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सुशील कुमार मोदी : लालू यादव हों या नीतीश कुमार- भाजपा से नजदीक आए तो इनके कारण, दूर रहे तो इनके ही निशाने पर

Mon, 13 May 2024 11:50 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Mon, 13 May 2024 11:50 PM IST
सार

Sushil Kumar Modi Death : राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सुशील कुमार मोदी का रिश्ता कुछ अलग जैसा था। तीनों एक जगह से निकले। राह कभी साथ, कभी अलग रही।

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Bihar News : Trinity of Sushil Kumar Modi Nitish Kumar Lalu Yadav been both enemy and friend in bihar politics
सुशील मोदी हमेशा नीतीश कुमार के सबसे पसंदीदा डिप्टी रहे। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

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कमान संभाली तो सरकार बदलने को मजबूर हुए नीतीश
लालू-नीतीश-सुशील की त्रिमूर्ति के रिश्तों को ठीक से समझना हो तो भी बहुत पीछे जाने की जरूरत नहीं। 2005 से नीतीश कुमार के साथ ही सुशील मोदी साये की तरह थे। जब प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को भाजपा ने आगे किया था, तब नीतीश कुमार ने भाजपा से दूरी बना ली। येन-केन-प्रकारेण यह दूरी बनी तो 2014 के लोकसभा के बाद 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी कायम रही। भाजपा को इस चुनाव में भारी झटका लगा। कोई तारणहार नहीं नजर आ रहा था। नीतीश कुमार वापस लालू प्रसाद यादव के साथ हो लिए थे। पहली बार तेजस्वी यादव को डिप्टी सीएम की कुर्सी मिली थी। सब ठीक ही चल रहा था। लेकिन, फिर सुशील कुमार मोदी ने मिट्टी-मॉल घोटाले की फाइल ऐसी खोली कि नीतीश कुमार को अपने फैसले पर शक होने लगा। लगभग 50 दिनों तक सुशील मोदी ने ऐसा अभियान चलाया कि नीतीश कुमार का शक यकीन में बदल गया और 2015 में लिए महागठबंधन के लिए जनादेश को ठुकरा कर वह 2017 में वापस भाजपा के साथ आ गए।
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सुशील भेजे गए दिल्ली तो नीतीश भी हो गए भाजपा से दूर
फिर सब ठीक चल रहा था और 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ नीतीश कुमार को जनादेश मिला। इस जनादेश के बाद भाजपा ने अप्रत्याशित रूप से नीतीश कुमार को झटका दिया। भाजपा ने सुशील कुमार मोदी को उनका डिप्टी सीएम नहीं बनाया। उन्हें राज्यसभा भेज दिया। तभी से यह माना जा रहा था कि समन्वय का संकट होगा। यही हुआ भी, जिसके कारण नीतीश कुमार ने एक बार फिर लालू प्रसाद यादव का रुख किया। वह भाजपा के साथ पुराने प्रारूप का संबंध कायम नहीं रख सके। महागठबंधन की सरकार बीच में ही बनी और फिर जब लोकसभा चुनाव की आहट शुरू हुई तो अपने जन्मदिन के आसपास सुशील कुमार मोदी ने नीतीश को वापस लाने का प्रयास अपने स्तर से शुरू किया। जनवरी 2024 में सुशील कुमार मोदी के जन्मदिन (5 जनवरी) के पोस्टरों में उन्हें 'बिहार भाजपा का संकटमोचक' बताया गया और 28 जनवरी को नीतीश कुमार फिर भाजपा के साथ आ गए। बस, सुशील कुमार मोदी की वापसी नहीं हुई। और, अब तो वह वहां चले गए- जहां से कोई वापस ही नहीं आता।

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