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Bihar : 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर तंबाकू का सेवन से, पूर्व मंत्री बोले- कोटपा एक्ट का सख्ती से पालन हो
Wed, 14 Jun 2023 09:46 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Wed, 14 Jun 2023 09:46 PM IST
सार
भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में से 40 रोगी तंबाकू सेवन के कारण मरते हैं। लगभग 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर तंबाकू का सेवन करने वालों को होता है। WHO के अनुमान के मुताबिक, धूम्रपान करने वालों में टीबी की बीमारी का खतरा कई गुणा ज्यादा होता है।
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पटना के एक होटल में तंबाकू के रोकथाम पर आयोजित कार्यक्रम।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज (BIES) पटना और वोलंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BVHA) नई दिल्ली द्वारा "तंबाकू नियंत्रण कानून को मजबूती प्रदान करने में मीडिया की भूमिका" विषय पर पटना के होटल में बुधवार को एक सेमिनार का आयोजन किया गया। तंबाकू उत्पादों को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक मानते हैं। मीडिया को संबोधित करते हुए BIES के निदेशक डॉ. प्यारे लाल ने कहा कि तंबाकू सेवन देश की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है। प्रति वर्ष भारत में तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों से लगभग 13 लाख लोगों की मौत हो रही है। यह देश की उत्पादकता और अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है। भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में से 40 रोगी तंबाकू सेवन के कारण मरते हैं। लगभग 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर तंबाकू का सेवन करने वालों को होता है। WHO के अनुमान के मुताबिक, धूम्रपान करने वालों में टीबी की बीमारी का खतरा कई गुणा ज्यादा होता है।
तंबाकू सेवन से ग्रास नली एवं फेफड़े का कैंसर होने का ज्यादा केस
वहीं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने अपने अभिभाषण में कहा कि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष धूम्रपान से बच्चों में सांस कि बीमारी तेजी से फैल रही है। इसके सेवन से ग्रास नली एवं फेफड़े का कैंसर होने का ज्यादा केस देखा जाता है। अतः इसके रोकथाम के लिए कोटपा एक्ट 2003 जो बनी है उसका सख्ती से पालन होना जरूरी है। इसके लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम में विभिन्न गैर-सरकार संस्थाओं का सहयोग पूर्ण अपेक्षित है। कुछ गैर-सरकारी संस्थाएं जो इस दिशा में कार्य कर रही है उन्हें सरकार के द्वारा सहयोग दिया जाना चाहिए, जिसमें मीडिया कर्मियों की अहम् भूमिका है।
तंबाकू के दुष्परिणामों पर नियमित परिचर्चाएं होनी चाहिए
वहीं डॉ. सरिता शिवांगी, चिकित्सीय मनोवैज्ञानिक, ने परिवार में व्यवहार परिवर्तन की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच तंबाकू के दुष्परिणामों पर नियमित परिचर्चाएं होनी चाहिए, विशेषकर बच्चों के बीच ताकि बच्चे इसके सेवन से दूर रहे।
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हमारा ध्यान बच्चों और युवा वर्ग पर लगाना होगा
इधर, BIES के डिविजनल को-ऑर्डिनेटर स्वर्ण विजय पांडेय ने कहा कि तंबाकू उपयोग के खतरों से हमलारी वर्तमान एवं भावी पीढ़ी को बचाने के लिए हमारा ध्यान बच्चों और युवा वर्ग पर लगाना होगा। ताकि वह तंबाकू उद्योग के लुभावने विज्ञापन के बहकावे में आकर तंबाकू जैसे विषैले चीज का सेवन भूल से भी न करें। इसलिए शिक्षा विभाग के साथ मिलकर स्कूल और कॉलेज में तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम चलाना होगा। जिससे बच्चों और युवाओं को जागरुक किया जा सके।
तंबाकू सेवन से ग्रास नली एवं फेफड़े का कैंसर होने का ज्यादा केस
वहीं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने अपने अभिभाषण में कहा कि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष धूम्रपान से बच्चों में सांस कि बीमारी तेजी से फैल रही है। इसके सेवन से ग्रास नली एवं फेफड़े का कैंसर होने का ज्यादा केस देखा जाता है। अतः इसके रोकथाम के लिए कोटपा एक्ट 2003 जो बनी है उसका सख्ती से पालन होना जरूरी है। इसके लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम में विभिन्न गैर-सरकार संस्थाओं का सहयोग पूर्ण अपेक्षित है। कुछ गैर-सरकारी संस्थाएं जो इस दिशा में कार्य कर रही है उन्हें सरकार के द्वारा सहयोग दिया जाना चाहिए, जिसमें मीडिया कर्मियों की अहम् भूमिका है।
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तंबाकू के दुष्परिणामों पर नियमित परिचर्चाएं होनी चाहिए
वहीं डॉ. सरिता शिवांगी, चिकित्सीय मनोवैज्ञानिक, ने परिवार में व्यवहार परिवर्तन की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच तंबाकू के दुष्परिणामों पर नियमित परिचर्चाएं होनी चाहिए, विशेषकर बच्चों के बीच ताकि बच्चे इसके सेवन से दूर रहे।
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हमारा ध्यान बच्चों और युवा वर्ग पर लगाना होगा
इधर, BIES के डिविजनल को-ऑर्डिनेटर स्वर्ण विजय पांडेय ने कहा कि तंबाकू उपयोग के खतरों से हमलारी वर्तमान एवं भावी पीढ़ी को बचाने के लिए हमारा ध्यान बच्चों और युवा वर्ग पर लगाना होगा। ताकि वह तंबाकू उद्योग के लुभावने विज्ञापन के बहकावे में आकर तंबाकू जैसे विषैले चीज का सेवन भूल से भी न करें। इसलिए शिक्षा विभाग के साथ मिलकर स्कूल और कॉलेज में तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम चलाना होगा। जिससे बच्चों और युवाओं को जागरुक किया जा सके।