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बिहार: विश्वकर्मा पूजा का भागलपुर कनेक्शन! बाला लखेंद्र के ‘लोहा घर’ से जुड़ी है सदियों पुरानी लोककथा

Thu, 17 Sep 2026 06:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 17 Sep 2026 06:34 PM IST
सार

भगवान विश्वकर्मा पूजा बिहार में सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मेहनत, हुनर और निर्माण से जुड़े लोगों का बड़ा पर्व है। कारीगरों से लेकर फैक्ट्री मजदूर, दुकानदार, ड्राइवर और तकनीकी काम करने वाले लोग इस दिन अपने औजार, मशीन और वाहनों की पूजा करते हैं। वहीं, इस पर्व की परंपरा को लेकर भागलपुर के मिरजानहाट से जुड़ी एक खास लोकमान्यता भी सामने आती है।

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विश्वकर्मा पूजा करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में विश्वकर्मा पूजा का उत्साह हर साल देखने को मिलता है। अलग-अलग जिलों में पंडाल सजते हैं, मूर्तियां स्थापित की जाती हैं और कई जगहों पर मेले भी लगाए जाते हैं। इस पर्व को खास तौर पर उन लोगों का त्योहार माना जाता है, जिनका जीवन औजार, मशीन और निर्माण कार्यों से जुड़ा है। भागलपुर के मिरजानहाट को लेकर स्थानीय लोगों में मान्यता है कि यहां से विश्वकर्मा पूजा को बड़े आयोजन के रूप में मनाने की परंपरा आगे बढ़ी। हालांकि, यह मान्यता लोक परंपराओं पर आधारित है।

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बाला लखेंद्र के लोहा घर की लोककथा से जुड़ता है रिश्ता
भागलपुर क्षेत्र का भगवान विश्वकर्मा से संबंध बिहुला-विषहरी लोकगाथा से भी जोड़ा जाता है। लोककथा के अनुसार, अंग क्षेत्र के व्यापारी चांदो सौदागर के पुत्र बाला लखेंद्र की शादी बिहुला से होने वाली थी। मान्यता थी कि विवाह के समय बाला लखेंद्र के जीवन पर संकट आ सकता है। कथा के मुताबिक, बेटे की सुरक्षा के लिए चांदो सौदागर ने भगवान विश्वकर्मा से एक मजबूत घर बनवाने का आग्रह किया। कहा जाता है कि विश्वकर्मा ने ऐसा विशेष लोहा-बांस का घर तैयार किया, जिसमें कोई खतरा प्रवेश न कर सके।

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लोकगाथा में आज भी जिंदा है विश्वकर्मा का प्रसंग
लोकमान्यता के मुताबिक, देवी विषहरी के प्रभाव से उस घर में एक छोटी-सी जगह रह गई, जहां से नाग प्रवेश कर गया और बाला लखेंद्र को डस लिया। इसके बाद बिहुला अपने पति को वापस जीवन दिलाने के संकल्प के साथ संघर्ष करती है। यही कथा आगे चलकर बिहुला-विषहरी लोकगाथा के रूप में प्रसिद्ध हुई।

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मेहनतकश लोगों के लिए आस्था और विश्वास का पर्व
आज विश्वकर्मा पूजा बिहार के हर हिस्से में उत्साह के साथ मनाई जाती है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगों तक में मशीनों और उपकरणों की पूजा की जाती है। लोग भगवान विश्वकर्मा से अपने काम में तरक्की, सफलता और सुरक्षा की कामना करते हैं। भागलपुर से जुड़ी विश्वकर्मा पूजा की यह कहानी धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और कारीगर संस्कृति के मेल को दिखाती है। हालांकि, बाला लखेंद्र और विश्वकर्मा से जुड़ा प्रसंग ऐतिहासिक प्रमाण नहीं, बल्कि क्षेत्र में प्रचलित लोककथा और मान्यता का हिस्सा है।

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