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लोजपा में रार: चिराग के हाथ से फिसली बागडोर, चाचा पशुपति होंगे लोकसभा में पार्टी के नेता
Mon, 14 Jun 2021 10:10 PM IST
दीप्ति मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Mon, 14 Jun 2021 10:10 PM IST
सार
पार्टी में चल रही उठापटक के बीच सोमवार को पशुपति पारस ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि उन्होंने पार्टी को तोड़ा नहीं बचाया है। साथ ही कहा कि उन्हें चिराग पासवान से कोई नाराजगी नहीं है, अगर वे चाहें तो पार्टी में रह सकते हैं।
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लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को समर्थन पत्र सौंपते लोजपा के बागी सांसद और पशुपति पारस
- फोटो : Social Media
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विस्तार
बिहार के पासवान कुनबा में हाई वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है। दिवंगत दिग्गज नेता रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) टूट गई है। लोजपा के पांचों बागी सांसदों ने मिलकर चिराग पासवान को पार्टी के संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया है और उनके बागी चाचा पशुपति पारस पासवान को नया नेता चुना है। लोकसभा स्पीकर ने भी इस पर मुहर लगा दी है।
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इससे पहले बागी चाचा पशुपति पारस को मनाने उनके घर पहुंचे चिराग पासवान को एक घंटे के इंतजार के बाद बिना मिले ही लौटना पड़ा। आज दोपहर तीन बजे लोजपा के पांचों बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले थे और उन्हें समर्थन पत्र सौंपा था, जिसमें पत्र में पार्टी ने अपना नया नेता चुनने की बात कही थी।
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सोमवार सुबह चिराग पासवान अपने बागी चाचा पशुपति पारस को मनाने उनके घर पहुंचे थे, लेकिन भतीजे के आने से पहले ही चाचा घर से निकल गए। चाचा-भतीजे के रिश्ते में दूरियां इतनी बढ़ गईं कि चाचा पारस के घर का दरवाजा भी उनके लिए नहीं खुला। चिराग पासवान बाहर ही अपनी गाड़ी में बैठकर करीब 20 मिनट तक इंतजार करते रहे। उसके बाद घर का दरवाजा खोला गया। घर में एक घंटे तक इंतजार करने के बाद भी चिराग पासवान को चाचा से बिना मिले ही लौटना पड़ा।
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पारस को चुना संसदीय दल का नेता
लोजपा में बगावत करने वाले पांच सांसदों की ओर से लोकसभा अध्यक्ष सौंपे गए समर्थन पत्र में बताया गया है कि वे पशुपति कुमार पारस को अपना नेता चुनते हैं। अब से पशुपति कुमार पारस लोजपा के लोकसभा संसदीय दल के नेता होंगे। वहीं महबूब अली कैसर लोकसभा संसदीय दल के उपनेता होंगे। सूरजभान सिंह भाई और नवादा से सांसद चंदन सिंह लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक होंगे।
इससे पहले, पार्टी में चल रही उठापटक के बीच सोमवार को पशुपति पारस ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि उन्होंने पार्टी को तोड़ा नहीं बचाया है। साथ ही कहा कि उन्हें चिराग पासवान से कोई नाराजगी नहीं है, अगर वे चाहें तो पार्टी में रह सकते हैं।
लोक जनशक्ति पार्टी में टूट हो गई है। इसे लेकर पशुपति पारस ने सोमवार को कहा कि हमारे भाई चले गए, हम बहुत अकेला महसूस कर रहे हैं। भाई के जाने के बाद पार्टी की बागडोर जिनके हाथ में गई, तब सभी को उम्मीद थी कि वर्ष 2014 की तरह इस बार भी हम एनडीए के साथ बने रहें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोक जनशक्ति पार्टी बिखर रही थी, असमाजिक तत्व आ रहे थे, एनडीए से गठबंधन को तोड़ दिया और कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी गई।
पारस बोले- चिराग चाहें तो पार्टी में रह सकते हैं
पशुपति पारस ने कहा, ''हमारी पार्टी के पांच सांसदों की इच्छा थी कि पार्टी को बचाना जरूरी है। मैंने पार्टी तोड़ी नहीं है, पार्टी को बचाया है। जब तक मैं जिंदा हूं, पार्टी को जिंदा रखूंगा। चिराग पासवान मेरे भतीजे हैं। मुझे चिराग पासवान से कोई दिक्कत नहीं है। अभी भी वास्तविक पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी ही है। अभी तक चिराग पासवान ही पार्टी के अध्यक्ष हैं, लेकिन अब वे चाहें तो आगे भी पार्टी में रह सकते हैं। हमें उनसे कोई शिकायत नहीं।''
जनता दल (यू) में शामिल होने की बात पर पशुपति पारस ने कहा कि वे शुरुआत से एनडीए के साथ रहे हैं और आगे भी एनडीए के साथ ही रहेंगे। पशुपति पारस ने कहा कि वह नीतीश कुमार को एक अच्छा नेता मानते हैं, वह विकास पुरुष हैं।
बता दें कि चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने बीते दिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिख कर पांचों सांसदों को अलग मान्यता देने की मांग की थी। साथ ही खुद को पार्टी का नेता बताया गया। पशुपति पारस का कहना है कि वह स्पीकर के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
जनता दल (यू) में शामिल होने की बात पर पशुपति पारस ने कहा कि वे शुरुआत से एनडीए के साथ रहे हैं और आगे भी एनडीए के साथ ही रहेंगे। पशुपति पारस ने कहा कि वह नीतीश कुमार को एक अच्छा नेता मानते हैं, वह विकास पुरुष हैं।
बता दें कि चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने बीते दिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिख कर पांचों सांसदों को अलग मान्यता देने की मांग की थी। साथ ही खुद को पार्टी का नेता बताया गया। पशुपति पारस का कहना है कि वह स्पीकर के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।