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Politics : राजनीति में उतरने के सवाल पर बिहार के चर्चित IPS ने लिखी मन की बात; प्रशांत किशोर की भी चर्चा

Mon, 14 Oct 2024 09:33 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Mon, 14 Oct 2024 09:33 AM IST
सार

Bihar News : बिहार के चर्चित आईपीएस अधिकारी विकास वैभव की राजनीति में एंट्री को लेकर बार-बार बातें उठती रहती हैं। लोकसभा चुनाव के पहले भी उठी थी, अब विधानसभा चुनाव में भी। ऐसे में विकास वैभव ने पीके की चर्चा करते हुए मन की बात लिखी है।

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Bihar News : IG Vikas Vaibhav IPS social media post on entry in bihar politics, prashant kishor bihar politics
सीनियर आईपीएस अधिकारी विकास वैभव और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विकास वैभव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कुछ दिन पूर्व दिल्ली में था। भ्रमण के क्रम में एक परिचित ने बड़े स्नेह से पूछा कि आप क्यों अपने अवकाश के दिन बिहार के लिए बर्बाद करते रहते हो और तीन वर्ष से अधिक से हर जिले में घूम रहे हो? यदि चुनाव लड़ना है तो केवल बेगूसराय और अपने क्षेत्रों में घूमते, पार्टियों के बड़े नेताओं के चक्कर लगाते, उनसे घनिष्ठ संबंध बनाते, सफलता तुरंत मिल जाती, भला बिहार को प्रेरित करने में क्यों उर्जा लगाना? आपका उद्देश्य क्या है? बताइए, भला क्या परिवर्तन हुआ है। लेट्स इंस्पायर बिहार के तीन वर्ष बीतने पर भी? विकास वैभव ने कहा कि बात यहीं नहीं रूकी! उन्होंने राय भी दी कि आप जान लीजिए कि बिहार में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला।

