बिहार: बाढ़ की स्थिति पर मुख्य सचिव ने की समीक्षा, 9 अक्तूबर को डीबीटी से मिलेगी जीआर राशि
बिहार में बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने समीक्षा की। छह राहत शिविरों में 3,550 लोगों की व्यवस्था है। 100 सामुदायिक रसोई में 1.40 लाख लोगों को भोजन कराया गया। 221 नावें संचालित हैं।
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आपदा प्रबंधन विभाग में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में राज्य के बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सुपौल और सहरसा के जिला पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल भी बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान संबंधित जिलों में बाढ़ की वर्तमान स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य, तटबंधों की स्थिति, बाढ़ राहत शिविरों का संचालन, सामुदायिक रसोई, नावों के परिचालन और राहत सामग्री के वितरण की विस्तृत समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में बाढ़ की स्थिति और प्रशासन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों की अद्यतन जानकारी मुख्य सचिव को दी।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करे। उन्होंने तटबंधों की लगातार निगरानी करने और संवेदनशील स्थलों पर आवश्यक सतर्कता बरतने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
9 अक्टूबर को जीआर राशि का होगा वितरण
बैठक में बाढ़ प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली जीआर (ग्रैच्युटस रिलीफ) राशि के वितरण की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को बताया गया कि मुख्यमंत्री की ओर से डीबीटी के माध्यम से 9 अक्टूबर को जीआर की राशि का अंतरण किया जाएगा। इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने और पात्र लाभुकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
राहत शिविर और सामुदायिक रसोई के संचालन पर जोर
बैठक में बाढ़ राहत शिविरों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में छह राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 3,550 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन, पेयजल, स्वच्छता और अन्य जरूरी सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएं। सामुदायिक रसोई का संचालन सुचारू रूप से सुनिश्चित करने और जरूरतमंद लोगों को समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
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बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कुल 100 सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से अब तक 1.40 लाख लोगों को भोजन कराया गया है। मुख्य सचिव ने इस संख्या को आवश्यकता के अनुसार अधिक से अधिक बढ़ाने के निर्देश दिए।
221 नावों का हो रहा परिचालन
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत कार्यों के लिए नावों के परिचालन की भी समीक्षा की गई। आबादी के निष्क्रमण और आवागमन को सुगम बनाने के लिए कुल 221 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आवश्यकता वाले क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नावों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रभावित लोगों को आवागमन में कठिनाई न हो और राहत एवं बचाव कार्यों में बाधा न आए।
इसके साथ ही पॉलीथिन शीट, ड्राई राशन पैकेट और पशुचारे के वितरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत एवं बचाव कार्य के लिए 2,400 से अधिक ड्राई राशन पैकेट और 10,400 पॉलीथिन शीट वितरित की जा चुकी हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों और पशुपालकों की आवश्यकता के अनुसार राहत सामग्री एवं पशुचारे का वितरण सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखें और जिला स्तर पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करें। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित समीक्षा करने, आवश्यकता के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जा रही सभी आवश्यक सेवाओं की सतत निगरानी बनाए रखने का निर्देश दिया।