Bihar News : महायोगी पायलट बाबा ने ली अंतिम सांस, बिहार के इस शहर को दिलाई देश भर में नई पहचान
Bihar : महायोगी पायलट बाबा की आज इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस लिया।
विस्तार
महायोगी पायलट बाबा 86 साल की उम्र में मंगलवार को अंतिम सांस ली। तबीयत खराब होने पर उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाक के दौरान उनकी मौत हो गई। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भीमताल ब्लॉक अंतर्गत गेठिया गांव में उनका आश्रम है, लेकिन पायलट बाबा ने सासाराम में पायलट बाबा धाम की स्थापना कर सासाराम को देश भर में नई पहचान दिलाई। पायलट बाबा का पार्थिव शरीर आज रात विशेष हवाई जहाज से हरिद्वार स्थित आश्रम में लाया जाएगा। कल हरिद्वार स्थित पायलट बाबा के आश्रम में आम लोगों के दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर रखा जाएगा। पायलट बाबा के निधन की खबर सुनते हैं रोहतास के सासाराम स्थित पायलट बाबा आश्रम में शोक सभा का आयोजन किया गया। इस शोक सभा में रोहतास जिले के कई जन प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रख उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
जानिए क्या है इनका पूरा परिचय
पायलट बाबा मूल रूप से रोहतास जिले के जिला मुख्यालय सासाराम के बरांव गांव रहने वाले थे और उनका असली नाम महायोगी कपिल अद्वैत सामनाथ गिरी था। वह किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके नाम पर उनके गांव में सरकारी विद्यालय भी है। पायलट बाबा भारतीय एयरफोर्स में विंग कमांडर रहते हुये पायलट भी रह चुके थे। वह पाकिस्तान और चीन से भी युद्ध लड़ चुके थे। चीन से युद्ध लड़ने के क्रम पायलट बाबा का प्लेन क्रैश हो गया था। इसके बाद पायलट बाबा कई महीनों तक बर्फ के नीचे दबे रहे और समाधि के सहारे अपने आप को जिंदा रखा। उसी समय से उन्हें समाधि बाबा की उपाधि मिली।
इस वजह से इन्हें मिली समाधि बाबा की उपाधि
पायलट बाबा ने सासाराम में एक भव्य आश्रम का निर्माण कराया था, जो पायलट बाबा धाम के नाम से मशहूर है। इस स्थल पर न सिर्फ रोहतास जिला में बल्कि पूरे बिहार में मशहूर है। सासाराम में पायलट बाबा धाम की स्थापना कर उन्होंने सासाराम को देश भर में नई पहचान दिलाई। पायलट बाबा योग विद्या में सिद्धस्थ थे और लंबे समय तक समाधि लेने में वह निपुण थे। महायोगी बनने के बाद पायलट बाबा कई बार समाधि लेकर अपने आप को जीवित रखकर सबको आश्चर्यचकित कर दिये थे। इसीलिए भी उन्हें समाधि बाबा के नाम से भी जाना जाता है। पायलट बाबा को महामंडलेश्वर की भी उपाधि मिली थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भी उनकी कई तस्व्वेरें देखि गई हैं। सासाराम के अलावे पायलट बाबा के हरिद्वार, नैनीताल और उत्तरकाशी जैसे कई जगहों पर आश्रम हैं।