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गर्भाशय निकालने के मामले में 708 महिलाओं को 18 करोड़ का मुआवजा
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 04 May 2016 05:53 PM IST
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बिहार के मानवाधिकार आयोग ने राज्य की सात सौ से ज्यादा महिलाओं को 18 करोड़ का मुआवजा देने का निर्णय लिया है। आरोप है कि स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत साल 2012 में इन महिलाओं का गर्भाशय गलत तरीके से निकाल लिया गया था। डॉक्टरों ने सारा खेल मेडिकल इंश्योरेंस के तहत मिलने वाली रकम को हड़पने के लिए रचा था।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार अगस्त 2012 में सामने आए इस मामले पर बिहार मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आयोग के चेयरमैन बिलाल नजकी ने अपने निर्णय में कहा, सूचनाओं के अनुसार उस समय कई कम उम्र महिलाओं के गर्भाशय भी निकाले गए थे। इनमें से कुछ आपरेशन तो फर्जी चिकित्सकों ने भी कर दिए थे।
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आयोग की समिति ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा गठित गई जांच समिति की रिपोर्ट मांगी है जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2013 में मामले की जांच के लिए गठित किया था।
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सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में समिति ने बताया था कि उसने जांच के दौरान 540 महिलाओं को चिह्नित किया। आयोग ने रिपोर्ट के आधार पर ही पीड़ित महिलाओं के लिए उनकी आयु के अनुसार 1.5 लाख से 2.5 लाख तक का मुआवजा देने का निर्देश दिया। अभी 123 मामलों के संबंध में पूरी जांच रिपोर्ट आनी शेष है।
बता दें कि साल 2012 में बिहार के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में महिलाओं के गर्भाशय निकालने का मामला सामने आया था। जानकारी के अनुसार चिकित्सकों ने आपरेशन पर मिलने वाले इंसेंटिव की चाहत में बिना बात के ही आपरेशन कर उन महिलाओं के गर्भाशय निकाल दिए थे।