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सीनियर आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने कहा कि बिहार जातिवाद की भयानक समस्या से ग्रसित है। वहां लोग आपके नीयत को नहीं, केवल आपकी जाति को ही देखेंगे और तदनुसार आपको भी समझेंगे। यदि आपको यह समझ नहीं आता तो उनसे सीखिए जो आपके बाद बिहार बदलने के लिए एक और अभियान शुरू किए थे परंतु तुरंत ही बिहार की जमीनी सच्चाई समझ गए और उन्होंने राजनीति का मार्ग चुना और अब जाति-संप्रदाय के नाम पर ही बिहार को बांटकर टिकट देने से लेकर पार्टी के पदों तक को भरने की बात करते हैं । यह तो वो भी जानते हैं कि ऐसा करने से बिहार नहीं बदलेगा, परंतु वह प्रैक्टिकल हो गए हैं! आप भी जान लीजिए कि राजनीति से ही परिवर्तन संभव है, आपकी यात्राओं और सोए हुए समाज को जगाने के प्रयासों से नहीं। आप भी प्रैक्टिकल बन जाइए, और सही दिशा में उर्जा लगाइए। मैं तो 30 वर्ष पहले ही बिहार छोड़ चुका हूं और जानता हूं कि वहां कुछ नहीं बदलेगा। मैं आपको राय इसीलिए दे रहा हूं चूंकि जब आपको इतना परिश्रम करते सोशल मीडिया पर देखता रहा हूं तो मुझे लगता है कि क्यों उर्जा को व्यर्थ कर रहे। आज जब मिले तो लगा कि आपको अपने मन की बात कह दूं, कृपया इसे अन्यथा मत लीजिएगा।
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मुठभेड़ों की संख्या को ही सफलता का मानक माना जाता था
आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि मैं उन्हें ध्यान से सुनता रहा और जब वह रूके तब मैंने कहा कि भाईसाहब, मैं अत्यंत आशावादी व्यक्ति हूं। मुझे परिणाम की चिंता नहीं है परंतु यह पूर्ण विश्वास है कि जिस मिशन में मैं लगा हूं, वह अवश्य सफल होगा। आप मेरे वर्तमान को तो देख पा रहे हैं परंतु यहां तक मैं कैसे पहुंचा हूं और आज ऐसा क्यों कर रहा हूं? यह आप नहीं समझ पा रहे हैं इसीलिए ऐसा प्रश्न कर रहे हैं। ऐसे प्रश्न करने भी चाहिए, चूंकि ऐसे प्रश्नों से ही तो समाधान का मार्ग निकलेगा । मैंने अनेक असंभव परिवर्तनों को अपने संक्षिप्त जीवनकाल में ही साक्षात संभव होते हुए देखा है और मेरे प्रयासों के पीछे मेरे अडिग विश्वास के वही अनुभव आधार हैं। मैंने उन्हें बताया कि आज से 16 वर्ष पूर्व 2008 के अगस्त में मैं रोहतास का एसपी बना था। उस समय रोहतास उग्रवाद से ग्रसित था और प्रतिवर्ष हिंसा में अनेक पुलिसकर्मी शहीद हो रहे थे। वर्ष 2002 में तत्कालीन डीएफओ और वर्ष 2006 में डीएसपी भी शहीद हुए थे। आमतौर पर पुलिस द्वारा उग्रवादियों की गिरफ्तारी तथा मुठभेड़ों की संख्या को ही सफलता का मानक माना जाता था।
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उज्ज्वलतम भविष्य निर्माण में मेरा योगदान होना चाहिए
विकास वैभव ने कहा कि तीन सितम्बर, 2008 को सोली में छह इंच की दूरी से मेरे बगल से भी सैंकड़ों गोलियाँ निकली थीं और उसके पश्चात भी अनेक मुठभेड़ हुए थे परंतु अपनी बृहत दृष्टि के कारण मैं यह समझ गया था कि हिंसा को प्रतिहिंसा से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। पहली नजदीकी मुठभेड़ के बाद ही मेरे सभी शुभचिंतकों ने मुझे सचेत करने का हरसंभव प्रयास किया था और कहा था कि मुझे अपने प्राणों की तथा परिवार की चिंता करनी चाहिए और उग्रवादियों से दूरी बनाकर रखना चाहिए। यदि मैडल जीतना उद्देश्य था तो अपराधियों के विरुद्ध ही सघन कार्यवाई करनी चाहिए चूंकि उसमें खतरा कम था और प्रसिद्धि भी व्याप्त थी । परंतु मैं तब भी प्रैक्टिकल नहीं था, मेरी बृहत दृष्टि तो यही कहती थी कि मैं तो निमित्त मात्र ही हूँ, बिहार में परिवर्तन हेतु योगदान समर्पित करने आया हूँ और इसीलिए मार्ग की चुनौतियों का पूर्ण बल एवं आशावादिता सहित सामना करना है। जर्मनी में मल्टीनेशनल कंपनी और भारत की बड़ी सोफ्टवेयर कंपनी के ऑफर त्यागकर जब भारतीय पुलिस सेवा में योगदान दे रहा था तब बिहार कैडर आवंटित हो चुका था और उसके बाद भारतीय विदेश सेवा के लिए भी चयनित हुआ था परंतु मन में यही संकल्प था कि बिहार के परिवर्तन तथा उज्ज्वलतम भविष्य निर्माण में मेरा योगदान होना चाहिए। अतः बगहा में असंभव माने जाने वाले परिवर्तन को संभव कर सका और जब रोहतास पहुंचा तब भी किसी चुनौती से नहीं डरा, समस्या के पूर्ण समाधान पर ही चिंतन करने लगा। 

