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Bihar: दोनों ओर मकान, बीच में सड़क, अचानक वक्फ बोर्ड ने ठोका जमीन पर दावा; भाजपा सांसद बोले- बड़ी साजिश है

Thu, 12 Sep 2024 03:57 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Thu, 12 Sep 2024 03:57 PM IST
सार

भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि यह बड़ी सजिश है। मुसलमानों को भी नहीं पता है कि हमारी जमीन कब वक्फ बोर्ड की हो गई। उन्होंने देश के प्रत्येक राज्य के सुन्नी वक्फ बोर्ड, इस्लाम, लॉ यूनिवर्सिटी के बड़े जानकारों को बुलाकर उनका पक्ष लेने की बात कही है। डॉ

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Bihar News: Waqf Board stakes claim on land in Fatuha, Patna; BJP MP Sanjay Jaiswal reacted
लोगों के बातचीत करते भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिस जमीन पर लोग कई सालों से रह रहे हैं। दोनों ओर मकान बना दिया। बीच में सड़क भी है। उसपर अचानक सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना दावा ठोक दिया। कहा कि यह जमीन बोर्ड की है। इतना ही नहीं इस जमीन पर रहने वाले लोगों को 30 दिन के अंदर खाली करने का नोटिस भेजा। नोटिस के बाद लोगों में आक्रोश है। लोगों ने बिहार सरकार ने न्याय की गुहार लगाई है। इस मामले को लेकर जेपीसी के केंद्रीय टीम के सदस्य पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल पीड़ितों से मिलने फतुहा के गोविंदपुर पहुंचे। उन्होंने लोगों से मुलाकात की और जमीन से जुड़े से कागजातों का भी अवलोकन किया।  

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वक्फ बोर्ड की जमीन घोषित कर दी गई
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि यह बड़ी सजिश है। मुसलमानों को भी नहीं पता है कि हमारी जमीन कब वक्फ बोर्ड की हो गई। उन्होंने देश के प्रत्येक राज्य के सुन्नी वक्फ बोर्ड, इस्लाम, लॉ यूनिवर्सिटी के बड़े जानकारों को बुलाकर उनका पक्ष लेने की बात कही है। डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि इस तरह के कानून का दुरुपयोग हो सकता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण गोविंदपुर का यह इलाका है। मैं खुद देख रहा हूं कि इस जमीन पर सड़क बनी हुई है। दोनों ओर मकान बनी हुई है, लेकिन एक शख्स आए और अपनी इच्छा से पूरे इलाके को वक्फ बोर्ड की जमीन घोषित कर दी गई। पहले कभी किसी को नोटिस नहीं दिया गया। बेचारों को पता भी नहीं है, अचानक एक दिन बोर्ड लगा दिया जाता है कि यह संपत्ति वक्फ की जमीन है। सभी अपना-अपना मकान खाली करें। खतियानी में भी इन सभी परिवार का नाम है। इसमें 90% हिंदू और 10% मुसलमान हैं। मुसलमानों को भी यह नहीं पता कि उनके दादा जी ने कब यह जमीन वक्फ बोर्ड को दी थी। यह अन्याय है। मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जा रही है। 

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दावा- पूर्वजों ने कब्रिस्तान के लिए यह जमीन दी थी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जमीन को अपना बताते हुए कहा कि यह जमीन कब्रिस्तान की है। मुसलमान परिवारों के पूर्वजों ने कब्रिस्तान के लिए यह जमीन दी थी। बोर्ड ने 30 दिनों के भीतर हट जाने को कहा था लेकिन गांव वाले वक्फ बोर्ड के दावे को गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास जमीन के सभी कागजात हैं। यह साजिश के तहत की जा रही है। इस मोहल्ला में करीब 95 प्रतिशत आबादी हिंदूओं की है और वे कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। उनके पास जमीन के सभी कागजात भी उपलब्ध हैं। ऐसे में वक्फ का दावा गलत है। 

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