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Bihar News: ठेले पर स्वास्थ्य विभाग! नवादा में शव ले जाने के लिए वाहन नहीं, हाथ गाड़ियों के सहारे लोग

Thu, 28 Nov 2024 02:06 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नवादा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नवादा Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 28 Nov 2024 02:06 PM IST
सार

बिहार के नवादा जिले में एक भी शव वाहन उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण जरूरतमंद लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को निजी एंबुलेंस या फिर ठेले का सहारा लेना पड़ता है।

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Bihar News Health department on handcart No vehicle to carry dead bodies in Nawada people rely on hand carts
ठेले पर शव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नवादा में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। बिहार सरकार स्वास्थ्य विभाग को व्यवस्था दुरूस्त होने के कई दावे करती है। लेकिन राज्य के किसी किसी न जिले से आए दिन कोई न कोई ऐसा मामला सामने आ ही जाता है, जिससे यह सवाल खड़ा हो जाता है कि या वाकई बिहार का स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर है। कई बार एंबुलेंस के आभाव में मरीज की जान चली जाती है तो कई बार मरे हुए शख्स को ले जाने के लिए परिजनों को एंबुलेंस नहीं मिलता है। ऐसा ही एक मामला एक बार फिर नवादा से सामने आया है। जहां जिले में मृतकों के शव ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं है। 

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बता दें कि नवादा में एक भी शव वाहन उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण जरूरतमंद लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को निजी एंबुलेंस या फिर ठेले का सहारा लेना पड़ता है। कई बार निजी एंबुलेंस भी शव ले जाने के तैयार नहीं होते हैं। ज्यादा जोर देने पर एंबुलेंस धोने समेत अन्य नाम पर अतिरिक्त राशि की मांग की जाती है। जो गरीब मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। हालांकि, पूर्व में राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से एंबुलेंस सेवा देने वाली एजेंसी के माध्यम से एक शव वाहन उपलब्ध कराया गया था। लेकिन वह पूरी तरह से खराब हो चुका है और उपयोग करने की स्थिति में नहीं है। फलस्वरूप जरुरतमंद लोगों को शव ढोने के लिए ठेले का सहारा लेना पड़ता है।
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लोग ठेले से ले जाना पड़ता है शव
ऐसे में इतने समय तक शव पड़े रहने के कारण उससे बदबू आने लगता है। ठेले से शव ले जाने के क्रम में दुर्गंध से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। संक्रमण का भी खतरा रहता है। हाल में ही रेलवे लाइन के किनारे से एक अज्ञात युवक का शव बरामद किया गया था। दो दिन पहले शव का अंतिम संस्कार कराया गया। बताया कि शव वाहन नहीं होने की स्थिति में ठेले से ही शव को अंतिम संस्कार के लिए सदर अस्पताल से श्मशान घाट ले जाया गया। शव को ठेले वाले भी तैयार नहीं हो रहे थे, जिसके कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन यह सेवा दो महीने से अधिक समय से ठप पड़ा है।
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बताया जाता है कि कुछ महीने पहले शव वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसके बाद संबंधित एजेंसी पीडीपीएल ने उसकी मरम्मत नहीं कराई, जिसके बाद शव वाहन पूरी तरह से बेकार हो गया और उपयोग लायक नहीं रह गया। ऐसे में नवादा में शवों को ले जाने के लिए के जरूरतमंदों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


एंबुलेंस 102 में भी समुचित व्यवस्था नहीं
गौरतलब है कि जिले में मरीजों को सेवा प्रदान करने के लिए 102 एंबुलेस सेवा उपलब्ध है। पर स्थिति यह है कि उसमें भी समुचित व्यवस्था नहीं है। अधिकांश एंबुलेंस आउटडेटेड ही चुके हैं और ऑन रोड चलने लायक नहीं हैं, जिसे चला पाना किसी खतरे से कम नहीं है। इस बाबत राज्य स्वास्थ्य समिति की द्वारा एजेंसी से पत्राचार करने की बात कही जा रही है। सिविल सर्जन डॉ. नीता अग्रवाल कहती हैं कि जिला स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक को निर्देश दिया गया है कि एंबुलेंस 102 की पूरी पड़ताल कर रिपोर्ट दें राज्य स्वास्थ्य समिति को पूरी जानकारी दी जाय। साथ ही नया सत्र में वाहन उपलब्ध कराने के लिए नई एजेंसी को कहा जाएगा। सिविल सर्जन ने कहा कि जिला स्वास्थ्य महकमा मरीजों को स्वास्थ्य व्यवस्था लिए हर संभव कोशिश कर रही है।

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