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पहले चरण का प्रचार खत्म, कइयों की साख दांव पर

Sun, 11 Oct 2015 05:27 PM IST
Updated Sun, 11 Oct 2015 05:27 PM IST
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Canvassing stops for the first phase of bihar election

विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 12 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए प्रचार शनिवार के शाम पांच बजे थम गया। इस चरण में दस जिलों के 49 विधानसभा क्षेत्र में मतदान होगा।

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एक करोड़ 35 लाख से अधिक मतदाता 583 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। नक्सल ग्रस्त जिलों में जहां तीन बजे तक मतदान तय किया गया है, उन जिलों में शनिवार को तीन बजे ही चुनाव प्रचार बंद हो गया।
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बिहार की जनता का मूड क्या होगा इसको लेकर नेताओं और उनके लिए रणनीति बना रहे रणनीतिकारों के लिए भी पहला चरण बहुत महत्वपूर्ण है। जातीय समीकरण साधने और हिस्सेदारी लेने के लिए जाति की बात जो हो रही हो, लेकिन पहले चरण में विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। वहीं, कांग्रेस के पास कहलगांव का गढ़ बचाने की चुनौती है।
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जिन अपराधग्रस्त क्षेत्रों में मतदान चार बजे तक होगा, वहां शनिवार को चार बजे ही चुनाव प्रचार थम गया। इधर, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नवादा व जमुई जिले में होनेवाले मतदान के लिए पुलिस प्रशासन ने भी कमर कस रखी है।

पुलिस चुनावों में किसी भी तरह की घटना को रोकने के लिए मुस्तैदी के साथ डटी हुई है। पहले चरण में जातीय समीकरण के मोर्चे पर राजग मजबूत है, लेकिन नेतृत्व व चेहरे को लेकर नरेंद्र मोदी व नीतीश कुमार आमने-सामने हैं।

चिराग के गढ़ पर रहेगी नजर

Canvassing stops for the first phase of bihar election

पहले चरण में जहां राजद से ज्यादा कांग्रेस की साख दांव पर है, वहीं भाजपा से ज्यादा इस चरण में उसके सहयोगियों की साख दांव पर है।

उम्मीदवारों पर नजर डालें तो पहले चरण में भाजपा का कोई बड़ा नेता मैदान में नहीं हैं, लेकिन लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस व हम के प्रदेश अध्यक्ष शकुनी चौधरी, तो जदयू विधायक दल के नेता विजय चौधरी व कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह की चुनावी परीक्षा इसी चरण में होने वाली है। इसके अलावा भाजपा की रेणु कुशवाहा, कांग्रेस के राम देव राय और माकपा के राम देव वर्मा की साख भी दावं पर है।

इस चरण में जिन सीटों पर सबकी नजर हैं, उनमें जमुई व चकाई प्रमुख है। चकाई व जमुई में हम नेता नरेंद्र सिंह के दोनों बेटे सुमित व अजय उम्मीदवार हैं।

नरेंद्र सिंह की पुश्तैनी सीट कहे जाने वाले जमुई की राजनीति को पिछले डेढ़ साल से चिराग भी रोशनी दे रहे हैं। शायद यही कारण है कि आज यह सीट चिराग के प्रभाव और नरेंद्र सिंह की पहचान का प्रश्न बन गया है।

चिराग नहीं चाहते थे कि नरेंद्र सिंह के बेटों को चुनाव में टिकट मिले, लेकिन भाजपा ने ‘हम’ के मार्फत अजय को टिकट दे दिया। लोजपा ने भी परोक्ष रूप से निर्दलीय उम्मीदवार जमुई से उतारा है। इनका नाम अनिल सिंह है, जो चिराग के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में यह लड़ाई दिलचस्प हो गई है।

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