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वाह! बिहार की माटी: जिंदा रहते पिता ने देखा था गांव में पुल बनवाने का सपना, बेटे ने पूरा करने में खर्च कर दिए लाखों
Tue, 14 Jun 2022 02:59 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Tue, 14 Jun 2022 02:59 PM IST
सार
महादेव झा का निधन 2020 में हो गया था। अपने अंतिम समय में उन्होंने अपने बेटे सुधीर झा से कहा था कि उनके निधन के बाद श्राद्ध भोज या कर्मकांड में लाखों रुपये खर्च करने की बजाय गांव की सड़क पर पुल का निर्माण कराया जाए।
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पिता की इच्छा पूरी करने के लिए बेटे ने बनवाया पुल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बेटों द्वारा मां-बाप पर सितम ढाने, उन्हें घर से निकालने और वृद्धाश्रम में मजबूर माता-पिता की कितनी ही कहानी आपने पढ़ी होंगी। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो अपने माता-पिता को भगवान की तरह पूजते हैं। बचपन में तो मां-बाप हमारी इच्छाएं पूरी करते हैं, लेकिन बड़े होते ही ऐसे लोग माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए अपनी जी-जान लगा देते हैं।
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ऐसी ही एक खबर बिहार के मधुबनी जिले से सामने आई है, जहां एक बेटे ने अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर दिए। उनकी इच्छा थी कि गांव में पुल बनें। बेटे ने इसे पूरा करके न केवल गांव में पुल बनवाया, बल्कि वर्षों से बदहाली झेल रहे गांव की भी किस्मत बदल दी।
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बरसात के मौसम में होती थी समस्या
मधुबनी जिले के कलुआही प्रखंड के नरार पंचायत के वार्ड नंबर दो में गांव में पुल नहीं था। यहां बरसात का मौसम आते ही गांव में पानी भर जाता था। इससे ग्रामीण गांव में ही फंस जाते थे। उनका निकलना-बैठना तक दूभर हो जाता। कई बार गांव के लोगों ने इस समस्या को प्रशासन के सामने रखा, लेकिन स्थिति जस की तस ही रही।
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बुजुर्ग महादेव झा ने शुरू किए थे प्रयास
ग्रामीणों की परेशानी देखते हुए बुजुर्ग महादेव झा ने गांव में पुल बनाने के लिए निजी प्रयास शुरू किए। उनका सपना था कि उनके जिंदा रहते यह पुल पूरा बन जाए, लेकिन 2020 में उनका निधन हो गया। महादेव झा के बेटे सुधीर झा ने बताया, उनके पिता पेशे से शिक्षक थे। अपने अंमित समय में उन्होंने कहा था कि उनके निधन के बाद श्राद्ध भोज या कर्मकांड में लाखों रुपये खर्च करने के बजाय गांव की सड़क पर पुल का निर्माण कराया जाए।
पुल बनाने के लिए खर्च कर दिए पांच लाख
सुधीर झा ने अपने पिता की इच्छा को पूरी करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने इस पुल के लिए पांच लाख रुपये खर्च कर दिए। दिवंगत महादेव झा के छोटे भाई महावीर झा का कहना है कि पुल बन जाने से ग्रामीणों को काफी राहत मिली है।