विश्व के प्रथम गणराज्य को स्थापित किया जा सका
आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि बिहार को बदलने के लिए हमें बिहार की उस मूल भावना को समझना होगा जिसके कारण हम नव सर्जन करने में सक्षम हो सके। बिहार ही वेदांत की धरती रही है जिसकी बृहत दृष्टि में हर व्यक्ति ही नहीं अपितु हर आत्मा में भी उसी परमतत्व के अंश को देखने की कल्पना थी और कोई भेदभाव नहीं था। जातियां प्राचीन बिहार में अवश्य रहीं परंतु व्यक्ति को व्यक्ति से तोड़ने वाला जातिवाद यदि हावी रहा होता तो मगध में सबसे निम्न वर्ग से आने वाले नंद वंश का कभी उदय नहीं होता और न आचार्य चाणक्य भी चंद्रगुप्त की क्षमता को आंक पाते। यह व्यक्ति के सम्मान तथा व्यक्ति को व्यक्ति से जोड़ने की हमारे पूर्वजों की क्षमता ही थी जिसके कारण बिना भेदभाव के चुने गए 7707 गणराजाओं के द्वारा वैशाली के संथागार में विश्व के प्रथम गणराज्य को स्थापित किया जा सका।


पांच ऐसे सफल स्टार्ट-अप्स की स्थापना का लक्ष्य है
आईपीएस ने कहा कि यदि कालांतर में हमारा अपेक्षाकृत विकास नहीं हुआ तो इसका कारण कहीं न कहीं समय के साथ लघुवादों अथवा अतिवादों से ग्रसित होना ही रहा है। अभियान का उद्देश्य इतिहास के संदेश को बिहार के हर व्यक्ति तक पहुँचाना है ताकि हम अपनी उर्जा सही दिशा में लगाएं। जो सक्षम हैं उन्हें उनके सहयोग के लिए तत्पर होना होगा जिन्हें उसकी वास्तविक आवश्यकता है, तब ही तो समतामूलक समाज का निर्माण संभव हो सकेगा। अभियान के अंतर्गत संकल्पना यही है कि उद्यमिता की व्यापक क्रांति से ही हम मिलकर 2047 तक विकसित भारत में एक ऐसे विकसित बिहार का निर्माण कर सकते हैं, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य अथवा रोजगार के लिए किसी को अन्यत्र जाने की आवश्यकता नहीं हो, और इसके लिए आवश्यक होगा कि जाति-संप्रदाय, लिंगभेद, विचारधाराओं के मतभेद आदि से परे उठकर हम संगठित रूप में सकारात्मक योगदान करें। बिहार के बाहर निवास कर रहे मूल बिहारवासियों को भी अपने जिलों में उद्यमिता के विकास के लिए प्रकल्पों की स्थापना के साथ-साथ स्टार्ट-अपों की स्थापना हेतु प्रयासरत युवाओं को मार्गदर्शन के साथ आवश्यक हरसंभव सहयोग प्रदान करने हेतु मैं आह्वान करता रहा हूं। अभियान के अंतर्गत 2028 तक बिहार के हर जिले में कम से कम पांच ऐसे सफल स्टार्ट-अप्स की स्थापना का लक्ष्य है जिनमें कम से कम 100 व्यक्तियों को रोजगार मिलता हो । इस लक्ष्य की पूर्ति हेतु हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। केवल 5 ऐसे स्टार्ट-अप स्थापित करने से बिहार तुरंत नहीं बदलेगा परंतु निश्चित ही एक बदलते बिहार का बीजारोपण हम कर देंगे जो धीरे-धीरे एक ऐसे वट वृक्ष का स्वरूप ग्रहण करेगा, जो 2047 तक वांछित लक्ष्य तक निश्चित हमें पहुंचा देगा।" मैंने तब उनसे कहा कि अभियान के अंतर्गत 2028 तक बिहार के हर पंचायत में अध्याय स्थापित करते हुए हर ग्राम-नगर के जन-जन तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित है जिसमें हर व्यक्ति से सकारात्मक योगदान की अपेक्षा है। मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि भले ही हमारी सामुहिक यात्रा दीर्घकालिक होगी परंतु 2047 तक विकसित भारत में एक विकसित बिहार का निर्माण अवश्य करेगी।

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