Bihar Cabinet Expansion : 13 साल के विधायक और 1.3 करोड़ के मालिक ने ली शपथ, संतोष सुमन वाला विभाग मिला
Bihar :जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन के नीतीश कुमार कैबिनेट से इस्तीफे के बाद शुक्रवार को जनता दल यूनाईटेड कोटे से 13 साल के विधायक और सहरसा के सोनवर्षा राज के प्रतिनिधि को मंत्रीपद की शपथ दिलाई गई। उन्हें संतोष सुमन वाला ही विभाग मिला।
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पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन के नीतीश कुमार कैबिनेट से इस्तीफे के बाद शुक्रवार को जनता दल यूनाईटेड कोटे से 13 साल के विधायक और सहरसा के सोनवर्षा राज के प्रतिनिधि रत्नेश सदा को मंत्रीपद की शपथ दिलाई गई। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई। समारोह में सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह मौजूद थे। रत्नेश सदा को अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग ही दिया गया है, जो संतोष सुमन के पास था।
8 मिनट चले शपथ ग्रहण समारोह में राजद और कांग्रेस के भी संभावित मंत्री राजभवन में दिख रहे थे, लेकिन पूर्व की घोषणा के अनुसार जदयू के विधायक रत्नेश सदा को सिर्फ पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। राजद-कांग्रेस के नामों की घोषणा नहीं होने के कारण माना जा रहा है कि अब 23 जून को विपक्षी एकता के लिए पटना में होने वाली बैठक के बाद एक बार फिर बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार हो।
जानिए, कौन हैं रत्नेश सदा
रत्नेश सदा 13 साल से विधायक हैं और जदयू के महादलित प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष के नाते अनुसूचित जाति-जनजाति का मामला ही देख रहे हैं। इनकी कुल संपत्ति 1.3 करोड़ है। 13 जून को इनका नाम मंत्री के रूप में तय हुआ। एनडीए सरकार में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, तब सहरसा के भाजपा विधायक डॉ. आलोक रंजन मंत्री थे।
रत्नेश सदा का राजनीतिक सफर 1987 से शुरू हुआ
नीतीश कुमार जब महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री बने तो सहरसा से मंत्री किसी को नहीं रखा गया। महागठबंधन सरकार बनने के करीब 10 महीने के बाद मंत्री बनाए जाने को लेकर खुशी का माहौल हैं। जदयू विधायक रत्नेश सदा का राजनीतिक सफर 1987 से शुरू हुआ। तब वह सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। बाद में वह जदयू के कई संगठनों में सक्रिय रहे। विधायक रत्नेश सदा जदयू महादलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं और इससे पहले वह पार्टी में उपाध्यक्ष समेत अन्य पदों पर भी रह चुके हैं। पहली बार वह सोनवर्षा राज 2010 में जदयू के विधायक बने। उसके बाद 2015 और 2020 में भी वह चुने गए।