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Bihar News: औरंगाबाद सांसद ने जिस गांव को गोद लिया था, वहां आज तक विकास नहीं हुआ...जान लें पूरा मामला
Fri, 08 Mar 2024 07:59 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 08 Mar 2024 07:59 PM IST
सार
10 साल पहले औरंगाबाद के सांसद ने एक गांव को गोद लिया था। लेकिन गांव का दुर्भाग्य है कि दस साल पहले जो स्थिति थी, वो स्थिति आज भी बनी हुई है। यानी विकास कार्य के नाम पर कुछ भी काम नहीं हुआ।
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गांव में नहीं हुआ विकास कार्य
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
साल 2014 में पहली बार प्रधान सेवक की कुर्सी संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने एनडीए के सभी सांसदों को अपने-अपने लोकसभा क्षेत्र के एक-एक गांव को गोद लेने का फरमान जारी किया था। कहा था कि इन गांवों को आदर्श गांव बनाएं। इस फरमान पर बिहार के औरंगाबाद के बीजेपी सांसद सुशील कुमार सिंह ने भी अपने संसदीय क्षेत्र में टेकारी विधानसभा क्षेत्र के केसपा गांव को गोद लिया था। गोद लेने के बाद समय बदला, दिन बदला, तारीख बदली और कैलेंडर भी बदले। लेकिन न ही केसपा गांव की तस्वीर बदली और न तकदीर, 10 साल बीत गए।
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गांव को गोद लेने के बाद सांसद का एक टर्म भी पूरा हो गया। फिर भी गांव के लोगों ने भरोसा किया। 2019 में उन्हे दूसरी बार भी लोकसभा में इस भरोसे पर भेज दिया कि अबकी बार सांसद केसपा गांव की तस्वीर और तदकीर दोनों जरूर बदलेंगे। फिर भी कुछ नही बदला, विकास के नाम पर सांसद ने इस गांव के तारा देवी मंदिर में इंडियन ऑयल के सीएसआर फंड से मात्र एक हाई मास्क लाइट लगवाया। बाकी कोई भी काम नहीं हुआ। यही वजह है कि केसपा के ग्रामीण इस बार के लोकसभा चुनाव में सांसद को सबक सिखाने के मूड में हैं। हालांकि गांव में सड़क, गली और नाली बनी दिखती है, लेकिन इसमें सांसद का कोई योगदान नहीं है।
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ग्रामीण बताते हैं कि गांव में जो कुछ भी विकास दिख रहा है, वह सब स्थानीय विधायक और पंचायत के फंड से हुआ है। गांव के उप सरपंच गौरव कुमार, पंचायत समिति सदस्य जयप्रकाश शर्मा, पूर्व पंचायत समिति सदस्य गुड्डू शर्मा बताते हैं कि केसपा गांव में जो भी सड़क और नाली-गली बनी है, वह सब पंचायत के फंड से बना है। गांव को गोद लेने के बाद सांसद ने गांव को आदर्श और सर्व सुविधा संपन्न बनाने के लिए कोई भी फंड नहीं दिया है। इसे लेकर गांव के लोग सांसद से नाराज हैं। इस बार उनको वोट नहीं मिलने वाला है।
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ग्रामीण चिकित्सक डॉ. सतीश कुमार, डॉ. सुबोध शर्मा, पिंकू शर्मा, रिटायर्ड टीचर कामता शर्मा और दिनेश मेहता कहते हैं कि केसपा गांव के खेतों को सिंचित करने वाली नहर किस डिविजन में पड़ती है, यह भी सांसद को पता नहीं है। नहर के तटबंध की मरम्मत कराने की मांग को लेकर गांव के लोगों का शिष्टमंडल औरंगाबाद जाकर सांसद से मिला था। सांसद ने सिर्फ आश्वासन दिया लेकिन नहर के लिए कुछ भी नहीं किया। बाद में पूछने पर सांसद के कहा कि नहर के टेकारी डिविजन के कार्यपालक अभियंता को तटबंध मरम्मत कराने को कहा है। ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव का नहर अरवल जिले के कुर्था डिविजन में पड़ता है। जबकि आश्चर्य की बात है कि सांसद टेकारी डिविजन की बात करते हैं।
ग्रामीण पिंकू शर्मा, प्रमोद शर्मा, हर्षित कुमार, अमरेंद्र शर्मा, कारू शर्मा एवं देवेंद्र शर्मा बताते हैं कि गांव का तारा देवी मंदिर ऐतिहासिक है। हम लोगों ने सांसद से मंदिर में एक चबूतरा बनवाने की मांग की थी। लेकिन सांसद ने यह भी नहीं किया। मंदिर में सांसद ने सिर्फ हाइ मास्ट लाइट लगवाया है। इसके अलावा सांसद ने गांव में विकास का कोई काम नहीं किया है। गांव की चकाचक जो मुख्य सड़क दिख रही है, उसे हम पार्टी के टेकारी के विधायक डॉ. अनील कुमार ने बनवाया है। लेकिन सांसद ने कुछ करने के बजाय गांव को गोद लेकर हमारे साथ छल किया है। हमें मोदी पर भरोसा है, लेकिन सांसद पर भरोसा नहीं है। हम सांसद को सबक सिखाएंगे। बीजेपी उम्मीदवार बदल देगी तो वोट दे सकते हैं, नही तो सांसद को हराएंगे।