Bihar: इस तकनीक से हृदय रोग का बेहतर इलाज, डॉ. रविशंकर सिंह बोले- हर्ट सर्जरी के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं
डॉ. रवि शंकर सिंह ने बताया कि कम उम्र के हृदय रोगियों में धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता की आदत को कॉमन पाया गया है। धूम्रपान हृदय रोगों का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है, इससे तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए।
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स्ट्रेनइमेजिंग और 3डी इकोकार्डियोग्राफी जैसी तकनीक से हृदय चिकित्सा में तेजी से बदलाव हुआ है। इकोकार्डियोग्राफी के क्षेत्र में विकास से अब मरीजों का बेहतर इलाज संभव होगा। अब बिहार के लोगों को हृदय संबंधित सर्जरी के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। यहां हृदय से जुड़ी विभिन्न प्रकार की बीमारियों के इलाज एवं सभी जटिल सर्जरी के विकल्प उपलब्ध है। यह बातें जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटना के चिकित्सा निदेशक डॉ. रवि शंकर सिंह ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि हृदय रोगों का खतरा वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र के लोग भी इसके शिकार हुए हैं। ह्रदय हमारे शरीर के सबसे जटिल अंगों में से एक माना जाता है, जितना क्लिष्ट इसकी कार्यप्रणाली है उतनी ही क्लिष्ट इसका निदान एवं उपचार। डॉ. रवि शंकर सिंह ने बताया कि हृदय रोगों के खतरे को जानने के लिए सबसे पहले इसके लक्षणों के बारे में जानना आवश्यक है। अक्सर लोग गैस की समस्या समझकर इसे ठीक करने वाली दवाइयां ले लेते हैं, यह नुकसानदायक हो सकता है। जिन लोगों को बताए गए लक्षणों का अनुभव होता हो उन्हें ईसीजी जांच जरूर करा लेनी चाहिए, जिससे समय रहते समस्या का निदान और इलाज हो सके।
जीवनशैली को बेहतर रखकर हृदय रोगों के खतरे से बचा जा सकता है
चिकित्सा निदेशक डॉ. रवि शंकर सिंह ने बताया कि कम उम्र के हृदय रोगियों में धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता की आदत को कॉमन पाया गया है। धूम्रपान हृदय रोगों का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है, इससे तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए। नियमित अंतराल पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें और स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें। जीवनशैली को बेहतर रखकर हृदय रोगों के खतरे से बचा जा सकता है। मेदांता अस्पताल बिहार में उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस के साथ ही बिहार की चिकित्सा सुविधा को बेहतर बनाने के लिए इस प्रकार के ज्ञानवर्धक वर्कशॉप के नियमित आयोजन करता रहता है।
इकोकार्डियोग्राफी जैसी हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव आ रहे हैं
दरअसल, पटना में मेदांता अस्पताल की पहल पर देश एवं बिहार के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्टों ने इकोकार्डियोग्राफी के अत्याधुनिक तकनीक द्वारा हृदय सम्बंधित बिमारियों का सटीक इलाज की तकनीक पर परिचर्चा की। दो दिवसीय इस वर्कशॉप में प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्टों के अलावा तकरीबन 180 डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स ने भाग लिया। मेदांता हार्ट इंस्टिट्यूट के निदेशक एवं एचओडी डॉ. प्रमोद कुमार ने इकोकार्डियोग्राफी के फायदों के बारे में बताते हुए कहा कि मौजूदा समय में इकोकार्डियोग्राफी के क्षेत्र में काफी उन्नति हो रही है और स्ट्रेनइमेजिंग और 3डी इकोकार्डियोग्राफी जैसी तकनीक से हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव आ रहे हैं जिस से अब मरीजों को ज्यादा सटीक इलाज मिल पायेगा। वर्कशॉप की आयोजन समिति की सचिव डॉ. श्रद्धा रंजन ने बताया कि इस वर्कशॉप में पटना के लगभग सभी प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ आये हुए हैं और इस दो दिवसीय वर्कशॉप में ज्ञानवर्धक व्याख्यान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण के सत्र भी हुए। इस पूरे सत्र में प्राप्त जानकारी का लाभ भविष्य में सहभागी डॉक्टरों के द्वारा बिहार के मरीजों को मिलेगा।