बिहार का रणः दूसरे चरण में महागठबंधन के सामने बड़ी चुनौती
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दूसरे चरण में जिन 94 सीटों पर मतदान होने हैं वहां की लड़ाई बेहद दिलचस्प होने वाली है। 2015 के चुनाव में इन 94 सीटों में से 10 सीटें भाजपा ने जदयू से छीन ली थी। तब इन्हीं 94 सीटों में से 13 सीटें जदयू ने भाजपा से छीनी थी। अब भाजपा और जदयू साथ-साथ हैं। तीन नवंबर को दूसरे चरण के लिए मतदान होना है। पिछले चुनाव में दूसरे चरण की इन्हीं सीटों में से सबसे ज्यादा 33 सीटों पर राजद की जीत हुई थी। जदयू ने तब 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी और भाजपा ने 20। कांग्रेस ने 7 सीटें जीतीं तो लोजपा ने दो और भाकपा माले ने एक। कांटी सीट पर निर्दलीय की जीत हुई थी।
भाजपा-जदयू गठबंधन व लोजपा के चलते नया समीकरण
पिछले चुनाव में राजद, कांग्रेस और जदयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था। तीनों दलों ने एक-दूसरे को अपना-अपना वोट बैंक ट्रांसफर करवाने में सफलता भी पाई थी। इस बार स्थितियां उलट हैं। जदयू और भाजपा मिलकर मैदान में हैं। नीतीश कुमार का वोटबैंक इस बार महागठबंधन के खिलाफ खड़ा दिख रहा है और राजद का वोटबैंक जदयू के खिलाफ। बीच में लोजपा ने भी नया समीकरण ला दिया है।
2015 से 2020 में बदली तस्वीर
पिछले चुनाव में 23 सीटों पर भाजपा और जदयू के बीट कांटे की टक्कर थी। इनमें 13 सीटें जदयू को, तो 10 सीटें भाजपा के पास आई थीं। इस बार भाजपा-जदयू गठबंधन से इन 23 सीटों पर राजद को चुनौती मिलने वाली है। 2015 में जदयू ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम से सीधा मुकाबले में 5 सीटें जीती थीं। इस बार हम ने जदयू से गठबंधन किया है। जदयू को इसका भी फायदा मिल सकता है। जाहिर है दूसरे चरण का चुनाव महागठबंधन के लिए चुनौतियों भरा होगा। इसका अंदाजा महागठबंधन में शामिल राजद, कांग्रेस और वाम दलों को है। टिकट बंटवारे में देरी की एक वजह यह भी है।
इन जिलों की 94 सीटें
पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, नालंदा और पटना की 94 सीटों पर मतदान होना है।