Bihar: पटना एम्स में एनआरपी दिवस का बड़ा आयोजन, 18 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को मिला नवजात देखभाल प्रशिक्षण
पटना के एम्स पटना में आयोजित एनआरपी दिवस पर 18 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। UNICEF समर्थित इस अभियान का लक्ष्य 2030 तक नवजात मृत्यु दर को कम करना है।
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पटना स्थित एम्स में रविवार को राष्ट्रीय नवजात जीवनरक्षक कौशल (एनआरपी) दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर से स्वास्थ्यकर्मी, डॉक्टर, नवजात विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी शामिल हुए। यह अभियान राष्ट्रीय नवजात विज्ञान मंच की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, बिहार सरकार, UNICEF, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, फॉग्सी और टीएनएआई का सहयोग रहा। कार्यक्रम का आयोजन भारत में नवजात पुनर्जीवन प्रशिक्षण के 35 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया।
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि एक ही दिन में 18 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशुओं की जान बचाने से जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। आयोजकों ने इसे नवजात देखभाल के क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े क्षमता-विकास अभियानों में से एक बताया। इस उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने का भी प्रस्ताव है।
कार्यक्रम भारत के न्यूबॉर्न एक्शन प्लान (आईएनएपी) के तहत आयोजित किया गया, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक नवजात मृत्यु दर को एकल अंक तक लाना है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और राष्ट्रीय गीत के साथ हुई, जबकि समापन राष्ट्रगान से किया गया।
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मुख्य अतिथि सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि हर मां और नवजात तक समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए रेफरल और स्टेबलाइजेशन सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी नवजात मृत्यु दर कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। साथ ही ‘कंगारू मदर केयर’ और डब्ल्यूएचओ मानकों के अनुसार बेहतर नवजात देखभाल अपनाने पर जोर दिया। UNICEF बिहार की चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस मोनिका नील्सन ने कहा कि जन्म के बाद का “फर्स्ट गोल्डन मिनट” नवजात के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान सही और प्रशिक्षित हस्तक्षेप से बच्चे की जान बचाई जा सकती है।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि बिहार में नवजात मृत्यु दर कम करने के लिए लगातार प्रशिक्षण, जनस्वास्थ्य प्रयास और मजबूत संस्थागत सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित अभ्यास और ट्रेनिंग मिलती रहनी चाहिए ताकि वे हर आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपट सकें।
कार्यक्रम में यूनिसेफ इंडिया के डॉ. विवेक ने कहा कि केवल अस्पताल और भवन बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जन्म के तुरंत बाद सही इलाज और प्रशिक्षित स्टाफ ही नवजात शिशुओं की जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। एनएनएफ के अध्यक्ष डॉ. ललन के. भारती ने कहा कि नवजात जीवनरक्षक कौशल, कंगारू मदर केयर और केवल स्तनपान जैसी सरल पहलें नवजात मृत्यु दर को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
मंच पर एम्स पटना के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. (डॉ.) अनुप कुमार, डीन प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, यूनिसेफ बिहार के हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. एस.एस. रेड्डी और एनएनएफ इंडिया की डॉ. सारण्या मणिकराज भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम का समापन नियोनेटोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. भबेश कांत चौधरी के धन्यवाद ज्ञापन और स्वास्थ्यकर्मियों के संवाद सत्र के साथ हुआ।