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सीएजी की रिपोर्ट में बिहार के महाघोटाला का खुलासा, शहरी विकास के नाम पर डकारे अरबों रुपये

Tue, 27 Nov 2018 07:36 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Updated Tue, 27 Nov 2018 07:36 PM IST
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bihar CAG report reveals billions of rupees scam in the name of urban development
nitish kumar

बिहार में एक और महाघोटाला उजागर हुआ है। महालेखाकार कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में इस घोटाले का पर्दाफाश किया है। महालेखाकार (सीएजी) ने अब तक पांच निरीक्षण रिपोर्ट्स में बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) के भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सौंपी है। इसमें 13 अरब से अधिक के वित्तीय अनियमितता का लेखा जोखा दिया गया है। बिहार में घोटाले का खुलासा होने पर सूबे की नीतीश सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव ने कहा कि घोटालों की सरकार है बिहार में बहार है। 

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बुडको यानि बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम की इस गड़बड़ी का खुलासा सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है और यह अनियमितता करीब 13 अरब से अधिक का है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बुडको की स्थापना 2009 में हुई थी तब से लेकर जून 2017 के बीच भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।
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सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कई बार इन गड़बड़ियों पर आपत्तियां उठाई हैं। बावजूद इसके बुडको ने इसका जवाब तक देना उचित नहीं समझा है। बुडको की स्थापना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर 16 जून 2009 को की गई थी। 1956 की कम्पनी एक्ट के तहत बुडको के गठन का उद्देश्य शहरी विकास को गति देना था। लेकिन शहरी लोगों को तेजी से विकास करने के सपने दिखाकर सरकार के पैसे का पिछले आठ सालों से बंदरबाट किया जाता रहा।
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घोटालों की सरकार है, बिहार में बहार है

13 अरब रुपये की गड़बड़ी सामने आने पर विपक्ष ने बिहार सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।  पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘घोटालों की सरकार है, बिहार में बहार है’। कांग्रेस ने कहा कि हर विभाग में एक बड़ा घोटाला छिपा हुआ है। जबकि जेडीयू ने मामले पर सरकार का बचाव करते हुए कहा कि अगर गड़बड़ी हुई तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।  वहीं बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि देश के सबसे बड़ा घोटालेबाज लालू यादव हैं, जो इनदिनों जेल में बंद हैं।

तेजस्वी यादव ने इस बड़े घोटाले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बिहार में घोटालों की बहार आ गई है। वहीं दूसरी तरफ सीबीआई की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में है। ऐसे में हमारा दल मांग करता है कि बिहार विधानसभा की कमेटी बनाई जाए जो बुडको घोटाला मामले के साथ-साथ दूसरे घोटालों की भी जांच करवाई जाए। 

वहीं कांग्रेस विधायक कांग्रेस विधायक शकील खान ने कहा कि बिहार में हर विभाग में घोटाला हो रहा है। जबकि विपक्ष के हमले के बीच जेडीयू प्रवक्ता कृष्णनंदन वर्मा ने बिहार सरकार का बचाव करते हुए कहा अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई होगी तो किसी को भी बख़्शा नहीं जाएगा और इसकी जांच कराई जाएगी। वहीं भाजपा से मंत्री मंगल पांडे ने तेजस्वी पर लालू प्रसाद का नाम लेकर घेरने की कोशिश की है, उन्होंने कहा कि देश के सबसे बड़े घोटालेबाज लालू यादव हैं, जो रांची जेल में कोई स्वतंत्रता आंदोलन में बंद नहीं हैं। 

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क्या है पूरा घोटाला
महालेखाकार कार्यालय, पटना की ऑडिट रिपोर्ट में बुडको के भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। सीएजी ने अब तक के पांच निरीक्षण रिपोर्ट्स में बुडको के भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सौंपी है। जिसमें 13 अरब से अधिक के वित्तीय अनियमितता उजागर की बात कही गई है। आपको बता दें कि सीएजी ने सबसे पहले साल 2011-12 में बुडको का ऑडिट किया था। फिर वर्ष 2013-14 और 2015-16, 2016-17 और 2017-18 का ऑडिट किया। इन सभी ऑडिट में सीएजी ने बुडको के भ्रष्टाचार को पकड़ा और अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सौंपी।

