बिहार में बीजेपी का चेहरा नमो या सुमो? जंग शुरु
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बिहार चुनावों में बेशक अभी काफी दिन शेष हों लेकिन भाजपा में इसको लेकर चेहरे की रार शुरू हो गई है। केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार ने मंगलवार को ही बिहार चुनाव नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर लड़ने की घोषणा कर विपक्षियों को संदेश देने की कोशिश की वहीं कुछ देर बाद ही पूर्व उप मुख्यममंत्री सुशील मोदी ने उनके इस दावे को नकार दिया।
मतलब साफ था कि सुशील मोदी अभी भी खुद को बिहार में बड़ा मोदी साबित करने की कोशिश में हैं। बात साफ भी है कि अभी तक मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहे मोदी अगर इस मुकाबले में पिछड़े तो उन्हें फिर सीएम की कुर्सी से भी दूर रहना पड़ सकता है।
बिहार चुनाव में राजद और जेडीयू के गठबंधन के बाद जहां नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर मोहर लगने के साथ ही मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के सामने यह सवाल खड़ा हो गया था कि वह भी जल्द से जल्द मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा कर दे।
सुशील मोदी ने किया खंडन, नहीं हुई चेहरे की घोषणा
बिहार भाजपा में सबसे बड़ा चेहरा सुशील मोदी को ही माना जाता है पूर्व में वह नीतीश सरकार में उप मुख्यमंत्री का पद भी संभाल चुके हैं, ऐसे में उन्हें ही संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर आगे किए जाने की संभावना जताई जा रही थी।
हालांकि इसके अलावा केन्द्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी, रविशंकर प्रसाद और शाहनवाज हुसैन जैसे बड़े चेहरे पर भी अलग अलग धडों में पसंद किए जाते रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा ने पिछले कुछ समय से राज्यों में चुनाव लड़ने की अपनी रणनीति बदल दी है।
जिसमें वह मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चेहरा आगे करने की बजाय प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे को आगे रखकर चुनाव लड़ती है। जिसके बाद वह मुख्यमंत्री के तौर पर अचानक ही किसी नए चेहरे को लेकर आ जाती है।
बदली रणनीति के साथ उतर सकती है भाजपा
पडोसी राज्य झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि में भाजपा इसे सफलता पूर्वक आजमा भी चुकी है, दिल्ली में भाजपा ने यह रणनीति बदलकर किरण बेदी को सीएम के तौर पर प्रोजक्ट किया तो वहां उसे मुंह की खानी पड़ी थी।
ऐसे में बिहार चुनाव में भी ज्यादा संभावना जताई पीएम मोदी के चेहरे के तौर पर ही चुनाव लड़ने की जताई जा रही थी, मंगलवार को केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार ने भी पटना में इस बात की तस्दीक की। जिसके बाद इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि बिहार चुनाव मोदी के नाम पर ही लड़े जाएंगे।
लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री सुशील मोदी को यह बात नागवार गुजरी और उन्होंने तुरंत इसका खंडन जारी कर दिया। ऐसे में साफ है कि बिहार चुनाव में सुशील मोदी न अपनी दावेदारी कम करना चाहते हैं न विश्वसनीयता।
इसका असर आने वाले कुछ दिनों में उस समय भी देखने को मिल सकता है जब मोदी राज्य में चुनाव प्रचार के लिए आएंगे।