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Bihar: नीतीश के CM आवास में अटक जाती थी सरकारी नौकरियों की फाइल, अब भाजपा खोलेगी सुशासन का ‘काला चिट्ठा’

Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 17 Aug 2022 05:05 PM IST
सार

जानकारी के मुताबिक, बीजेपी-जदयू सरकार में लगभग एक दर्जन विभागों में हजार से ज्यादा सरकारी नौकरी और कुछ में ठेके पर कर्मचारी रखने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उन्हें सीएम की तरफ से अनुमति नहीं दी गई।

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार - फोटो : ANI
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विस्तार

नीतीश कुमार बेरोजगारी के मोर्चे पर 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी को घेरने की योजना बना रहे हैं। योजना है कि अगले डेढ़ साल में बिहार में 10 लाख युवाओं को नौकरी दी जाए और लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान नीतीश कुमार को रोजगार देने वाले एक विकासवादी नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया जाए। इससे नीतीश कुमार को पीएम नरेंद्र मोदी के उस दावे पर हमला करने का सीधा अवसर भी मिल सकेगा जिसमें उन्होंने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था। नीतीश कुमार अग्निवीर योजना पर हमला बोलकर भी युवाओं को अपने पक्ष में जोड़ने की मुहिम छेड़ सकते हैं।


लेकिन भाजपा ने जदयू के इस प्लान को ध्वस्त करने की रणनीति बना ली है। भाजपा उन सरकारी नौकरियों की फाइल का ‘काला चिट्ठा’ जनता के सामने खोल सकती है जिसमें कई महत्त्वपूर्ण विभागों में भारी संख्या में सरकारी भर्ती करने के लिए प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन कथित तौर पर मुख्यमंत्री ने इस पर ‘होल्ड’ लगा दिया था। जानकारी के मुताबिक, बीजेपी-जदयू सरकार में लगभग एक दर्जन विभागों में हजार से ज्यादा सरकारी नौकरी और कुछ में ठेके पर कर्मचारी रखने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उन्हें सीएम की तरफ से अनुमति नहीं दी गई।


जदयू-बीजेपी गठबंधन सरकार में मंत्री रहे एक नेता ने अमर उजाला को बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगभग डेढ़ साल से नई सरकारी नौकरियों की भर्ती पर होल्ड लगा दिया था। जब नई सरकारी  भर्तियों की कोई फाइल मुख्यमंत्री की स्वीकृति के लिए भेजी जाती थी, तब उन पर उनकी कोई अनुमति नहीं मिलती थी। पूछने पर अधिकारियों के द्वारा बताया जाता था कि मुख्यमंत्री उस पर विचार कर रहे हैं। 

वैकल्पिक व्यवस्था के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर रखकर काम चलाने की बात कही जाती थी। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और पर्यावरण जैसे अहम विभाग शामिल हैं। भाजपा इन भर्तियों पर मुख्यमंत्री की चुप्पी का काला चिट्ठा एक रणनीति के तहत जनता के सामने रख सकती है जिससे सीएम-डिप्टी सीएम के रोजगार देने के दावों पर सवाल खड़े हो सकते हैं। 

कानून-व्यवस्था और ईडब्ल्यूएस पर निशाना
भाजपा बिहार में कानून-व्यवस्था पर नीतीश सरकार पर निशाना साधने की रणनीति बना चुकी है। इसके लिए दागी छवि के मंत्रियों और प्रदेश में हो रहे अपराध के सहारे सरकार पर हमला किया जाएगा। भाजपा को इसी मुद्दे पर यूपी चुनाव में बड़ी सफलता मिल चुकी है, पार्टी वही कहानी बिहार में भी दुहराने की रणनीति बना रही है। इसके लिए क्षेत्रवार पार्टी के नेता मैदान में उतारे जा सकते हैं।  

पार्टी का आधार वोट बैंक मजबूत करने के लिए पार्टी अपने वोट बैंक में विस्तार करने की योजान भी बना चुकी है। पार्टी के कोर वोटर रहे राजपूत, बनिया, ब्राह्मण, भुमिहार, कायस्थ के अलावा दलित-महादलित और आर्थिक तौर पर अतिपिछड़े वोट बैंक को साधने की रणनीति भी बना रही है। इसके लिए इन जातियों-वर्गों में पार्टी के नेता उभारे जाएंगे।

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