को और व्यापक बनाने पर चर्चा की गई। साथ ही निर्णय लिया गया कि यदि सरकार इस व्यवस्था को वापस नहीं लेती है तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
कांग्रेस ने दिया आंदोलन को समर्थन
गयाजी जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष रजनीश कुमार ने कहा कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी और प्रशिक्षण के पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू कर दी है। यहां के अधिकांश डीड राइटर डिजिटल हस्ताक्षर और नई तकनीकी प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं। ऐसे में अचानक इस व्यवस्था को लागू करना उचित नहीं है।
यदि बिहार सरकार पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया वापस नहीं लेती है तो कांग्रेस पार्टी सड़क पर उतरकर राज्यव्यापी आंदोलन करेगी। उन्होंने सरकार से डीड राइटरों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की।
डीड राइटरों की कोर्ट जाने की तैयारी
डीड राइटरों ने स्पष्ट कहा कि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो वे न्यायालय का सहारा लेंगे। उनका कहना है कि सरकार को नई व्यवस्था लागू करने से पहले डीड राइटरों को प्रशिक्षित करना चाहिए था और उनकी राय भी लेनी चाहिए थी।
जनता की सुविधा के लिए लागू हुई व्यवस्था
वहीं, रजिस्ट्री कार्यालय के रजिस्ट्रार उमेश्वर कुमार ने आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग ने यह निर्णय आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने बताया कि लोग अब इस नई व्यवस्था का उपयोग भी कर रहे हैं और अब तक पेपरलेस सिस्टम के माध्यम से कई रजिस्ट्रियां सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी हैं। लोगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
न्यायालय जाने की चेतावनी पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू की जा चुकी है और इसके तहत लगातार रजिस्ट्रियां हो रही हैं।
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राजस्व नुकसान के सवाल पर दिया जवाब
रजिस्ट्रियों की संख्या कम होने से राजस्व नुकसान के सवाल पर उमेश्वर कुमार ने कहा कि इससे सरकार को स्थायी राजस्व क्षति नहीं होती। आंदोलन के कारण कुछ समय के लिए रजिस्ट्रियां प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन प्रक्रिया सामान्य होते ही राजस्व की भरपाई हो जाएगी।