CRPF हमलाः जवानों की मदद को समय पर नहीं पहुंचा था हेलीकॉप्टर
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बिहार के औरंगाबाद में सीआरपीएफ जवानों पर हुए नक्सली हमले में शहीद हुए दस जवानों में से पांच को अगर समय रहते उपचार मिल जाता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। लेकिन हमले के तुरंत बाद सीआरपीएफ का हेलीकॉप्टर घटनास्थल पर न पहुंच पाने के कारण घायल जवानों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल सका जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई।
इसको लेकर सीआरपीएफ के जवानों और अधिकारियों में नाराजगी भी देखी जा रही है। मीडिया में आए कुछ वीडियो में तो जवान और एक कमांडेंट सीआरपीएफ आईजी के सामने इसको लेकर हंगामा करते भी दिख रहे हैं। हालांकि सीआरपीएफ का दावा है कि हेलीकॉप्टर समय रहते ही पहुंच गया था लेकिन जवान हेलीकॉप्टर के पास नहीं पहुंच पाए जिसकी वजह से वह वापस लौट गया।
बता दें कि बिहार के औरंगाबाद में सोमवार को सीआरपीएफ और जिला पुलिस को सूचना मिली थी कि जंगलों में भारी संख्या में नक्सली कमांडर इकट्ठा हो रहे हैं। इस सूचना पर सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन और जिला पुलिस का दस्ता उनकी तलाश में जंगलों में निकल गया था।
नक्सल हमले में शहीद हुए थे दस जवान
दोपहर दो बजे के करीब जब जवान डुमरी नाला से आगे सोनहादा जंगली इलाके में पहुंचे, तो जंगल की ओर से फायरिंग होने लगी। संयुक्त अभियान में रहे सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभालकर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। संयुक्त अभियान में रहे सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभालकर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
दोनों ओर से करीब एक घंटे तक सैंकड़ो राउंड गोली चली। इसी बीच नक्सलियों ने माइन ब्लास्ट कर दिया जिसमें कई जवानों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान तीन नक्सली भी मारे गए।
इतने खतरनाक हमले के बाद भी सीआरपीएफ जवानों ने नक्सलियों का डटकर मुकाबला किया जिसके चलते उनके पैर उखड़ गए और वो भाग निकले। जवानों ने हमले की सूचना तुंरत सीआरपीएफ अधिकारियों को दी।
बताया जाता है कि सूचना मिलने के बाद भी सीआरपीएफ का हेलीकॉप्टर मौके पर नहीं पहुंच सका था, इसके चलते पांच और जवानों ने उपचार न मिलने के कारण दम तोड़ दिया था। बताया जाता है कि जवानों के शव दस घंटे तक मौके पर पड़े रहे और उनके साथी हेलीकॉप्टर का इंतजार करते रहे।
बाद में एंबुलेंस की मदद से घायलों और शवों को अस्पताल पहुंचाया गया। देर से राहत मिलने के कारण जवानों का आक्रोश फूट पड़ा।
मीडिया में आए कुछ वीडियो में तो एक कमांडेंट और जवान बाद में हेलीकॉप्टर लेकर पहुंचे आईजी से ही भिड़ते दिख रहे हैं। उन्होंने आईजी के सामने ही कहा कि "अब हमें हेलीकॉप्टर की क्या जरूरत है जब हमें इसकी नीड थी तब हमें यह मिला नहीं।"
हालांकि आईजी का कहना था कि दो बजे सूचना मिलते ही तीन बजे के करीब सीआरपीएफ का हेलीकाप्टर निर्धारित जगह पर पहुंच गया था, लेकिन जब तक जवान वहां नहीं पहुंच सके थे जिसके बाद वह वापस लौट आया। उन्होंने तमाम आरोपों को निराधार बताया।