लालू के खिलाफ प्रचार करेंगे उनके 'चहेते' दामाद
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इश्क और जंग में सबकुछ जायज है कभी यह कहावत आम थी लेकिन अगर इसमें चुनाव भी जोड़ दें तो भी कुछ गलत नहीं होगा। कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है बिहार के चुनावी रण में जहां अपने ही अपनों के सामने मोर्चा संभाले खड़े हैं।
ज्यादा दिन नहीं बीते जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव अपनी सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी का रिश्ता पक्का करने के लिए यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के दरवाजे पर पहुंचे थे।
मुलायम के पोते तेज प्रताप सिंह के साथ लालू की बेटी की शाही शादी का गवाह तो पूरा देश ही बना था लेकिन ताज्जुब नहीं मानिएगा जब लालू के वही चहेते दामाद तेज प्रताप बिहार चुनाव में उनके खिलाफ प्रचार करते नजर आएं।
तेज प्रताप से ब्याही है लालू की बेटी राजलक्ष्मी
मैनपुरी के सांसद तेज प्रताप ने इस बात की घोषणा कर दी है कि वह सपा के लिए बिहार में प्रचार करेंगे। कुछ दिन पहले तक लालू यादव के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी ने महागठबंधन से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया तो लालू के लिए मुश्किल बढ़ती चली गईं।
इसके बाद मुलायम ने पप्पू यादव और तारिक अनवर की एनसीपी के साथ मिलकर छह दलों का गठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला किया तो लालू और उनके जोड़ीदार नीतीश अभी इसकी काट ढूंढ ही रहे थे कि अब तेज प्रताप के रूप में उनके सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
सूत्रों के अनुसार मुलायम सिंह अपने ज्यादातर उम्मीदवार यादव बहुल सीटों पर ही उतारेंगे। चुनावों में मुलायम के साथ ही यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के अलावा तेज प्रताप के भी चुनाव प्रचार करने की चर्चा है।
विरोधी दल बना सकते हैं इसे मुद्दा
सपा अपने उम्मीदवार उन सीटों पर भी उतारेगी जहां लालू यादव की राजद के उम्मीदवार भी खड़े होंगे। ऐसे में सपा की चुनावी रणनीति में तेज प्रताप बिल्कुल सटीक बैठते हैं। जो लालू यादव के दामाद होने के साथ साथ सपा के युवा सांसद भी हैं।
तेज प्रताप ने भी अपने दादा और राजनीतिक संरक्षक मुलायम सिंह की बातों को सर आंखों पर लेकर अपने ससुर के खिलाफ प्रचार करने की घोषणा कर दी है। माना जा रहा है कि पहले दौर के चुनाव से पहले ही तेज प्रताप बिहार में कई सीटों पर प्रचार कर सकते हैं।
वहीं लालू के लिए बड़ी दिक्कत ये हो सकती है कि विरोधी भी इस मुद्दा बनाकर उन पर हमला कर सकते हैं। ऐसे में लालू दूसरों के वार को तो जैसे तैसे झेल जाएं लेकिन अपनों के हमले को वो कैसे देख पाएंगे इस पर सबकी निगाहें रहेंगी।