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बिहार: 1958 अपंजीकृत मंदिरों के लिए नोडल अधिकारी होंगे नियुक्त, भारी अनियमितता के बाद फैसला

Sat, 12 Mar 2022 04:59 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Amit Mandal Updated Sat, 12 Mar 2022 04:59 PM IST
सार

राज्य सरकार राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद मंदिरों के परिसर में स्कूल और अस्पताल खोलने पर भी विचार कर सकती है।

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Bihar govt directs districts to appoint nodal officers for over 1,900 unregistered temples
सीएम नीतीश कुमार - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पुजारियों द्वारा संपत्ति के लेन-देन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के मद्देनजर बिहार सरकार ने 21 जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों को 1,958 अपंजीकृत मंदिरों के कामकाज के प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है। इन मंदिरों की 2,973 एकड़ भूमि, जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये है, उनका राजस्व रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। बिहार के कानून मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि संपत्तियों को अनधिकृत दावों से बचाने के लिए निर्णय लिया गया है क्योंकि ऐसे मंदिरों/मठों के पुजारियों द्वारा अचल संपत्ति बेचने और खरीदने में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गई हैं।

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उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि केयरटेकर हमारे पूर्वजों द्वारा मंदिरों के लिए दान की गई संपत्तियों को बेच रहे हैं। मंत्री ने कहा कि हम धार्मिक संपत्तियों की रक्षा के लिए कानून को मजबूत करना चाहते हैं ताकि उनका बेहतर रखरखाव और सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग किया जा सके। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद जो अतिरिक्त कलेक्टर रैंक के नौकरशाह होंगे, वे अपंजीकृत मंदिर बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद (BSRTC) की सीधी निगरानी में कार्य करेंगे। बिहार हिंदू धार्मिक ट्रस्ट अधिनियम 1950 के अनुसार, राज्य के सभी सार्वजनिक मंदिरों को बीएसआरटीसी के साथ पंजीकृत होना चाहिए।
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प्रमोद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद मंदिरों के परिसर में स्कूल और अस्पताल खोलने पर भी विचार कर सकती है। हमें अब तक 21 जिलों के कलेक्टरों से ऐसे मंदिरों के बारे में विवरण प्राप्त हुआ है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अपंजीकृत मंदिरों/मठों की सबसे अधिक वैशाली (438), उसके बाद कैमूर (307) और पश्चिम चंपारण (273) में हैं। मंत्री ने कहा कि औरंगाबाद एकमात्र जिला है जहां एक भी अपंजीकृत मंदिर नहीं है।

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