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बिहार में सीएम पद पर तकरार, जानिए कितने दावेदार

Thu, 25 Jun 2015 06:10 PM IST
Updated Thu, 25 Jun 2015 06:10 PM IST
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bihar election 2015, alliance put pressure on bjp

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले ही एनडीए नई मुसीबत में घिरता दिख रहा है। एक ओर जहां विपक्ष उसे मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने की चुनौती दे रहा है वहीं उसके सहयोगियों ने अपनी-अपनी तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार खड़े कर उसे उलझन में डाल दिया है।

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भाजपा की बड़ी समस्या ये है कि विधानसभा चुनावों में वह बिना मुख्यमंत्री उम्मीदवार के ही मैदान में उतरने की तैयारी कर रही थी, क्योंकि दिल्ली में मुख्यमंत्री पद का दावेदार खड़ा कर भाजपा पहले ही अपने हाथ जला चुकी है ऐसे में वह दोबारा ऐसा कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहती।
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जबकि बिना सीएम उम्मीदवार के चुनाव में उतरने पर पार्टी हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में झंडे फहरा चुकी है। ऐसे में भाजपा बिहार में भी मोदी के नाम के सहारे ही अपनी नैया पार करने की जुगत भिड़ा रही थी लेकिन पहले विपक्ष और अब उसके सहयोगी उसकी रणनीति फेल करते दिख रहे हैं।

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दिल्‍ली चुनावों की गलती नहीं दोहराना चाहती भाजपा

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पिछले सालभर के विधानसभा चुनावों में लगभग सभी जगह शानदार प्रदर्शन करने वाली भाजपा के लिए दिल्‍ली के बाद बिहार चुनाव दूसरा सिरदर्द साबित होते दिख रहे हैं। दिल्‍ली में जहां पूरा जोर लगाने के बाद भी पार्टी अरविंद केजरीवाल के सामने चारों खाने चित हो गई थी वहीं बिहार में उसके लिए जनता परिवार बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।

दो धुर विरोधियों लालू यादव और नीतीश कुमार के एक मंच पर आने के बाद भाजपा के लिए हालात और मुश्किल हो गए हैं। जनता परिवार के सीएम उम्‍मीदवार के तौर पर नीतीश के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के सामने भी अपना मुख्यमंत्री पद का उम्‍मीदवार खड़ा करने का दबाव बढ़ गया है।

लेकिन पुराने अनुभवों को देखते हुए इस बात की संभावना कम ही है कि भाजपा चुनाव से पहले अपना सीएम उम्मीदवार खड़ा करे। क्योंकि ‌ऐसा कर पार्टी दिल्‍ली में मुंह की खा चुकी है, इसलिए भाजपा किसी भी सूरत में उस गलती को दोबारा नहीं दोहराना चाहती।

नीतीश ने दी सीएम उम्‍मीदवार घोषित करने की चुनौती

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भाजपा की एक दिक्‍कत और भी है कि चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में बेशक उसके सबसे बड़ी पार्टी बनने की संभावना जताई जा रही है लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे पर नीतीश कुमार आज भी बिहार के लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। इसलिए भाजपा नहीं चाहती कि ये मामला नीतीश बनाम अन्य बन जाए।

पार्टी नीतीश के मुकाबले चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके विकास के एजेंडे को ही सामने रखकर चुनाव लड़ना चाहती है। सबसे ज्यादा सीटें आने पर बाद में सीएम का नाम तय कर लिया जाएगा।

भाजपा बिहार की लड़ाई को लालू के जंगलराज और नीतीश से उनकी दोस्ती के तौर पर ही प्रचारित करना चाहती है, क्योंकि नीतीश की विकासवादी छवि को तोड़ने के लिए उसके पास एकमात्र यही विकल्प है।

पासवान और कुशवाहा को उम्‍मीदवार बनवाना चाहती हैं उनकी पार्टी

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लेकिन भाजपा को असली परेशानी विरोधियों से नहीं अपने सहयोगियों से है। बिहार में उसकी बड़ी सहयोगी और केन्द्र में मंत्री पद पाने वाले उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय समता पार्टी बार बार उपेन्द्र को ही मुख्यमंत्री पद का उम्‍मीदवार घोषित करने की मांग कर रही है।

पार्टी के प्रदेश प्रवक्‍ता अरुण स‌िंह ने जल्द से जल्द कुशवाहा को एनडीए का सीएम उम्‍मीवार बनाने की मांग की। कुशवाहा ने भी पार्टी की हां में हां मिलाते हुए सभी जिम्मेदारियों को संभालने की बात कह दी।

दिक्‍कत यही होती तो कुशवाहा को मनाना कोई मुश्किल काम नहीं था लकिन अब बिहार की दूसरी बड़ी सहयोगी राम विलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी ने भी पासवान को सीएम उम्‍मीदवार बनाने की मुहिम छेड़ रखी है।

पार्टी चाहती है कि बिहार में नीतीश कुमार जैसे पिछड़े चेहरे के तौर पर पासवान जैसे दलित चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ा जाए। लेकिन भाजपा इस मांग पर राजी होती नहीं दिख रही है।

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