BPSC Protest: प्रशांत किशोर ने गंगा स्नान के बाद हवन किया फिर तोड़ा अनशन; हाईकोर्ट में बीपीएससी केस पर सुनवाई
Bihar News: बीपीएससी री-एग्जाम की मांग कर रहे प्रशांत किशोर ने आमरण अनशन खत्म कर दिया। वह दो जनवरी से आमरण अनशन पर बैठे थे। जनसुराज की ओर से बताया गया कि युवाओं और जनसुराज परिवार के सम्मान में पीके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है।
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जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने 14वें दिन अपना अनशन तोड़ दिया। उन्होंने एलसीटी घाट स्थित जनसुराज आश्रम में अपने समर्थकों के हाथों जूस पीकर अनशन तोड़ा। इससे पहले उन्होंने गंगा नदी में डुबकी लगाई। स्नान के बाद बापू को प्रणाम किया। इसके बाद हवन-पूजन के बाद अपना अनशन तोड़ा। बता दें कि प्रशांत किशोर वह दो जनवरी से आमरण अनशन पर बैठे थे। तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था। फिलहाल वह ठीक हैं। अपने अनशन के चौदहवें दिन यानी गुरुवार दोहपर प्रशांत किशोर पटना के एलसीटी घाट स्थित जनसुराज आश्रम (कैंप) में तोड़ दिया। जनसुराज की ओर से बताया गया कि युवाओं और जनसुराज परिवार के सम्मान में पीके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
पटना हाईकोर्ट में एक घंटे चली सुनवाई
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा ली गई 70वीं पीटी परीक्षा को रद्द कराने की मांग पर पटना हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। कोर्ट में करीब एक घंटे बहस चली। इस दौरान बिहार सरकार के वकील पीके शाही और जनसुराज की ओर से वकील वाईवी गिरी ने कोर्ट में अपना-अपना पक्ष रखा। जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल की खंडपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने इस मामले में फैसला लिखवा दिया है, लेकिन उसे कोर्ट में नहीं बताया गया है। हाईकोर्ट की वेबसाइट पर फैसला को अपलोड करने की बात कही गई है। बता दें कि यह याचिका प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज की ओर से दायर की गई थी। जनसुराज के वकील प्रणव कुमार ने आर्टिकल 226 के तहत के तहत अपील की है कि जब तक दुबारा परीक्षा न हो जाए, तब तक 70वीं पीटी का परिणाम जारी नहीं किया जाए। वरीष्ठ वकील वाईवी गिरि खुद इस मामले को देख रहे हैं। जनुसराज की मांग है कि बीपीएससी 70वीं पीटी परीक्षा को रद्द कर दुबारा से परीक्षा ली जाए।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी याचिका, लेकिन...
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा 13 दिसंबर को ली गई 70वीं प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने का आदेश दिया। सात जनवरी दोपहर चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि देश ने देखा है कि पटना पुलिस ने किस तरह से प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि आपकी भावनाओं को हम समझते हैं। आप संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह पटना हाईकोर्ट का मामला है। आप वहीं जाएं।