बिहार चुनाव: लोजपा और आरजेडी ने नीतीश पर साधा निशाना, तेजस्वी ने दी अपने दम पर चुनाव लड़ने की चुनौती
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बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीतिक पार्टियों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अलग-अलग राजनीतिक दल आगामी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इसके साथ ही पक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग भी तेज हो चुकी है।
राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के दो घटक दलों में बढ़ती दूरियों के बीच एक तरफ जहां लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की तरफ से लगातार नीतीश सरकार की आलोचना की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टी आरजेडी भी सरकार को घेरने में लगी हुई है।
मंगलवार को लोजपा ने कहा कि जद(यू) ने यह साफ कर एक एहसान किया कि दोनों दलों में कभी गठबंधन नहीं था। लोजपा ने एक बयान में कहा, 'हम जनता दल (युनाइटेड) के इस बयान का स्वागत करते हैं कि उनका कभी लोजपा के साथ कोई गठबंधन नहीं रहा।' बयान में कहा गया कि पार्टी सिर्फ उन लोगों से हाथ मिलाएगी जो बिहार को देश का अग्रणी राज्य बनाने के पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान के एजेंडे का समर्थन करेंगे।
गौरतलब है कि केसी त्यागी ने मंगलवार को कहा था कि कोई भी दल जो राज्य में राजग का घटक है उसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करना होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेता यह घोषणा कर चुके हैं कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जद(यू) का हमेशा से बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन रहा है लेकिन लोजपा के साथ नहीं।
जद(यू) की तरफ से यह बयान तब आया है जब लोजपा ने पासवान को यह तय करने के लिए अधिकृत किया है कि कुमार के नेतृत्व वाले जद(यू) के खिलाफ आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना है या नहीं।
नीतीश अकेले अपने बलबूते पर चुनाव लड़ें तो दहाई अंक में भी सीट नहीं मिलेगी
उधर राज्य की विपक्षी पार्टी आरजेडी की तरफ से तेजस्वी यादव भी नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। लालू प्रसाद पर राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से तीखा प्रहार करने पर तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर पलटवार किया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को कहा कि जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के अध्यक्ष की पार्टी अपने बलबूते चुनाव में उतरती है तो उनका प्रभावी चेहरा उन्हें दहाई अंक में भी सीट नहीं दिला सकता।
पिछली महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके तेजस्वी ने कहा कि 1995 के विधानसभा चुनाव में उनकी समता पार्टी को महज सात सीटें मिली थीं और 2014 में जब जदयू, भाकपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ी तो वह महज दो सीट हासिल कर पाई।
यादव ने नीतीश पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, ‘यदि वह अपने पूरे जीवन में अपने बलबूते (चुनाव) लड़ते तो उनका प्रतापी चेहरा उन्हें दहाई अंक में भी सीटें नहीं जीता सकता। यह मेरा दावा और चुनौती है।’
उल्लेखनीय है कि नीतीश ने सोमवार को जदयू की डिजिटल रैली में लालू प्रसाद और उनके परिवार पर करार प्रहार किया था और 15 साल के ‘पति-पत्नी राज (लालू-राबड़ी शासन) एवं अपने शासन के बीच विकास की गति को लेकर तुलनात्मक आंकड़े पेश किए थे।
तेजस्वी यादव पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने जीवन में बिना कोई काम किए बहुत पैसा बना लिया है। उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे (तेजस्वी से) पूछा कि वह लोगों के सामने बताएं कि पैसा कहां से आया लेकिन वह ऐसा करने की स्थिति में नहीं थे। इसलिए मैंने उससे (राजद से) अलग होने का निर्णय लिया।’
वहीं वरिष्ठ जदयू नेता और सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह ने भी तेजस्वी पर पलटवार किया और सवाल किया कि 2010 के चुनाव में जब राजद 22 पर सिमट गया तब किसके नाम पर वोट मांगा गया था।