नीतीश की अपील दहेज वाली शादी का करें बहिष्कार, तेज प्रताप ने कहा- बेटी को गिफ्ट देना गलत नहीं
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी के बाद समाज में व्याप्त दो और सामाजिक बुराईयों, बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ महाअभियान की शुरुआत की है। गांधी जयंती के मौके पर नवनिर्मित अशोक सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने लोगों से दहेज वाली शादी में शामिल नहीं होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि शराबबंदी की तरह ही इस मुहिम को भी समाज का समर्थन मिलेगा और एक साल में बाल विवाह और दहेज प्रथा में गिरावट देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री ने शराब की तरह दहेज के खिलाफ भी 21 जनवरी को मानव श्रृंखला बनाने के लिए बिहार की जनता से अपील की।
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उन्होंने कहा कि बिहार के लोग राजनीतिक रूप से काफी जागरूक हैं और अब सामाजिक रूप से भी जागरूक होने की जरूरत है। दहेज प्रताड़ना में उत्तर प्रदेश के बाद बिहार दूसरे स्थान पर है। बिहार में बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान का पूरे देश पर असर होगा। उन्होंने तमाम राजनीतिक पार्टियों से भी बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ मुहिम चलाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम लोग उनके बताएं रास्ते पर चलें। बापू के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। ये हमारा संकल्प है। शराबबंदी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बाद बिहार का माहौल बदल गया है। वैसे आज भी कुछ लोग शराब के धंधे में लगे हैं, लेकिन उन पर सख्त नजर रखी जा रही है।
'बेटी को गिफ्ट देने की परंपरा सदियों पुरानी है, इसे बंद नहीं कर सकते'
इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश से आग्रह किया कि बाल विवाह और दहेज प्रथा के लिए गांव के मुखिया को जिम्मेदार ठहराया जाए।
इधर, विपक्ष ने नीतीश की इस मुहिम की आलोचना शुरू कर दी है। कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि दहेज लेकर शादी करने दूल्हा जाएगा और सरकार बैंडबाजा और पुरोहित तक को जेल में डालने का कानून बना रही है यह तुगलकी फरमान जैसा है।
वहीं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि बेटी को गिफ्ट देने की परंपरा सदियों पुरानी है, आप इसे बंद नहीं कर सकते हैं। इसलिए नीतीश कुमार का यह अभियान शराबबंदी की तरह ही फेल होगा। वैसे उन्होंने कहा कि राजद दहेज प्रथा को गलत मानता है, लेकिन बेटी को गिफ्ट देने की परंपरा को नहीं।