BJP को दिया वोट, दबंगों ने पहुंचा दिया अस्पताल
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बिहार विधानसभा चुनावों में सत्ता पर काबिज होने का ऐसा नशा सवार है कि नेता अपनी सीट बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। एक ऐसा ही सामने आया है जहां एक विधवा महिला और उसके बेटे को दबंगो ने घर में घुसकर पीटा। उनका कुसूर बस इतना था उन्होंने उन दबंगों की बात नहीं मानते हुए दूसरी पार्टी को वोट दिया।
दरअसल, यह पूरा मामला रजौली विधानसभा क्षेत्र के अमवां पश्चिमी पंचयात के परमचक गांव की है। गांव में रहने वाली एक विधवा महिला कौशल्या और उसके बेटे गुड्डू ने चुनाव के दौरान बीजेपी को वोट दिया। इस बात का पता चलते ही गांव के ही प्रवेश यादव, नवीन यादव, गनेसी यादव एवं 5 अन्य लोगों ने घर में घुसकर उनसे मारपीट की।
दबंगों ने उनके घर में घुसकर उनको इतना मारा की उनको अस्पताल में भर्ती कराना पड़ गया। हालत और बिगड़ने पर प्राथमिक चिकित्सालय से बेहतर ईलाज के लिए नवादा रेफर कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला कुछ इस तरह से है कि गांव के कुछ दबंगों ने पूरे गांव वालों को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रत्याशी को वोट देने के लिए कहा था और ऐसा नहीं करने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी थी।
वोटिंग के दौरान दबंगों के डर लगभग सभी गांव वालों ने वैसा ही किया लेकिन कौश्लया देवी ने ऐसा नहीं किया और उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी को वोट डाल दिया। इतना ही नहीं उन्होंने अपने बेटे से भी बीजेपी को ही वोट देने के लिए कहा। यह बात जब गांव वालों को पता चली तो तुरंत हल्ला मच गया। गांव के दबंगों ने अपने कहे मुताबिक वोट नहीं देने की वजह से उनकी पीटाई कर दी।
रलौजी थाने में यह मामला दर्ज कराया गया है और पुलिस इस मामले की तफ्तीश कर रही है। लेकिन इस हमले के बाद गांव के लोगों में दहशत का माहौल है।
मांझी ने की जांच की मांग
वहीं इस घटना के बाद हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने विपक्षी पार्टी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब महादलित परिवार के लोग अपने विवेक से मतदान करते हैं तो उनके साथ मारपीट की जाती है। ये क्या दर्शाता है? आज जो बिहार में सुशासन का दावा किया जाता है, और राज्य सरकार दलितों के सामाजिक विकास की जो बातें करती है, ये बस झांसा है।
मांझी ने इस घटना को महादलितों का अपमान बताते हुए कहा कि ये घटना सिर्फ दलितों पर नहीं बल्कि लोकतंत्र पर भी हमला है। इस घटना से हम काफी दुखी और चिन्तित हैं। इस घटना की जांच हो, और अपराधियों को सजा दिलाने की दिशा मे उचित कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया था। लेकिन जैसा नीतीश ने सोचा था वैसा मांझी ने नहीं किया। इसका परिणाम यह हुआ कि मांझी को जबरदस्ती पद से हटा दिया गया। अब वह विधानसभा चुनावों में बीजेपी गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और महादलितों के सबसे बड़े नेता के रुप में सामने आए हैं।