भाजपा ने सीटों के बंटवारे पर नीतीश की 'अकड़' की कम, जदयू के फॉर्मूले को किया खारिज
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आगामी लोकसभा चुनावों में जनता दल (यूनाइटेड) के सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला भाजपा ने सिरे से खारिज कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीतीश कुमार के करीबी आरसीपी सिंह और ललन सिंह ने भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव से दिल्ली में मुलाकात की है।
इस मुलाकात में भाजपा के समक्ष दो फॉर्मूले पेश किए गए। पहला फॉर्मूला जिसमें एनडीए के घटक दलों की सीटें तय कर दी जाए इसके बाद बाकी बची सीटों का जदयू और भाजपा बराबर हिस्सा कर ले। वहीं दूसरे फॉर्मूले के तहत जदयू 21 सीटों पर तो भाजपा अन्य सहयोगी दलों के साथ 19 सीटों पर लड़े। भाजपा ने इन दोनों ही फॉर्मूले को खारिज कर दिया।
बता दें कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर भाजपा ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है तो वहीं 2015 विधानसभा चुनावों में भाजपा से ज्यादा सीट जीतने वाली जदयू सीट बंटवारे में इस परिणाम को आधार बनाने की मांग पर अड़ी हुई है।
2014 लोकसभा चुनाव में जदयू बुरी तरह हारी थी
2014 लोकसभा चुनाव में जदयू को 40 में से मात्र 2 लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी और अन्य सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई थी। भाजपा ने इन चुनावों में 22 और उसके गठबंधन सहयोगियों में लोजपा ने 6 व रालोसपा ने 3 सीटों पर विजय पताका फहराई थी।
अलग लड़ेंगे चुनाव, समर्थन मिला तो ठीक नहीं मिला तो और ठीक
जदयू ने चार राज्यों में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान कर भाजपा को तेवर दिखाए हैं। नीतीश कुमार की पार्टी ने साफ कहा है कि एनडीए अगर इसे चेतावनी समझे, तो उसे फर्क नहीं पड़ता।
पार्टी प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा है कि वाजपेयी के समय भी एनडीए से झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश राजस्थान और कर्नाटक में हमारा गठबंधन था। हम मिल कर चुनाव लड़े थे।
अपने संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए हमने तय किया है कि जहां हमारी पकड़ मजबूत है, हम मैदान में जाएंगे। हम न किसी को हराने के लिए लड़ रहे हैं और न जिताने के लिए। जदयू एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। 7 और 8 जुलाई को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक है, बाकी मुद्दे उसमें तय किए जाएंगे।
केसी त्यागी के बयान पर भाकपा नेता अतुल अंजान ने तंज कसा और कहा, सबमें शामिल रह कर सबसे जुदा होने की कोशिश न करें नीतीश। वह भाजपा के ‘टाइम टेस्टेड फ्रेंड’ हैं। उन्हें पहले जवाब देना होगा कि उन्होंने बिहार में महागठबंधन क्यों तोड़ा।