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Bihar: मंदिरों में बलि पर रोक की 'कहानी' अब जानिए धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष की जुबानी; क्या होगा असल में

Mon, 18 Dec 2023 08:33 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Mon, 18 Dec 2023 08:33 PM IST
सार

Bihar News : दरभंगा के एक मंदिर में बलि पर रोक की खबर फैली और फिर उसी लेटर के साथ बिहार के सभी मंदिरों में बलि पर रोक की जानकारी वायरल होने लगी। 'अमर उजाला' ने पहले ही बताया कि सच्चाई क्या है? अब धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ने पूरी बात बताई है।

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Bihar state board of religious trust sacrifice ban in temples in bihar, dharmik nyas president clarification
धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के सभी मंदिरों में बलि देने पर रोक को लेकर राजनीति गरमा गई, लेकिन हकीकत की पड़ताल सिर्फ 'अमर उजाला' ने की। बताया कि दरभंगा के मंदिर के संबंध में जारी चिट्ठी के बहाने यह बात फैलाई जा रही है। उस जानकारी को लेकर धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश जैन ने सिर्फ कहा था कि रिकॉर्ड देखकर बताएंगे। अब उन्होंने पूरी बात बताई है। हकीकत दरभंगा के मां श्यामा मंदिर को लेकर जारी चिट्ठी के अंदर ही है। अध्यक्ष ने कहा कि उनकी ओर से बलि पर रोक को लेकर कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है, बल्कि बलि के लिए कर्मचारी रखने की मांग के जवाब में कहा गया कि इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की जाएगी और न इसके लिए राशि का भुगतान किया जाएगा।

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जानिए क्या कहा धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन ने
धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन ने बताया कि मुझे स्थानीय न्यास समिति से कोई व्यक्तिगत लेना देना नहीं है लेकिन यह सच है कि जो पत्र लिखा गया है, लिखने वाले काफी विद्वान और चतुर हैं। उन्होंने जान-बूझ कर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद से बलि प्रथा के लिए कर्मचारी की नियुक्ति की मांग कर दिया। अखिलेश कुमार जैन ने कहा कि पत्र लिखने वाले को पता है कि यह मांग कभी पूरी नहीं की जा सकती है क्योंकि पशु क्रूरता अधिनियम कानून है और समिति भी अपने गाइडलाइन में इस नियम का पालन करते आ रही है। ऐसे में जो यहां के स्थानीय समिति चाह रहे थे वही हुआ। कर्मचारी देने से मना कर दिया गया और पत्र के अंत में लिख दिया गया कि भविष्य में इस बात का ध्यान रहे कि न तो बलि प्रथा करने की कोई व्यवस्था मंदिर में की जाएगी और न ही इस प्रकार की कोई राशि या अनुमति मंदिर प्रशासन के माध्यम से दी जाएगी।

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