नहाय-खाय के साथ छठ पर्व हुआ शुरू

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 17 Nov 2012 10:46 AM IST
chhath puja begin from today
चार दिवसीय छठ पर्व शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। मान्यता है कि छठ पर्व पर व्रत करने वालों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। संतान और परिवार की कुशलता के लिए सामान्य तौर पर महिलाएं यह व्रत रखती हैं, मगर इस व्रत को पुरुष भी रखते हैं।

पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है। नहाय खाय के दिन सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। इसके बाद छठव्रती स्नान कर बिना लहसुन प्याज के शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करेंगी। भोजन में कद्दू, चने की दाल और चावल ग्रहण किया जाता है।

रविवार को खरना
दूसरे दिन व्रतधारी दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करेंगी। इसे खरना कहा जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और रोटी बनाई जाती है, रोटी में घी लगाया जाता है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं होगा।  

सोमवार को संध्या अर्घ्य
तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ प्रसाद बनाया जाएगा। प्रसाद के रूप में ठेकुआ (कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं) के अलावा चावल के लड्डू (लडु़आ) बनाये जाएंगे। इसके अलावा चढ़ावा के रूप में लाया गया सांचा और फल भी शामिल किये जाते हैं ।

ऐसे करें पूजा
पंडित जीवेश कुमार शास्त्री ने बताया कि सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर नमन किया जाता है। इसके लिए शाम को पूरी तैयारी और व्यवस्था कर बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाएं और व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट जाएंगे। सभी छठव्रती एक नियत तालाब या नदी किनारे इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से अर्घ्य संपन्न करेंगे। इस दौरान सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाएगा। छठ माता के प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाएगी।

मंगलवार को दिया जाएगा ऊषा अर्घ्य
चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। व्रती उसी जगह दुबारा इकट्ठा होंगे, जहां उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था। दोबारा शाम की तरह ही पूजा होगी। अंत में व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं।

इस त्योहार में भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता है। पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर के सहारे ही रहना होता है।
-प्रिया, शिप्रा सनसिटी

छठ पर्व को तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए।
-भारती सिंह, शिप्रा सनसिटी, फेज-1

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