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Bihar News : लालू यादव ने पार्टी को लेकर बड़ा फैसला क्यों लिया? राजद अध्यक्ष ने संविधान बदल कद और पद तय किया

सार

RJD News : राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने एक तरह से परिवार और अपनी पार्टी की वसीयत कर दी है। उन्होंने पद और कद का बंटवारा कर दिया है। पद वाले बड़े परिजनों की गवाही में सबसे छोटे तेजस्वी यादव को समकक्ष कद देने की वजह भी समझने लायक है।

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Bihar News : Lalu Yadav RJD Party constitution amendment power to tejashwi yadav
लालू यादव के परिवार में उन्हें मिलाकर यह छह चेहरे बिहार की राजनीति कर रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

देश के पूर्व रेल मंत्री, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पार्टी और परिवार का वसीयतनामा लिख दिया है। उन्होंने अपनी पार्टी राजद के संविधान में बदलाव के साथ परिवार के तमाम लोगों के पद और कद तय कर दिए। कहा जा रहा है कि दूसरे दलों में टूट का बारंबार दावा करने वाली पार्टी- राजद को अपना किला बचाने के लिए संविधान में बदलाव करना पड़ा। लेकिन, बात इतनी ही नहीं है। लालू यादव ने पार्टी के अंदर परिवार से उत्तराधिकारी को लेकर सभी संशयों को दूर करने के लिए यह फैसला लिया। बड़ी बेटी या बेटे को पद दिया, लेकिन कद सभी में छोटे, बेटे तेजस्वी यादव को दिया।

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राजद के संविधान का संशोधन क्या कहता है
शनिवार को राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक बहुत लंबे समय तक नहीं चली। कार्यकारिणी बैठक में दो फैसले लेकर इसे यथाशीघ्र खत्म भी किया जाना था ताकि बहुबात न हो। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी के पटना दौरे ने राजद की कार्यकारिणी बैठक को जल्द खत्म करने का रास्ता प्रशस्त कर दिया। जल्दी-जल्दी में वह दोनों फैसले भी हो गए- 1. राष्ट्रीय अध्यक्ष की निर्वाचन प्रक्रिया अक्तूबर में बिहार विधानसभा चुनाव आने से पहले कर लिया जाए। और, 2. परिवार से पार्टी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया जाए। पहला फैसला कागज पर प्रस्ताव के रूप में आया और दूसरा मौखिक रूप से (बाद में लिखित आने की जानकारी के साथ)। राजद के सांगठनिक चुनाव को अप्रैल से जून के बीच में पूरा किया जाना है, लेकिन इसके साथ-साथ संविधान में संशोधन के जरिए यह तय कर दिया गया कि अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव आगे बागडोर नहीं संभाल पाते हैं तो विरासत के उत्तराधिकारी तेजस्वी प्रसाद यादव होंगे, न कि बड़े बेटे तेज प्रताप यादव या दूसरे घर जा चुकीं बड़ी बेटियां मीसा भारती या रोहिणी आचार्य।

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Bihar News : Lalu Yadav RJD Party constitution amendment power to tejashwi yadav
राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में लालू के पीछे दिख रहीं मीसा भारती। सामने दिख रहे तेजस्वी यादव। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

संविधान संशोधन के जरिए देश-विदेश तक संदेश
राजद का संविधान संशोधन लालू परिवार के लिए वक्त की मांग थी। पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और विधान परिषद् में रहने के बावजूद अब ज्यादातर समय पति के आसपास बिताती हैं। उम्र का भी तकाजा है। नई पीढ़ी में बड़ी बेटी मीसा भारती सबसे लंबे समय से राजनीति में हैं। राज्यसभा सांसद का कार्यकाल रहते जिद पर पाटलिपुत्र लोकसभा का चुनाव लड़कर इस बार जीतीं। मीसा भारती का नंबर परिवार में ठीकठाक था, लेकिन उनके बाद वाली बहन रोहिणी आचार्य पिछले दो साल से ज्यादा चर्चा में हैं। किडनी दान कर पिता लालू प्रसाद यादव को जीवन देने के कारण उनका ग्राफ पार्टी के अंदर तेजी से उछला था। सारण में भाजपा के दिग्गज प्रत्याशी राजीव प्रताप रूडी से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी उनका स्वदेश दौरा बार-बार हो रहा है। विदेश से आकर वह विधानसभा चुनाव लड़ें तो अजूबा नहीं। इसके बाद बिहार की राजनीति में सक्रिय बड़े बेटे तेज प्रताप यादव हैं, जो पहले ही छोटे भाई तेजस्वी यादव से कद में छोटे हो चुके हैं। तेज प्रताप दो बार मंत्री बने, जबकि तेजस्वी यादव दोनों बार उप मुख्यमंत्री। इन चार के बीच कुछ हो तो वह घर का मामला है, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल में लालू के उत्तराधिकारी को लेकर कुछ भी हो तो लंबे अरसे की मेहनत बेकार जाती। इसलिए, पार्टी संविधान में संशोधन के जरिए लकीर खींच दी गई है।



