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Bihar Assembly Election 2020 : लोजपा को 27 सीटें, दो एमएलसी का ऑफर था, नहीं माने: प्रेम कुमार
Fri, 23 Oct 2020 10:06 AM IST
अनिल पांडेय
मनीष मिश्र
मनीष मिश्र
Published by: अनिल पांडेय
Updated Fri, 23 Oct 2020 10:06 AM IST
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बिहार विधानसभा चुनाव 2020: प्रेम कुमार, मंत्री, बिहार सरकार
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चुनावों की गहमागहमी के बीच लोक जनशक्ति पार्टी को लेकर लगातार चर्चा जारी है। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान एक तरफ नीतीश कुमार पर हमलावर हैं, तो वहीं खुद को प्रधानमंत्री मोदी का हनुमान बता रहे हैं। राज्य में लोजपा एनडीए से इसलिए अलग हुई क्योंकि लोजपा को विस की 27 सीटें और दो एमएलसी सीटें ऑफर की गई थीं, जिस पर वह राजी नहीं हुई।
प्रदेश के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने यह खुलासा किया। इसके बाद लोजपा ने अलग राह चुन ली। गया की राजनीति पर पिछले 30 साल से काबिज प्रेम कुमार ने ‘अमर उजाला’ खास बातचीत में बिहार की राजनीति पर विस्तार से बात की।
पर्यटन को बढ़ावा के प्रयास
गया का अपेक्षित विकास न हो पाने के आरोपों पर उनका दावा है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार ने काफी प्रयास किए हैं। कांग्रेस और लालू के राज में पर्यटकों ने आना बंद कर दिया था। आज संख्या बढ़ी है। सीताकुंड, अक्षय वट, वैतरणी का विकास हुआ है। यहां चौबीस घंटे बिजली मिल रही है।
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पहले पर्यटक आने से कतराते थे, जंगलराज का भय था। पटना से गया की 100 किमी की दूरी चार घंटे में तय होने के सवाल पर कहते हैं, काम लगा हुआ है, अतिक्रमण हटाया गया है, 2021 तक फोनलेन शुरू हो जाएगा। गया में गंगा जल लाने के प्रोजेक्ट पर भी काम हो रहा है।
कृषि उद्योग प्रोत्साहन नीति
युवाओं को रोजगार और बिहार में उद्योग स्थापित न हो पाने के बारे में डॉ. प्रेम कहते हैं, सरकार ने बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया है। सभी क्षेत्रों में बहाली हुई है। कृषि उद्योग प्रोत्साहन नीति से उद्योगों का जाल बिछाने की कोशिश हुई है।
आगे बिहार के लोग नौकरी मांगेंगे नही, दूसरों को देंगे। राज्य के 40 लाख लोग बाहर रह रहे हैं, यह देन कांग्रेस की है। हमारी सरकार जिलों में ही लोगों को रोजगार और प्रशिक्षण देने का काम कर रही है।
दूध संग्रह से रोजगार के अवसर
पहले से चालू चावल और चीनी मिलें धीरे-धीरे बंद होती चली गईं, जिसका असर किसानों की आमदनी पर सीधे पड़ा। बिहार में फैक्ट्रियां बंद होने पर उन्होंने कहा, हमने बड़े पैमाने पर चावल मिल और दूध के प्लांट लगाए गए हैं। हम हर रोज 20 लाख लीटर दूध संग्रह कर रहे हैं। यहां का दूध पश्चिम बंगाल, दिल्ली और यूपी जा रहा है। इस क्षेत्र में 12.5 लाख लोगों को रोजगार दिया है। आगे 50 लाख लीटर दूध संग्रह करके बाहर भेजने की योजना है जिससे काफी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
आत्मनिर्भर होगा
कृषि क्षेत्र की संभावनाएं और सरकार के प्रयासों को समझाते हुए कृषि मंत्री डॉ. प्रेमकुमार ने कहा, कृषि क्षेत्र में प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए कैबिनेट से बिल पास हो गया है। यहां होने वाले पान, केला, आलू, चावल आदि के प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे, इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
केंद्र ने राज्यों के लिए जो 20 लाख करोड़ का पैकेज जारी किया है, उसमें से बड़ा हिस्सा बिहार का है। आने वाले समय में बिहार दूसरे राज्यों से आगे होगा। आत्मनिर्भर होगा।
बदहाल शहर के लिए निगम जिम्मेदार
गया स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं हो पाया। शहर में जाम बड़ी समस्या है। इस पर कृषि मंत्री कहते हैं, नगर निगम इसके लिए जिम्मेदार है। गया के डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ही महागठबंधन के प्रत्याशी भी हैं।
नगर निगम चुनावों पर कृषि मंत्री ने कहा, आने वाले समय में मेयर का सिंबल पर सीधे चुनाव होगा। राज्य सरकार और भारत सरकार ने काम किया, लेकिन नगर निगम ने जिम्मेदारी नहीं निभाई।