पहले ऑडिट में ही की थी गड़बड़ी की बात
लगातार चल रही अनियमितताओं के बीच आरटीआी कार्यकर्ता ने इस बाबत लिखित शिकायत भी की थी लेकिन सरकार की कान पर जूं तक नहीं रेंगी। और कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं सीएजी ने पहले तीन ऑडिट में ही 10 अरब 50 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितता पकड़ ली थी।

सरकार को जानकारी देने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरटीआई कार्यकर्ता ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल को 19 सितम्बर 2016 को कारवाई के लिए लिखित शिकायत भी की लेकिन कोई जांच नहीं कराई गई। सीएजी ने 2016-17 और 2017-18 के दो ऑडिट रिपोर्ट में और दो अरब 52 करोड़ से अधिक के वित्तीय गड़बड़ियों को पकड़ लिया।

 बुडको ने किया नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा

दरअसल बुडको ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा किया।  लेकिन इस दौरान उसने भ्रष्टाचार की सारी सीमाओं को भी पार किया। सीएजी ने शुरुआती ऑडिट में ही 125 करोड़ 53 लाख की लागत से पटना में बनाए गए बुद्धा स्मृति पार्क में कई वित्तीय अनियमितताओं को पकड़ा था।

इसमें कुल 67 करोड़ 20 लाख से अधिक की वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं थी। रिपोर्ट के अनुसार पार्क के निर्माण में संवेदक पारसनाथ डेवलपर्स लिमिटेड द्वारा भारी अनियमतता की गई। इसमें बुडको के अधिकारियों की भूमिका अहम रही। बुद्धा स्मृति पार्क बनाने में बीओक्यू यानि स्टीमेट 58 से 78 प्रतिशत तक अधिक बनाकर सरकारी राशि की बंदरबांट की गई। इसमें कई और निजी कंपनियों को भी खूब फायदा पहुंचाया गया। 

जून 2009 से जून 2017 तक सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में बुडको में गड़बड़ी पकड़ी गई। एक तथ्य ये है कि 13 अरब से अधिक की इन वित्तीय गड़बड़ियों को अबतक विभाग ने खारिज भी नहीं किया है। इन वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए आरटीआई कार्यकर्ता अमित कुमार मंडल ने मुख्य सचिव से मांग की है। 17 सितम्बर को की गई जांच की मांग पर कहीं से कोई प्रशासनिक हरकत नहीं दिख रही है।

आपको बता दें कि सीएजी ने पहले के तीन निरीक्षण रिपोर्ट में बुडको से वित्तीय आपत्तियों पर चार सप्ताह में जवाब मांगा था। जबकि पिछले दो वित्तीय वर्ष के ऑडिट में गड़बड़ियों पर छह सप्ताह के भीतर बुडको से जवाब मांगा था। आरटीआई कार्यकर्ता अमित कुमार मंडल और अशोक कुमार मिश्र ने मुख्य सचिव से लेकर राज्यपाल तक को इस पर संज्ञान लेने की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक जांच नहीं की गई है।

सवाल ये है कि आखिर आठ सालों के ऑडिट रिपोर्ट पर बुडको ने सीएजी को क्यों जवाब नहीं दिया है। सवाल ये भी कि वर्ष 2016 में राज्यपाल और सितम्बर 2018 में मुख्य सचिव से इस मामले की जांच की मांग की गई, लेकिन इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई। बहरहाल अब भी सरकार ने जांच के लिए कोई पहल नहीं की है। इसलिए 13 अरब से अधिक की इस वित्तीय अनियमितता को पटना हाई कोर्ट ले जाने की तैयारी की जा रही है। जाहिर है इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है।

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