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Bihar News: बोधगया बना धार्मिक समरसता का केंद्र, राज्यपाल बोले- बिहार विविध संस्कृतियों का संगम
Fri, 08 May 2026 06:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 06:33 PM IST
सार
Bihar News: बोधगया में आयोजित “धर्म संस्कृति संगम” कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल हुए। कार्यक्रम में धार्मिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया गया। आरएसएस नेता इन्द्रेश कुमार समेत कई संत और बुद्धिजीवी मौजूद रहे। पढ़ें पूरी खबर...
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धर्म संस्कृति संगम में शामिल हुए राष्ट्रपति सैयद अता हसनैन
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय परिसर रविवार को धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता के संदेश का केंद्र बना रहा। यहां आयोजित “धर्म संस्कृति संगम” कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार, कुलपति एलपी शाही समेत हिंदू और बौद्ध धर्म से जुड़े कई संत, धर्मगुरु और बुद्धिजीवी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने शांति, भाईचारे, सांस्कृतिक एकता और धार्मिक समन्वय को लेकर अपने विचार साझा किए।
‘बिहार विविध संस्कृतियों का संगम’
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अपने संबोधन में कहा कि गया-बोधगया कॉरिडोर बिहार की समृद्ध संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बिहार ऐसा राज्य है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और यहां विविध संस्कृतियों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि बिहार के राज्यपाल के रूप में आने से पहले उनके मन में राज्य को लेकर अलग धारणा थी, लेकिन यहां आने के बाद उन्हें इस भूमि की सांस्कृतिक गहराई और सभ्यता की शक्ति का एहसास हुआ।
‘धर्म संस्कृति संगम’ को बताया महत्वपूर्ण पहल
राज्यपाल ने कहा कि कार्यक्रम का निमंत्रण मिलते ही उन्होंने अपने अन्य कार्यक्रम रद्द कर यहां आने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की जानकारी उन्हें पहले ही विस्तार से दी गई थी और तभी उन्होंने इसमें शामिल होने की सहमति दे दी थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बिहार में रहने तक ऐसे सामाजिक और धार्मिक समरसता वाले आयोजनों को उनका पूरा समर्थन मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में आपसी सद्भाव, एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
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इन्द्रेश कुमार बोले- धर्मों में संघर्ष नहीं, समन्वय जरूरी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इन्द्रेश कुमार ने कहा कि भारत सभी के लिए मातृभूमि और पितृभूमि है, इसलिए धर्मों के बीच संघर्ष नहीं बल्कि समन्वय होना चाहिए। उन्होंने गया की पावन धरती से शांति, भाईचारे और एकता का संदेश देने का संकल्प दोहराया। साथ ही कहा कि समाज में नफरत फैलाने वाली सोच को खत्म करने के लिए सभी धर्मों को एकजुट होकर काम करना होगा।
‘सांस्कृतिक एकता को मिलेगा बल’
मगध विश्वविद्यालय के कुलपति एलपी शाही ने कहा कि धर्म और संस्कृति का यह संगम सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सनातन और बौद्ध धर्म के बीच समन्वय स्थापित कर समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।
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‘बिहार विविध संस्कृतियों का संगम’
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अपने संबोधन में कहा कि गया-बोधगया कॉरिडोर बिहार की समृद्ध संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बिहार ऐसा राज्य है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और यहां विविध संस्कृतियों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि बिहार के राज्यपाल के रूप में आने से पहले उनके मन में राज्य को लेकर अलग धारणा थी, लेकिन यहां आने के बाद उन्हें इस भूमि की सांस्कृतिक गहराई और सभ्यता की शक्ति का एहसास हुआ।
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‘धर्म संस्कृति संगम’ को बताया महत्वपूर्ण पहल
राज्यपाल ने कहा कि कार्यक्रम का निमंत्रण मिलते ही उन्होंने अपने अन्य कार्यक्रम रद्द कर यहां आने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की जानकारी उन्हें पहले ही विस्तार से दी गई थी और तभी उन्होंने इसमें शामिल होने की सहमति दे दी थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बिहार में रहने तक ऐसे सामाजिक और धार्मिक समरसता वाले आयोजनों को उनका पूरा समर्थन मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में आपसी सद्भाव, एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
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इन्द्रेश कुमार बोले- धर्मों में संघर्ष नहीं, समन्वय जरूरी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इन्द्रेश कुमार ने कहा कि भारत सभी के लिए मातृभूमि और पितृभूमि है, इसलिए धर्मों के बीच संघर्ष नहीं बल्कि समन्वय होना चाहिए। उन्होंने गया की पावन धरती से शांति, भाईचारे और एकता का संदेश देने का संकल्प दोहराया। साथ ही कहा कि समाज में नफरत फैलाने वाली सोच को खत्म करने के लिए सभी धर्मों को एकजुट होकर काम करना होगा।
‘सांस्कृतिक एकता को मिलेगा बल’
मगध विश्वविद्यालय के कुलपति एलपी शाही ने कहा कि धर्म और संस्कृति का यह संगम सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सनातन और बौद्ध धर्म के बीच समन्वय स्थापित कर समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।