गया के लोगों की आमदनी यहां पितृपक्ष मेले पर निर्भर करती है, जो कोरोना की वजह से इस बार नहीं लगा। इससे पंडा समाज की सरकार से नाराजगी है, पंडा समाज के लोगों का कहना है कि अगर चुनाव हो सकते हैं तो मेला क्यूं नहीं, इस पर प्रेम ने कहा, चुनाव का निर्णय मेरे स्तर पर नहीं था, पंडा समाज के लोगों से हमारी बात हो चुकी है कहीं कोई नाराजगी नहीं है। कोरोना काल में तीन महीने गया में रहा। लॉकडाउन में यात्रियों को वापस भेजने का काम किया। इस दौरान पटना छोड़कर गया को राजधानी बना लिया।
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प्रदेश के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने यह खुलासा किया। इसके बाद लोजपा ने अलग राह चुन ली। गया की राजनीति पर पिछले 30 साल से काबिज प्रेम कुमार ने ‘अमर उजाला’ खास बातचीत में बिहार की राजनीति पर विस्तार से बात की।
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पर्यटन को बढ़ावा के प्रयास
गया का अपेक्षित विकास न हो पाने के आरोपों पर उनका दावा है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार ने काफी प्रयास किए हैं। कांग्रेस और लालू के राज में पर्यटकों ने आना बंद कर दिया था। आज संख्या बढ़ी है। सीताकुंड, अक्षय वट, वैतरणी का विकास हुआ है। यहां चौबीस घंटे बिजली मिल रही है।
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पहले पर्यटक आने से कतराते थे, जंगलराज का भय था। पटना से गया की 100 किमी की दूरी चार घंटे में तय होने के सवाल पर कहते हैं, काम लगा हुआ है, अतिक्रमण हटाया गया है, 2021 तक फोनलेन शुरू हो जाएगा। गया में गंगा जल लाने के प्रोजेक्ट पर भी काम हो रहा है।
कृषि उद्योग प्रोत्साहन नीति
युवाओं को रोजगार और बिहार में उद्योग स्थापित न हो पाने के बारे में डॉ. प्रेम कहते हैं, सरकार ने बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया है। सभी क्षेत्रों में बहाली हुई है। कृषि उद्योग प्रोत्साहन नीति से उद्योगों का जाल बिछाने की कोशिश हुई है।
आगे बिहार के लोग नौकरी मांगेंगे नही, दूसरों को देंगे। राज्य के 40 लाख लोग बाहर रह रहे हैं, यह देन कांग्रेस की है। हमारी सरकार जिलों में ही लोगों को रोजगार और प्रशिक्षण देने का काम कर रही है।
दूध संग्रह से रोजगार के अवसर
पहले से चालू चावल और चीनी मिलें धीरे-धीरे बंद होती चली गईं, जिसका असर किसानों की आमदनी पर सीधे पड़ा। बिहार में फैक्ट्रियां बंद होने पर उन्होंने कहा, हमने बड़े पैमाने पर चावल मिल और दूध के प्लांट लगाए गए हैं। हम हर रोज 20 लाख लीटर दूध संग्रह कर रहे हैं। यहां का दूध पश्चिम बंगाल, दिल्ली और यूपी जा रहा है। इस क्षेत्र में 12.5 लाख लोगों को रोजगार दिया है। आगे 50 लाख लीटर दूध संग्रह करके बाहर भेजने की योजना है जिससे काफी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
आत्मनिर्भर होगा
कृषि क्षेत्र की संभावनाएं और सरकार के प्रयासों को समझाते हुए कृषि मंत्री डॉ. प्रेमकुमार ने कहा, कृषि क्षेत्र में प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए कैबिनेट से बिल पास हो गया है। यहां होने वाले पान, केला, आलू, चावल आदि के प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे, इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
केंद्र ने राज्यों के लिए जो 20 लाख करोड़ का पैकेज जारी किया है, उसमें से बड़ा हिस्सा बिहार का है। आने वाले समय में बिहार दूसरे राज्यों से आगे होगा। आत्मनिर्भर होगा।
बदहाल शहर के लिए निगम जिम्मेदार
गया स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं हो पाया। शहर में जाम बड़ी समस्या है। इस पर कृषि मंत्री कहते हैं, नगर निगम इसके लिए जिम्मेदार है। गया के डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ही महागठबंधन के प्रत्याशी भी हैं।
नगर निगम चुनावों पर कृषि मंत्री ने कहा, आने वाले समय में मेयर का सिंबल पर सीधे चुनाव होगा। राज्य सरकार और भारत सरकार ने काम किया, लेकिन नगर निगम ने जिम्मेदारी नहीं निभाई।
गया के लोगों की आमदनी यहां पितृपक्ष मेले पर निर्भर करती है, जो कोरोना की वजह से इस बार नहीं लगा। इससे पंडा समाज की सरकार से नाराजगी है, पंडा समाज के लोगों का कहना है कि अगर चुनाव हो सकते हैं तो मेला क्यूं नहीं, इस पर प्रेम ने कहा, चुनाव का निर्णय मेरे स्तर पर नहीं था, पंडा समाज के लोगों से हमारी बात हो चुकी है कहीं कोई नाराजगी नहीं है। कोरोना काल में तीन महीने गया में रहा। लॉकडाउन में यात्रियों को वापस भेजने का काम किया। इस दौरान पटना छोड़कर गया को राजधानी बना लिया।