राजद के संविधान में संशोधन वस्तुत: क्या हुआ है?
"राजद में टूट होने पर पार्टी का नाम, चुनाव चिह्न और झंडे को लेकर चुनाव आयोग का निर्णय मान्य नहीं होगा। राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके समकक्ष अधिकार प्राप्त तेजस्वी प्रसाद यादव जो निर्णय लेंगे, वही मान्य होगा।"- लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल में संविधान संशोधन मूलत: यही है।

टूट की बात को आधार बनाने की वजह मौजूद है
अव्वल तो यह कि 'राजद में टूट' की आशंका क्यों है? इसका जवाब बीच-बीच में मिलता रहा है। पार्टी में एक ही परिवार का वर्चस्व बताकर रामकृपाल यादव जैसे दिग्गज नेता राजद छोड़ चुके हैं। इस समय पार्टी में दूसरा एक परिवार प्रभावी हो रहा था- जगदानंद सिंह का। जगदानंद खुद राजद के प्रदेश अध्यक्ष हैं। उनके बेटे सुधाकर सिंह सांसद हैं। दूसरे बेटे ने विधायकी का चुनाव लड़ा, हालांकि वह राजद की सीट नहीं बचा सके। जगदानंद नहीं, लेकिन सुधाकर बगावती तेवर के रहे हैं। 28 जनवरी 2024 को लौटी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का 12 फरवरी 2024 को फ्लोर टेस्ट हुआ तो राजद के कई नेता सत्ता की तरफ हो लिए थे। यह भी एक प्रासंगिक विषय है। इसके अलावा, तेज प्रताप यादव एक बड़ा विषय हैं। चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं- "तेज प्रताप यादव कभी अपना संगठन बनाते हैं तो कभी तेजस्वी यादव के सारथी बनते हैं और कभी छोटे भाई के आसपास रहने वालों से गुस्सा जाते हैं। परिवार से उनकी दूरी भी दिखती है और अलग रास्ता भी। मतलब, संशय की स्थिति रहती है। यह एक बड़ी वजह हो सकती है कि पार्टी में तेजस्वी यादव का कद तय करने के पीछे।"

तेजस्वी यादव अब जेल भी गए तो भी चलेगी उनकी ही
झारखंड प्रकरण को थोड़ा याद करें। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेल जाते समय क्या हुआ था? पिछले साल लगभग इसी समय कल्पना मुर्मू सोरेन अचानक राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में सामने आने लगी थीं, क्योंकि हेमंत के जेल जाने की स्थिति में उत्तराधिकारी को लेकर बहुबात हो रही थी। हेमंत ने जेल जाते-जाते पत्नी कल्पना सोरेन को गद्दी देने की पूरी तैयारी कर ली, लेकिन भाभी सीता सोरेन के विरोध ने उन्हें फैसला बदलने को मजबूर कर दिया। आखिरकार चंपाई सोरेन को सीएम की कुर्सी सौंप जेल गए और फिर लौटते ही कुर्सी वापस ले ली। झारखंड मुक्ति मोर्चा के पार्टी संविधान में हेमंत को यह हक था या नहीं, लेकिन अब तेजस्वी यादव के पास ऐसा अधिकार रहेगा। लैंड फॉर जॉब केस में लालू-राबड़ी के साथ मीसा और तेजस्वी यादव पर भी हमेशा तलवार लटकती रहती है। बीच में ऐसी आशंका के कारण एक बार तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री का नाम उछला भी था। ऐसे में समझना मुश्किल नहीं है कि राजद के संविधान संशोधन के बाद 'अगर' वाली स्थिति आती है तो क्या होगा? निश्चित तौर पर चलेगी उनकी ही।

पांच बहनें और, लेकिन बिहार की राजनीति से दूर
लालू यादव की नई पीढ़ी में मीसा भारती, रोहिणी आचार्य, तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति में हैं। बेटे तो यही दो हैं, लेकिन बेटियां मीसा और रोहिणी के अलावा पांच और हैं। यह पांच बिहार की राजनीति से दूर हैं। रोहिणी के बाद वाली बहन चंदा अपने पायलट पति विक्रम सिंह के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही हैं। उसके बाद रागिनी हैं, जो दिवंगत मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी के नेता जितेंद्र यादव के बेटे राहुल यादव से शादी कर अपनी जिंदगी जी रही हैं। पांचवीं बेटी हेमा के पति विनीत यादव भी राजनीतिक चेहरा हैं, लेकिन बिहार से नाता नहीं रखते हैं। उनके बाद धन्नु उर्फ अनुष्का राव हैं। लालू की बेटी अनुष्का की शादी हरियाणा सरकार में मंत्री रहे अजय सिंह यादव के बेटे चिरंजीव राव से है। सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी निकटवर्ती राज्य उत्तर प्रदेश में हैं और दिवंगत मुलायम सिंह यादव के पोते पूर्व सांसद तेज प्रताप सिंह यादव की पत्नी हैं। 

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