Bihar Caste Census 1 : श्रीवास्तव, लाला या लाल बताई जाति तो कायस्थ नहीं बचेंगे, कहलाएंगे...
Caste Code in Bihar : 15 अप्रैल से जनगणना कर्मी आएंगे तो बिहार की अगड़ी जाति में शुमार कायस्थ जाति के लोगों को संभलकर जानकारी देनी होगी। थोड़ी-सी लापरवाही की कि जाति से बाहर हो जाएंगे। क्यों-कैसे...पढ़िए-
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केंद्र सरकार नहीं मानी तो बिहार सरकार ने अपने पैसे से जाति जनगणना कराने का न केवल फैसला लिया, बल्कि इसका पहला चरण पूरा करा लिया। अब अगला चरण 15 अप्रैल से शुरू हो रहा है। पहले चरण में मकान गिने गए थे। असली जातिगत जनगणना अब शुरू होने वाली है। इसके लिए जनगणना कर्मियों को जाति का कोड बांटकर दिया गया है। 15 अप्रैल से जनगणना कर्मी आएंगे तो बिहार की अगड़ी जाति में शुमार कायस्थ जाति के लोगों को संभलकर जानकारी देनी होगी। थोड़ी-सी लापरवाही की कि जाति से बाहर हो जाएंगे। क्यों-कैसे...पढ़िए-
उपजाति और टाइटल का फेर फंसा
संकट जनगणना कर्मियों को जातियों का कोड विवरण जारी किए जाने के बाद सामने आया है। हुआ यह है कि जारी कोड में एक तो कायस्थ जाति के लिए जारी किया गया है, लेकिन दूसरी जगह एक कोड के तहत हिंदू धर्म के दर्जी के उपनाम के रूप में श्रीवास्तव/ लाला/ लाल/ दर्जी प्रकाशित कर जनगणना कर्मियों को दिया गया है। जनगणना कर्मी भी संशय में हैं कि अगर क्षेत्र में आंकड़ा संग्रह के दौरान लोगों ने आपत्ति की तो क्या होगा?
उपजाति और टाइटल को जाति बताने पर सवाल
बिहार में कायस्थ जाति फॉरवर्ड में तो है ही, शहरी लोकसभा-विधानसभा सीटों पर इनका प्रभाव भी दिखता है। चाणक्या इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के निदेशक सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं कि "कलम-दावात की पूजा करने वाले कायस्थ जाति का बिहार के निर्माण में बड़ा योगदान रहा है। कायस्थों में 12 उप-जातियां हैं। 'श्रीवास्तव' कायस्थों की एक उप-जाति है। उत्तर प्रदेश और इससे सटे बिहार में इस उप-जाति के कायस्थ सबसे ज्यादा संख्या में हैं। इसके अलावा कायस्थों को 'लाला' भी कहा जाता है। लाला का अर्थ हिसाब-किताब संभालने वाले के रूप में लगाया जाता है। कहीं-कहीं कायस्थों के लिए यह प्रमुख टाइटल भी है। इसी तरह 'लाल' भी टाइटल है।"
सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही सरकार
जातिगत जनगणना के लिए 214 जातियों का कोड जारी किया गया है। इन जातियों का कोड जारी किए जाने के बाद से सोशल मीडिया पर यह चर्चा का विषय है। जातियों के लिए कोड निर्धारित किए जाने में ऐसी ही गड़बड़ी को लेकर लोग सरकार को ट्रोल भी कर रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि सरकार हिंदू रीत-रिवाज और परंपरा से उलट नई-नई भ्रांतियां फैला रही है। लोग इसे साजिश बताकर पोस्ट भी शेयर कर रहे हैं।
जाति जनगणना पर सवाल उठाता रहा है यह वर्ग
बिहार में जातिगत जनगणना की बात जब से उठी, तभी से इस जाति के लोग विराेध कर रहे हैं। पढ़ने-लिखने की उम्र में इसे जातिगत दलदल में धकेलने की बात कहकर विरोध जताया जाता रहा। अब सरकार की ओर विकल्पहीन होने के बाद जब जाति जनगणना शुरू हो रही है तो मशहूर साहित्यकार शिवदयाल कहते हैं कि "आजादी के 75 साल बाद बिहार को करीब 90 साल पीछे धकेलने की कोशिश होनी ही नहीं चाहिए थी। नीति-निर्धारक ही ऐसा कर रहे हैं तो जनता मानने के लिए मजबूर है। और, जब ऐसा कर रहे हों तो आननफानन में कुछ भी नहीं कर देना चाहिए। जातिवार गिनना है तो उपनामों का इस तरह उपयोग कर भ्रांति नहीं फैलानी चाहिए।"