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नाराजगी: मंत्रिमंडल विस्तार से नाखुश हैं नीतीश कुमार! अभी तक इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह को नहीं दी बधाई

Thu, 08 Jul 2021 02:44 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Thu, 08 Jul 2021 02:44 PM IST
सार

जेडीयू में नंबर दो के नेता माने जाने वाले आरसीपी सिंह को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अभी तक कोई बधाई संदेश नहीं मिला है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नीतीश कुमार आरपीसी के मंत्री बनाए जाने से खुश नहीं हैं।

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Bihar: Nitish Kumar is unhappy with the expansion of the cabinet, Not yet congratulated Steel Minister RCP Singh
नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार - फोटो : PTI

विस्तार

बिहार की राजनीति में खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की माला रटने वाले चिराग पासवान और जनता दल यूनाटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के करीबी ललन सिंह की उम्मीदों पर पानी फिर गया। उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। 
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जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह मोदी कैबिनेट में इस्पात मंत्री बन गए हैं। इस मौके पर लगातार उन्हें ट्विटर और अन्य माध्यमों से बधाई भी मिल रही है। हालांकि, जेडीयू में नंबर दो के नेता माने जाने वाले आरसीपी सिंह को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अभी तक कोई बधाई संदेश नहीं मिला है। इसे मोदी कैबिनेट में जेडीयू को मिली एक सीट से नीतीश कुमार की नाराजगी को भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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भाजपा पशुपति पारस को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाना चाहती थी, जबकि नीतीश उन्हें हर हाल में कैबिनेट मंत्री बनाने पर अड़े थे। नतीजे में नीतीश को पारस को अपनी पार्टी के कोटे से मंत्री बनाना पड़ा।
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दरअसल, भाजपा ने जदयू को दो कैबिनेट और एक राज्य मंत्री के पद का प्रस्ताव दिया था। भाजपा लोजपा को सरकार में शामिल करने के मामले में ऊहापोह में थी, जबकि नीतीश चाहते थे कि पशुपति पारस को मंत्री बनाकर चिराग को अंतिम सियासी झटका दे दिया जाए। जब भाजपा इसके लिए तैयार नहीं हुई तो नीतीश ने अपनी पार्टी के कोटे से पारस को मंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा।

लंबी बातचीत के बाद भाजपा इसके लिए तैयार हो गई। विधानसभा चुनाव में चिराग की ओर से मिले झटके से नीतीश बेहद नाराज थे। लोजपा में बगावत की पटकथा उनके इशारे पर ही लिखी गई। उनके आश्वासन पर ही पशुपति ने चिराग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें लोकसभा में संसदीय दल का नेता और पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया।


छह में से पांच सांसद चिराग के खिलाफ हो गए। नीतीश चाहते थे कि दिवंगत रामविलास पासवान की जगह मंत्री बन कर पशुपति चिराग की अंतिम उम्मीद भी खत्म कर दें। हालांकि भाजपा इसके लिए इंतजार करना चाहती थी।
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